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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Without moot court 100 colleges in five districts are awarding degrees varanasi mirzapur Bhadohi

Moot Court: मूट कोर्ट के बिना मान्यता तक नहीं मिलती, पांच जिलों के 100 कॉलेज बांट रहे डिग्री; जानें इनका नाम

Sun, 12 Oct 2025 12:26 PM IST
अमन विश्वकर्मा अभिषेक मिश्रा, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अभिषेक मिश्रा, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 12 Oct 2025 12:26 PM IST
सार

वाराणसी, भदोही, मिर्जापुर समेत विभिन्न जिलों के लॉ कॉलेजों में मूट कोर्ट की व्यवस्था नहीं है। छात्रों को सिर्फ किताबी शिक्षा दी जा रही है। उनसे कानूनी बहस करवाने के लिए मूट कोर्ट जरूरी होता है।

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Without moot court 100 colleges in five districts are awarding degrees varanasi mirzapur Bhadohi
मूट कोर्ट की सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : संवाद

विस्तार

Varanasi News: बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के स्पष्ट निर्देश हैं कि प्रत्येक लॉ कॉलेज में मूट कोर्ट की व्यवस्था अनिवार्य होनी चाहिए। मूट कोर्ट वह काल्पनिक अदालत होती है, जहां छात्रों को कानूनी तर्क, अनुसंधान और बहस की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी जाती है। 

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इसके बिना छात्रों को कानून की पढ़ाई का व्यावहारिक पक्ष समझना मुश्किल होता है लेकिन वाराणसी समेत महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से संबद्ध पांच जिलों, चंदौली, सोनभद्र, भदोही और मिर्जापुर, में संचालित अधिकांश लॉ कॉलेजों में मूट कोर्ट की व्यवस्था नहीं है। यहां के छात्र केवल किताबी ज्ञान तक ही सीमित रह जाते हैं।
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काशी विद्यापीठ से संबद्ध इन पांच जिलों में लगभग 100 से अधिक लॉ कॉलेज संचालित हो रहे हैं। इनमें सरकारी कॉलेजों की तुलना में निजी कॉलेजों की संख्या कहीं अधिक है। ये संस्थान मनमानी फीस वसूलकर छात्रों को केवल डिग्री प्रदान कर रहे हैं, जबकि व्यावहारिक प्रशिक्षण की मूलभूत आवश्यकता पूरी नहीं हो रही। 

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मान्यता पर उठे सवाल : हरिश्चंद्र पीजी कॉलेज सहित अन्य सभी लॉ कॉलेजों को मान्यता महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय से मिली है। इसपर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। ऐसे में बासीआई की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। बीसीअाई से ही एलएलबी पास छात्रों को मान्यता मिलती है।

लॉ कॉलेजों में मूट कोर्ट अनिवार्य है। इसके बिना छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान नहीं मिल पाता। विश्वविद्यालयों को मान्यता देने से पहले इस बिंदु की अनिवार्य रूप से जांच करनी चाहिए। - मंगलेश दुबे, अध्यक्ष, सेंट्रल बार एसोसिएशन

 

लॉ कॉलेजों को पहले अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होता है। इसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया की टीम निरीक्षण कर कॉलेज को मान्यता देती है। यदि किसी कॉलेज में मूट कोर्ट नहीं है तो बार काउंसिल ऑफ इंडिया को इसका संज्ञान लेकर संबंधित कॉलेजों के विरुद्ध कार्रवाई करनी चाहिए। - डाॅ. ज्ञान प्रकाश वर्मा, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी, वाराणसी

51 वर्षों में नहीं बन पाया मूट कोर्ट
वाराणसी स्थित हरिश्चंद्र पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में 1974 से लॉ की पढ़ाई शुरू हुई थी। लेकिन बीते 51 वर्षों में कॉलेज प्रशासन ने मूट कोर्ट की स्थापना नहीं की। कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो. रजनीश कुंवर ने बताया कि छात्रों की मांग पर कॉलेज की नई इमारत में मूट कोर्ट और कंप्यूटर लैब का निर्माण कराया जा रहा है, जो दो माह में पूरा हो जाएगा।

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