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सिल्ट के दलदल में फंसने लगी जिंदगियां
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 30 Aug 2016 01:29 AM IST
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बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही सोमवार को चिलचिलाती धूप पीड़ितों पर भारी पड़ती नजर आई। घाटों पर गाद के दलदल जहां मुसीबत के सबब बन गए हैं, वहीं गलियों में उठती दुर्गंध से सांस लेना मुहाल हो गया है। सफाई का काम तेज करने के साथ ही कीटनाशकों का छिड़काव नहीं किया गया तो लोगों की नाक में दम हो जाएगा।
बाढ़ग्रस्त इलाकों से पानी उतरने के साथ ही लोग समस्याओं से जूझने लगे हैं। नगवा के राहत शिविर में सोमवार को डाक्टर नहीं आने से बुखार, डायरिया से पीड़ित लोग इधर -उधर भटकते रहे। नगर निगम के सफाई कर्मचारी गंगोत्री बिहार में तो लगे नजर आए लेकिन गढ़वा घाट मठ में बिस्तर पकड़ रहे संतों की सुध अभी तक लेने कोई नहीं गया। बाढ़ का पानी उतरने के बाद हर तरफ समस्याओं का अंबार लगा है। महेश नगर के निवासी राजन सिंह, विश्वास नगर के योगेश मिश्रा, काशी पुरम के शंकर सिंह, ओंकार सिंह, कैलाश सिंह का कहना है कि प्रशासन की तरफ से फिलहाल कोई झांकने नहीं आ रहा है। घरों-गलियों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है।
जगह-जगह गलियों में पानी सड़ने से दुर्गंध उठने लगी है। मलेरिया का प्रकोप बढ़ रहा है। लोग तेजी से बीमार पड़ रहे हैं। घरों में वापस आकर सफाई करने और सामान सजाने की जद्दोजहद शुरू हो गई है। गढ़वा घाट मठ मे दो सौ बाबा रहते हैं। बहादुर बाबा का कहना है कि कभी भी प्रशासन ने उनकी खोज खबर नहीं ली। सौ गायें भूख से बेहाल हैं। पर्याप्त चारा नहीं मिल रहा है। कई बाबा डायरिया और बुखार से पीड़ित हैं। आश्रम की फसल डूब गई है। आश्रम में हर तरफ गंदगी का अंबार लगा है। सत्यमनगर, कमलेश नगर में अभी भी घरों में पानी होने या सीलन बन जाने की वजह से लोग छतों पर शरण लिए हैं। संजय कुमार, रमाशंकर ने बताया कि पीने के पानी के संकट से लोग जूझ रहे हैं। नगवा के राहत शिविर में दोपहर एक बजे तक नाश्ता नहीं मिल पाने से छोटे -छोटे बच्चे बेहाल नजर आए।
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बाढ़ग्रस्त इलाकों से पानी उतरने के साथ ही लोग समस्याओं से जूझने लगे हैं। नगवा के राहत शिविर में सोमवार को डाक्टर नहीं आने से बुखार, डायरिया से पीड़ित लोग इधर -उधर भटकते रहे। नगर निगम के सफाई कर्मचारी गंगोत्री बिहार में तो लगे नजर आए लेकिन गढ़वा घाट मठ में बिस्तर पकड़ रहे संतों की सुध अभी तक लेने कोई नहीं गया। बाढ़ का पानी उतरने के बाद हर तरफ समस्याओं का अंबार लगा है। महेश नगर के निवासी राजन सिंह, विश्वास नगर के योगेश मिश्रा, काशी पुरम के शंकर सिंह, ओंकार सिंह, कैलाश सिंह का कहना है कि प्रशासन की तरफ से फिलहाल कोई झांकने नहीं आ रहा है। घरों-गलियों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है।
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जगह-जगह गलियों में पानी सड़ने से दुर्गंध उठने लगी है। मलेरिया का प्रकोप बढ़ रहा है। लोग तेजी से बीमार पड़ रहे हैं। घरों में वापस आकर सफाई करने और सामान सजाने की जद्दोजहद शुरू हो गई है। गढ़वा घाट मठ मे दो सौ बाबा रहते हैं। बहादुर बाबा का कहना है कि कभी भी प्रशासन ने उनकी खोज खबर नहीं ली। सौ गायें भूख से बेहाल हैं। पर्याप्त चारा नहीं मिल रहा है। कई बाबा डायरिया और बुखार से पीड़ित हैं। आश्रम की फसल डूब गई है। आश्रम में हर तरफ गंदगी का अंबार लगा है। सत्यमनगर, कमलेश नगर में अभी भी घरों में पानी होने या सीलन बन जाने की वजह से लोग छतों पर शरण लिए हैं। संजय कुमार, रमाशंकर ने बताया कि पीने के पानी के संकट से लोग जूझ रहे हैं। नगवा के राहत शिविर में दोपहर एक बजे तक नाश्ता नहीं मिल पाने से छोटे -छोटे बच्चे बेहाल नजर आए।
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