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मोदी-मैक्रों यात्राः फ्रांस के रास्ते यूरोप में मिलेगा काशी को नया बाजार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 13 Mar 2018 10:27 AM IST
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उत्पाद तैयार करती कारीगर
- फोटो : अमर उजाला
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काशी और फ्रांस के बीच शिल्प और व्यापार का वर्षों पुराना नाता रहा है। फ्रांस के राष्ट्रपति का काशी आना, इस रिश्ते को और मजबूती प्रदान करेगा। इतना ही नहीं, फ्रांस के रास्ते यूरोप में काशी को एक बड़ा बाजार भी मिलने की उम्मीद जगी है। साथ ही, यहां से होने वाले उत्पादों का निर्यात भी बढे़गा।
काशी को शिल्प व बुनकरी से जुड़े विशेष पैकेज की घोषणा भी राष्ट्रपति कर सकते हैं। फ्रांस और बनारस के बीच बुनकरी का पुराना रिश्ता है। फ्रांस के मोनोग्राम, एंबलम बड़े पैमाने पर काशी से बनकर जाते रहे हैं। यही नहीं, बैच और कैप के ऊपर होने वाली कढ़ाई के लिए भी काशी के बुनकर ही रास आते रहे हैं।
इन सामानों के लिए बनारस बड़ा बाजार रहा है। इसके अलावा जर्मनी, कनाडा और दुनिया के अन्य देशों में भी ऐसे उत्पाद भेजे जाते रहे हैं। काशी के लिए फ्रांस सहित यूरोप के अन्य देश स्कार्फ, स्टॉल, बेड और कुशन कवर, पर्दे के कपड़ों के अच्छे बाजार हैं।
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यहां इन सामानों को नियमित रूप से भेजा जाता है। ऐसे में फ्रांस के राष्ट्रपति का काशी आगमन इन रिश्तों को और प्रगाढ़ बनाएगा। फ्रांस सहित यूरोप के अन्य बड़े बाजार में काशी के शिल्प की पैठ गहरी होगी। इसको लेकर बुनकर और शिल्पी दोनों आशान्वित हैं। काशी के लिए विशेष पैकेज मिलने की भी उम्मीद है।
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काशी को शिल्प व बुनकरी से जुड़े विशेष पैकेज की घोषणा भी राष्ट्रपति कर सकते हैं। फ्रांस और बनारस के बीच बुनकरी का पुराना रिश्ता है। फ्रांस के मोनोग्राम, एंबलम बड़े पैमाने पर काशी से बनकर जाते रहे हैं। यही नहीं, बैच और कैप के ऊपर होने वाली कढ़ाई के लिए भी काशी के बुनकर ही रास आते रहे हैं।
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इन सामानों के लिए बनारस बड़ा बाजार रहा है। इसके अलावा जर्मनी, कनाडा और दुनिया के अन्य देशों में भी ऐसे उत्पाद भेजे जाते रहे हैं। काशी के लिए फ्रांस सहित यूरोप के अन्य देश स्कार्फ, स्टॉल, बेड और कुशन कवर, पर्दे के कपड़ों के अच्छे बाजार हैं।
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यहां इन सामानों को नियमित रूप से भेजा जाता है। ऐसे में फ्रांस के राष्ट्रपति का काशी आगमन इन रिश्तों को और प्रगाढ़ बनाएगा। फ्रांस सहित यूरोप के अन्य बड़े बाजार में काशी के शिल्प की पैठ गहरी होगी। इसको लेकर बुनकर और शिल्पी दोनों आशान्वित हैं। काशी के लिए विशेष पैकेज मिलने की भी उम्मीद है।
आठ शिल्पों का सजीव प्रदर्शन देखेंगे फ्रांस के राष्ट्रपति
फ्रांस के मोनोग्राम, एंबलम बड़े पैमाने पर काशी से बनकर जाते रहे हैं।
- फोटो : अमर उजाला
जीआई विशेषज्ञ डॉ. रजनीकांत ने बताया कि आने वाले समय में बनारस और पूर्वांचल के शिल्पियों के लिए यह वरदान साबित होगा। यहां पर जितने भी जीआई (ग्लोबल इंडेक्स) उत्पाद हैं उनको बाजार मिलेगा। बनारस के हस्तशिल्प की खो रही प्रतिष्ठा वापस आएगी। कहा कि हस्तशिल्प के विकास के क्षेत्र में यह यात्रा मील का पत्थर साबित होगी।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रोन दीन दयाल हस्तकला संकुल में आठ शिल्पों का सजीव प्रदर्शन देखेंगे। इस दौरान कच्चा माल से लेकर उसके खूबसूरत आकार लेने तक का पूरा सफर दिखाया जाएगा। यह सारे उत्पाद जीआई होंगे।
इसके अलावा स्थानीय जीआई और संभावित जीआई उत्पादों के 14 स्टॉल सहित 28 स्टॉल भी लगाए जाएंगे। एक दो दिन में डीसी हैंडीक्राफ्ट शांतमनु के आगमन के बाद कार्यक्रमों को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति क्राफ्ट म्यूजियम देखेंगे जहां बुनकरी के अलावा काशी की परंपरा और खान पान की विधाओं से भी रूबरू होंगे।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रोन दीन दयाल हस्तकला संकुल में आठ शिल्पों का सजीव प्रदर्शन देखेंगे। इस दौरान कच्चा माल से लेकर उसके खूबसूरत आकार लेने तक का पूरा सफर दिखाया जाएगा। यह सारे उत्पाद जीआई होंगे।
इसके अलावा स्थानीय जीआई और संभावित जीआई उत्पादों के 14 स्टॉल सहित 28 स्टॉल भी लगाए जाएंगे। एक दो दिन में डीसी हैंडीक्राफ्ट शांतमनु के आगमन के बाद कार्यक्रमों को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति क्राफ्ट म्यूजियम देखेंगे जहां बुनकरी के अलावा काशी की परंपरा और खान पान की विधाओं से भी रूबरू होंगे।