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यूपी के इस जिले में बच्चों को खिलाई जा रही एक्सपाइरी डेट की दवाएं

Fri, 23 Feb 2018 10:39 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,सोनभद्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,सोनभद्र Updated Fri, 23 Feb 2018 10:39 AM IST
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uttar pradesh these districts childrens get expiry date medicine
आरकेएसके टीम के सामने आई गड़बड़ी तो रह गए अवाक - फोटो : अमर उजाला
जिन बच्चों पर देश का भविष्य टिके होने की बात कही जाती है। उन्हीं बच्चों को सेहत दुरुस्त रखने के नाम पर एक्सपाइरी डेट की दवाएं खिलाई जा रही हैं। गुरुवार को यह राज खुला सोनभद्र जिले सीमावर्ती राजगढ़ ब्लाक (मिर्जापुर जिला) में राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के जांच के दौरान जब यह सच सामने आया तो लखनऊ से आई टीम हैरान रह गई।
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राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की सक्रियता को लेकर भी कई शिकायतें मिली। टीम सोमवार को शासन को रिपोर्ट सौंप विस्तृत जांच की संस्तुति करेगी।
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टीम की अगुवाई कर रहे एनएचएम के डिप्टी जनरल मैनेजर डा. आनंद कुमार अग्रवाल सबसे पहले राजगढ़ सीएचसी से चंद कदम दूर प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय पहुंचे। यहां का नजारा देख वह हैरान रह गए।
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यहां बच्चों में वितरित की जाने वाली आयरन गोली की पैकिंग देखी तो वह सितंबर 2017 में ही एक्सपायर हो चुकी थी। प्रधानाध्यापक ने बताया कि दो महीने बच्चों का स्वास्थ्य जांचने आबीएसके की टीम आई थी लेकिन उन्होंने भी डेट एक्सपायर होने की जानकारी नहीं दी।

कोन और गुरुसंडी ब्लाक के भी विद्यालयों में यहीं स्थिति मिली। राजगढ़ ब्लाक के कस्तूरबा गांधी विद्यालय जाकर स्थिति जांची तो पता चला कि दो महीने पहले तक यहां छात्राओं को आयरन की लाल गोली खिलाई गई है। जबकि उन्हें नीली गोली देनी थी।

लाल गोली गर्भवती महिलाओं को खिलाई जाती है। आशा, एएनएम का छह माह का पारिश्रमिक भी रूका मिला। जबकि जिले से वितरित होने वाली धनराशि ब्लॉक को भेज दी गई।

60 रुपये में चार छोटी पूड़ी और थोड़ी सी सब्जी

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आरकेएसके टीम के सामने आई गड़बड़ी तो रह गए अवाक - फोटो : अमर उजाला

डिप्टी जनरल मैनेजर के मुताबिक जब उन्होंने यहां पीयर एजुकेटर प्रशिक्षण केंद्र की स्थिति जांची तो पता चला कि सात बैच का प्रशिक्षण पूरा होने की रिपोर्ट भेजी गई है। जबकि एक भी बैच के कागज पूरे नहीं थे। गुरुवार से शुरू हुए आठवें बैच में भी 40 की जगह 14 प्रशिक्षणार्थी ही मौजूद थे।

प्रशिक्षण केंद्रों पर प्रशिक्षणार्थियों को खाना देने के लिए 60 रुपये प्रति व्यक्ति का टेंडर दिया गया है लेकिन दिए जा रहे खाने की मात्रा सिर्फ चार छोटी पूड़ी और थोड़ी सी सब्जी थी। उसकी गुणवत्ता और पैकिंग की स्थिति भी काफी खराब थी।

यहां के बाद टीम प्रशिक्षण केंद्र से चंद कदम की दूरी पर स्थित प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय पहुंची।  डा. आनंद कुमार अग्रवाल ने बतायाकि नोडल अधिकारी एसीएमओ को हर हाल में मार्च तक स्थिति दुरुस्त करने की चेतावनी दी गई है।
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