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ढांचा विध्वंस: जहां से की न्यायिक सेवा की शुरुआत वहीं के बारे में फैसला सुना हुए रिटायर, जानें कौन हैं वो जज

Thu, 01 Oct 2020 12:26 AM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जौनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जौनपुर Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Thu, 01 Oct 2020 12:26 AM IST
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Where the job started, the final decision was given there
Babri Masjid

अयोध्या में विवादित ढांचा विध्वंस के मामले में बुधवार को फैसला सुनाने वाले सीबीआई की विशेष अदालत के न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार यादव जौनपुर जिले की शाहगंज तहसील क्षेत्र के पखनपुर गांव के मूल निवासी हैं।

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वर्ष 1991 में उनकी पहली तैनाती मुंसिफ के रूप में फैजाबाद (अब अयोध्या) में हुई।  यह संयोग ही है कि जहां से उन्होंने सेवा की शुरुआत की, उसी जगह के बारे में फैसला देकर सेवानिवृत्त हुए। अयोध्या मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाने वाले एसके यादव पर गांव और पूरे जिले के लोगों को गर्व है।

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सुरेंद्र कुमार यादव की बुनियादी शिक्षा शाहगंज परिषदीय विद्यालय से हुई है। उनके जन्म से ऐन पहले ही पिता का निधन हो गया था। आठवीं के बाद आगे की शिक्षा बड़े पिता नरसिंह यादव की देखरेख में बीएचयू से हुई। नरसिंह यादव डीएलडब्लू में नौकरी करते थे। उनकी हाईस्कूल की पढ़ाई डीएलडब्लू इंटर कॉलेज वाराणसी से हुई।

सेंट्रल हिंदू ब्वायज स्कूल वाराणसी (सीएचएस) से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। उसके बाद बीएससी, एलएलबी और एलएलम की पढ़ाई बीएचयू से पूरी की। एसके यादव की मां भुइला देवी गांव में ही रहती हैं। वह कहती हैं कि सुरेंद्र बचपन से ही शांत स्वभाव के हैं। गांव या स्कूल में भी उसका कभी किसी से झगड़ा नहीं हुआ। कभी कोई ऐसा काम नहीं किया, जिसका उलाहना आया हो। वह अपने माता-पिता की इकलौते संतान हैं। 

डॉक्टर बनना था लक्ष्य, बने जज 

सीबीआई की विशेष अदालत के न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार पहले डॉक्टर बनना चाहते थे। उनके चाचा रेलवे में सेक्शन इंजीनियर विनोद यादव कहते हैं कि बीएचयू से बीएससी की पढ़ाई के दौरान उन्होंने सीपीएमटी की परीक्षा दी, लेकिन सफलता नहीं मिली।

फिर उन्होंने बीएचयू से ही एलएलबी और एलएलएम की पढ़ाई की और न्यायिक सेवा से जुड़ गए। 28 साल की न्यायिक सेवा में उन्होंने कभी अपनी ईमानदारी पर दाग नहीं लगने दिया। गांव से उनका गहरा लगाव है।

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बेटा और बेटी हैं डॉक्टर

इंटरमीडिएट की पढ़ाई के दौरान ही डॉक्टर बनने की ख्वाहिश रखने वाले एसके यादव खुद भले ही डाक्टर नहीं बने, लेकिन बड़ा बेटा अभिषेक यादव और बेटी अपर्णा यादव दोनों एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर डॉक्टर बन गए हैं। दोनों लखनऊ में हैं। जबकि दूसरा बेटा आर्यन सिविल सेवा की तैयारी कर रहा है।

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