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यूपी: यहां परिवार चलाने के लिए करनी पड़ती है हेराफेरी

Thu, 04 Jul 2013 11:00 AM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क Updated Thu, 04 Jul 2013 11:00 AM IST
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why there is corruption in uttar pradesh

सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की सबसे अहम जमीन होने के बावजूद प्रदेश की हर सरकार हमेशा कोटेदार संवर्ग को पूरी तरह हाशिये पर रखती है।

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राशन दुकानदारों को हिकारत के साथ बस इसी सोच से देखा जाता है कि वह गड़बड़ी करते हैं। सच्चाई इससे इतर है।

बस इत्ता सा कमीशन!
राशन विक्रेताओं को बीपीएल अनाज बांटने पर महज 17 पैसा प्रति कुंतल, अन्त्योदय अनाज पर 5 और एपीएल गेहूं पर 12 पैसा प्रति कुंतल की दर से तय नाममात्र का कमीशन ही मिलता है।
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खुद मानी अपनी गलती
महंगाई के दौर में घर परिवार का खर्च चलाने को कुछ गड़बड़ी करना मजबूरी हो जाता है। यह बात राशन दुकानदारों ने बुधवार को आयोजित नवगठित एसोसिएशन की पहली कार्यकारिणी बैठक में हुई स्वीकारी।
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अखिलेश यादव को भेजा ज्ञापन

पीडीएस के तहत राशन दुकानें संचालित करने वाले कोटेदारों ने एकजुट हो सरकार से फिक्स मासिक मानदेय के निर्धारण की मांग उठाते हुए 11 सूत्रीय मांगों का एक ज्ञापन भी मुख्यमंत्री को भेजा।

हाल ही हुआ था गठन

राशन विक्रेताओं द्वारा संचालित विभिन्न संगठनों को एकजुट कर बीते दिनों फेयर प्राइस शॉप डीलर्स एसोसिएशन का गठन किया गया था। इसकी पहली कार्यकारिणी की बैठक बुधवार को राजेंद्र त्यागी की अध्यक्षता में हुई।

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