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काशी के मांझियों को संजीवनी दे गए पीएम मोदी

Mon, 02 May 2016 02:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Mon, 02 May 2016 02:25 AM IST
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The Prime Minister to give lifesaving Kashi Manjion
पीएम माोदी
पीएम नरेंद्र मोदी काशी के मांझियों को संजीवनी दे गए। पहली बार ऐसा हुआ जब कोई प्रधानमंत्री मांझियों के बीच पहुंचे। अस्सी घाट पर ई बोट वितरण कार्यक्रम से मांझी बेहद उत्साहित हैं। अरसे से उपेक्षित यहां के मल्लाहों की 40 हजार की आबादी में एक नई आस जगी है। उनका कहना है कि अच्छी बात है कि सरकार उनके बारे में सोच रही है। नौका संचालन से जुड़े सभी मल्लाहों को ई बोट उपलब्ध हो जाए तो इससे न सिर्फ उनकी आजीविका का आधार मजबूत होगा बल्कि वह समाज की मुख्य धारा से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति बेहतर कर पाएंगे। ई बोट से गंगा में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। काशी में करीब पांच हजार नाविक हैं।  
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वाराणसी जिले में सूजाबाद और डोमरी में मांझियों की सबसे बड़ी बस्ती है। इसके अलावा राजघाट, सरायमोहाना, गायघाट, मणिकर्णिका घाट और जैन घाट पर भी माझियों की छोटी-छोटी बस्तियां हैं। ये सभी परिवार जीवन यापन के लिए गंगा पर आश्रित हैं। इनमें करीब पांच हजार से अधिक परिवारों की आजीविका का आधार नौका संचालन है। करीब एक हजार से ज्यादा लोग विभिन्न घाटों पर टूरिस्ट गाइड या फिर मसाज आदि के काम में लगे हैं। सबसे अधिक करीब 20 हजार लोग मछली पालन के धंधे में लगे हैं। 40 हजार की आबादी में से करीब 80  प्रतिशत मांझी समुदाय के आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। पीएम के हाथों ई बोट का वितरण कराने वाली संस्था ने नाविकों को बताया कि जल्द ही मझले आकार की नावों की जगह ई बोट का संचालन किया जाएगा। वहीं पीएम मोदी ने नाविकों को भरोसा दिलाया कि जल्द ही उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा। मां गंगा निषाद राज सेवा समिति के अध्यक्ष विनोद का कहना है कि पीएम नरेंद्र मोदी की पहल से मांझी समाज में नई आस जगी है।
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अभी दो दिन पहले इसरो के अंतरिक्ष में छोड़े गए उपग्रह ‘नाविक’ के नामकरण का राज प्रधानमंत्री मोदी ने काशी में निषादों के बीच खोला। साथ ही, गंगा की लहरों पर नाव लेकर पतवार खेने वाले निषाद समाज का उस उपग्रह से रिश्ता भी जोड़ दिया। सैटेलाइट ‘नाविक’ के बहाने मोदी ने निषादों के दिलों में उतरने की कोशिश की। अस्सी घाट पर नाविकों को ई-बोट बांटने के बाद मोदी काशी के निषादों से मुखातिब थे।  प्रधानमंत्री नaरेंद्र मोदी ने कहा कि दो दिन पहले भारत ने अंतरिक्ष में उपग्रह छोड़ा। इस उपग्रह से अब भारत के पास अपनी नेविगेशन प्रणाली (जीपीएस सिस्टम) होगी। इसमें अरबों खरबों रुपये खर्च हुए हैं। उन्होंने कहा कि मैंने इस उपग्रह का नाम इसलिए नाविक रखा है क्योंकि नाविक पानी के साथ जिंदादिली का खेल खेलता है। इस सैटेलाइट को न मैंने पंडित दीन दयाल उपाध्याय और ना ही श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम दिया। ना ही अपने किसी परिवार के नाम पर इस उपग्रह का नाम रखा। इस उपग्रह से मछुआरों को बहुत लाभ होने वाला है।
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