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Varanasi News: 44 लाख के फ्लैट की धोखाधड़ी में 6 पर परिवाद, राज्यमंत्री के नाम से धमकी का आरोप; जानें मामला

Thu, 20 Aug 2026 06:19 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Thu, 20 Aug 2026 06:19 AM IST
सार

वाराणसी में 44 लाख रुपये के फ्लैट की कथित धोखाधड़ी के मामले में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने छह लोगों के खिलाफ परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया है। आरोप है कि फ्लैट खरीदने के बाद रजिस्ट्री नहीं की गई और राज्यमंत्री डॉ. हंसराज विश्वकर्मा का नाम लेकर धमकी दी गई। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्तूबर को होगी।

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Varanasi Complaint filed against 6 for fraud involving 44 lakh flat allegations of threats Crime News
वाराणसी कोर्ट। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नीरज कुमार त्रिपाठी की अदालत ने 44 लाख रुपये के फ्लैट की कथित धोखाधड़ी के मामले में छह लोगों के खिलाफ परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया है। अदालत ने प्रदीप कुमार की याचिका पर यह आदेश दिया। मामले में अगली सुनवाई 15 अक्तूबर को होगी। इस दिन संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे।

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अदालत में दाखिल याचिका के अनुसार, प्रदीप कुमार ने कंचनपुर में प्रत्यक्ष इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के तीन बीएचके फ्लैट को 44 लाख रुपये में खरीदने का सौदा किया था। आरोप है कि उस समय भाजपा नेता और वर्तमान राज्यमंत्री डॉ. हंसराज विश्वकर्मा कंपनी के निदेशक थे। वर्ष 2023 में वह कंपनी के निदेशक पद से हट गए।

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प्रदीप के मुताबिक, उन्होंने कंपनी के निदेशक अविनाश उपाध्याय को चौथी मंजिल स्थित फ्लैट के लिए 25 लाख रुपये दिए थे। 20 अगस्त 2020 को इसके संबंध में नोटरी समझौता भी किया गया। समझौते में राघवेंद्र प्रताप सिंह, राम द्विवेदी और विवेक उपाध्याय को गवाह बनाया गया था। इसके बाद तीन सितंबर 2020 को फ्लैट में गृह प्रवेश की पूजा भी कराई गई।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि बाद में जब वह फ्लैट की रजिस्ट्री कराने पहुंचे तो अविनाश उपाध्याय टालमटोल करने लगे। प्रदीप के अनुसार, जब वह फ्लैट में रहने गए तो राघवेंद्र प्रताप सिंह ने फ्लैट पर अपना अधिकार जताते हुए उन्हें बाहर निकाल दिया और ताला लगा दिया। आरोप है कि अविनाश उपाध्याय और राम द्विवेदी ने भी राघवेंद्र के दावे की पुष्टि की।

इसके बाद प्रदीप को छह और सात लाख रुपये के दो चेक दिए गए, लेकिन दोनों चेक बाद में बाउंस हो गए। राघवेंद्र की ओर से व्हाट्सएप पर भेजे गए कथित अनुबंध पत्र में बताया गया कि रकम संतोष दुबे नामक कंपनी निदेशक ने ली है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने डॉ. हंसराज विश्वकर्मा का नाम लेकर उन्हें डराया-धमकाया।

प्रदीप ने 22 जुलाई 2025 को पुलिस आयुक्त से शिकायत की थी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर अदालत की शरण ली। अदालत ने अब छह लोगों के खिलाफ परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया है। राज्यमंत्री डॉ. हंसराज विश्वकर्मा का पक्ष जानने के लिए फोन किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।

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