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यूपी पुलिस की कमाई का तमाशा, एनएच-2 पर पशु तस्करों को सिखाई नई भाषा
पुष्पेंद्र कुमार त्रिपाठी,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sun, 07 Oct 2018 01:36 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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पशु तस्करों को सेफ रूट देने के लिए पुलिस ने कोड वर्ड की एक नई भाषा गढ़ी है। प्रति माह तीन से पांच लाख रुपये लेकर पशु तस्करों को कोड वर्ड दे दिए जाते हैं और फिर एनएच-2 पर उनके वाहनों की जांच नहीं होती है। पुलिस और तस्करों की मिलीभगत से भदोही से चंदौली के बीच यह खेल जारी है। इस खेल में गाय के लिए व्हाइट गोल्ड, बैल के लिए सफेदा और भैंस के लिए डायमंड कोड वर्ड का इस्तेमाल किया जा रहा है।
पढ़ेंः पशु तस्करों का नेटवर्क है बनारस में बहुत ही तगड़ा, वायरल ऑडियो क्लिप ने पुलिस की खोल दी है पोल
पशु तस्करी के इस खेल में पुलिस के ही आठ बर्खास्त सिपाही बिचौलिया बने हुए हैं। ये हाइवे के किनारे के थानों के थानेदारों और चौकी प्रभारियों से सौदेबाजी करते हैं। तीन से पांच लाख रुपये महीने या फिर प्रति वाहन पांच से दस हजार रुपये के बीच सौदा तय होता है। पुलिस सूत्रों के अनुसार फोरलेन पर सामान्यतया वाहन चेकिंग न होने के कारण नई दिल्ली से कोलकाता को जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग - दो पशु तस्करी के लिए सुरक्षित रूट बना हुआ है।
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बर्खास्त आठ सिपाहियों के प्रलोभन में आकर भदोही से चंदौली के बीच के ऊंज, गोपीगंज, औराई, मिर्जामुराद, रोहनिया, लंका, रामनगर, मुगलसराय, अलीनगर, चंदौली और सैयदराजा थाने पर वर्षों से तैनात सिपाही इस अवैध धंधे को प्रश्रय दिलाने में अहम भूमिका का निर्वहन करते हैं। सख्ती बढ़ने पर यह धंधा मंदा हो जाता है और माहौल सामान्य होते ही सब कुछ जैसे का तैसा चलने लगता है।
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पशु तस्करी के इस खेल में पुलिस के ही आठ बर्खास्त सिपाही बिचौलिया बने हुए हैं। ये हाइवे के किनारे के थानों के थानेदारों और चौकी प्रभारियों से सौदेबाजी करते हैं। तीन से पांच लाख रुपये महीने या फिर प्रति वाहन पांच से दस हजार रुपये के बीच सौदा तय होता है। पुलिस सूत्रों के अनुसार फोरलेन पर सामान्यतया वाहन चेकिंग न होने के कारण नई दिल्ली से कोलकाता को जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग - दो पशु तस्करी के लिए सुरक्षित रूट बना हुआ है।
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बर्खास्त आठ सिपाहियों के प्रलोभन में आकर भदोही से चंदौली के बीच के ऊंज, गोपीगंज, औराई, मिर्जामुराद, रोहनिया, लंका, रामनगर, मुगलसराय, अलीनगर, चंदौली और सैयदराजा थाने पर वर्षों से तैनात सिपाही इस अवैध धंधे को प्रश्रय दिलाने में अहम भूमिका का निर्वहन करते हैं। सख्ती बढ़ने पर यह धंधा मंदा हो जाता है और माहौल सामान्य होते ही सब कुछ जैसे का तैसा चलने लगता है।
कौन साहब हैं जो तस्करों के बीच हैं लोकप्रिय
पशु तस्करों के बीच बनारस के एक पुलिस अफसर बेहद ही लोकप्रिय हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार हाल के महीनों में जो भी पशु तस्कर पकड़े गए उन्होंने पूछताछ में यही बताया कि साहब को तो पैसा जाता था और उनका आशीर्वाद भी मिला हुआ है। इसके बावजूद कार्रवाई क्यों की जा रही है। यह साहब कौन हैं और कितने बड़े रसूख वाले हैं, बताया जाता है कि इसकी पड़ताल शासन स्तर से भी कराई जा रही है।
ट्रांसफर कराने और रुकवाने का भी करते हैं काम
बीते महीने व्हाट्स ऐप पर पशु तस्करी से संबंधित कुछ ऑडियो क्लिप जिले में वायरल हुई थी। क्लिप से यह पता लगा कि जो थानेदार नहीं मानता उस पर तरह-तरह के आरोप लगाकर और रुपये खर्च कर उसका तबादला अन्यत्र करा दिया जाता है। वहीं, पशु तस्कर के साथ जिन थानेदारों की मिलीभगत होती है उनका तबादला रुकवाने के लिए पांच से सात लाख तक खर्च भी किया जाता है। क्लिप के वायरल होने के बाद मिर्जामुराद थानाध्यक्ष रहे इंस्पेक्टर विश्वजीत प्रताप सिंह को निलंबित कर दिया गया और यहीं के सिपाही हैदर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
जेल भेजे गए गिरफ्तार 30 आरोपी
मिर्जामुराद पुलिस द्वारा 641 मवेशियों के साथ गिरफ्तार 30 आरोपियों को गुरुवार को जेल भेज दिया गया। पुलिस के अनुसार आरोपियों से बरामद सात कंटेनर, दो ट्रक, 01 लाख 78 हजार सात सौ सत्तर रुपया और 30 मोबाइल को सीज कर दिया गया है। आरोपियों की उम्र 18 से 38 साल के बीच है। आरोपियों ने बताया कि वो मवेशियों को बिहार से उन्नाव ले जा रहे थे।