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बिना बोले बहुत कुछ कह गए भाजपाध्यक्ष
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 01 Jun 2016 01:35 AM IST
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भाजपा अध्यक्ष अमित श्ााह।
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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह मंगलवार को प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में थे। वे यहां सेवापुरी ब्लाक के जोगियापुर गांव में एक बिंद परिवार के घर भोजन करने के थोड़ी ही देर बाद इलाहाबाद के लिए रवाना हो गए। इस दौरान उन्होंने मीडिया से भी दूरी बनाए रखी। सवालों की बौछार के बावजूद वह एक शब्द नहीं बोले लेकिन सियासी हलके में हलचल मचा दी। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि चुनावी रणनीति के माहिर शाह ने यहां भाषण भले नहीं दिया लेकिन अपना काम बखूबी कर गए। शाह के इस दलित और पिछड़ा कार्ड को सूबे की सियासत में नए समीकरणों की पृष्ठभूमि तैयार करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
भाजपा भले ही यह प्रचारित करती हो कि वह जाति की राजनीति नहीं करती मगर दो साल में जिस तरह से यूपी में उसने छोटी-छोटी जातियों को पार्टी से जोड़ने का अभियान चलाया है, शाह के जोगियापुर दौरे को इसी अभियान का एक हिस्सा बताया जा रहा है। पिछड़ों और दलितों के वोट बैंक में सेंधमारी के लिए भाजपा दो साल से प्रयासरत है। दलितों को करीब लाने के लिए डॉ. बीआर अंबेडकर की जयंती से इस अभियान में तेजी आ गई है। दरअसल, यूपी में दलित बसपा का परंपरागत वोटर माना जाता है जबकि पिछड़ों पर सपा की पकड़ मजबूत बताई जाती है। ऐसे में भाजपा के रणनीतिकार जानते हैं कि सपा-बसपा के वोट बैंक में सेंधमारी के बिना यूपी में दाल गलने वाली नहीं।
यही कारण है कि पार्टी के सबसे बड़े रणनीतिकार अमित शाह खुद इस अभियान को संभाल रहे हैं। पहले उन्हाेंने सिंहस्थ कुंभ में दलित परिवारों के साथ शिप्रा नदी में स्नान किया और अब काशी में दलितों और पिछड़ों के साथ भोज में शामिल होकर संदेश देने की कोशिश की कि भाजपा के लिए कोई भी अछूत नहीं है। इस बीच एयरपोर्ट टर्मिनल के वीआईपी कक्ष में स्वागत के लिए पहुंचे स्थानीय नेताओं से उन्होंने काशी के विकास के बारे में जानकारी ली। पूछा कि काम कैसा चल रहा है? शहर साफ-सुथरा हुआ? 2017 के चुनाव की तैयारी का क्या हाल है? शाह सवाल दागते रहे और नेता सब कुछ अच्छा-अच्छा बताते रहे।
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भाजपा भले ही यह प्रचारित करती हो कि वह जाति की राजनीति नहीं करती मगर दो साल में जिस तरह से यूपी में उसने छोटी-छोटी जातियों को पार्टी से जोड़ने का अभियान चलाया है, शाह के जोगियापुर दौरे को इसी अभियान का एक हिस्सा बताया जा रहा है। पिछड़ों और दलितों के वोट बैंक में सेंधमारी के लिए भाजपा दो साल से प्रयासरत है। दलितों को करीब लाने के लिए डॉ. बीआर अंबेडकर की जयंती से इस अभियान में तेजी आ गई है। दरअसल, यूपी में दलित बसपा का परंपरागत वोटर माना जाता है जबकि पिछड़ों पर सपा की पकड़ मजबूत बताई जाती है। ऐसे में भाजपा के रणनीतिकार जानते हैं कि सपा-बसपा के वोट बैंक में सेंधमारी के बिना यूपी में दाल गलने वाली नहीं।
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यही कारण है कि पार्टी के सबसे बड़े रणनीतिकार अमित शाह खुद इस अभियान को संभाल रहे हैं। पहले उन्हाेंने सिंहस्थ कुंभ में दलित परिवारों के साथ शिप्रा नदी में स्नान किया और अब काशी में दलितों और पिछड़ों के साथ भोज में शामिल होकर संदेश देने की कोशिश की कि भाजपा के लिए कोई भी अछूत नहीं है। इस बीच एयरपोर्ट टर्मिनल के वीआईपी कक्ष में स्वागत के लिए पहुंचे स्थानीय नेताओं से उन्होंने काशी के विकास के बारे में जानकारी ली। पूछा कि काम कैसा चल रहा है? शहर साफ-सुथरा हुआ? 2017 के चुनाव की तैयारी का क्या हाल है? शाह सवाल दागते रहे और नेता सब कुछ अच्छा-अच्छा बताते रहे।
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