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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Exclusive interview with Olympian Lalit Upadhyay about Paris Olympic Games

UP: 'जिले के ट्रायल में नहीं हुआ था चयन अब वहीं के स्टेडियम में लगी मेरी तस्वीर', ओलंपियन ललित से खास बातचीत

Tue, 13 Aug 2024 04:03 AM IST
विजय पुंडीर नीलांबुज तिवारी, अमर उजाला, वाराणसी
नीलांबुज तिवारी, अमर उजाला, वाराणसी Published by: विजय पुंडीर Updated Tue, 13 Aug 2024 04:03 AM IST
सार

काशी निवासी ललित ने 2000 में हॉकी खेलना शुरू किया था। पेरिस ओलंपिक के बाद पहली बार काशी आए ललित ने अमर उजाला से विशेष बात की।

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Exclusive interview with Olympian Lalit Upadhyay about Paris Olympic Games
ओलंपियन ललित उपाध्याय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

साल 2004 में वाराणसी में हुए हॉकी ट्रायल में ललित उपाध्याय का चयन नहीं हुआ था। आज वहीं के स्टेडियम में ललित की तस्वीर लगी है। पेरिस ओलंपिक में यूपी के दो ही खिलाड़ियों के हिस्से में पदक आए हैं। उनमें एक ललित हैं। ललित ने ओलंपिक में कांस्य जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के सदस्य के रूप में दूसरी बार पदक हासिल किया है। काशी निवासी ललित ने 2000 में हॉकी खेलना शुरू किया था। पेरिस ओलंपिक के बाद पहली बार काशी आए ललित ने अमर उजाला से विशेष बात की। पढ़ें ललित ने क्या कहा-

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Exclusive interview with Olympian Lalit Upadhyay about Paris Olympic Games
तीन ओलंपियन के साथ ललित उपाध्याय - फोटो : स्वयं

संघर्ष पर...
करीब 20 साल पहले की बात है। तब जिस सिगरा स्टेडियम में मेरा ट्रायल हुआ, जिलास्तरीय टीम में जगह नहीं मिल सकी थी, अब वहीं मेरी तस्वीर लगी है। यह देख सुकून मिलता है। असफलता से घबराना नहीं चाहिए। कठिन समय आए, लगे कि सब कुछ खत्म हो गया, तब ज्यादा मेहनत करनी चाहिए। हर खिलाड़ी के सामने शुरू में आर्थिक संकट आता है। उपलब्धियां मिलती हैं, तो सब ठीक हो जाता है। सम्मान भी मिलता है।

Exclusive interview with Olympian Lalit Upadhyay about Paris Olympic Games
ललित उपाध्याय - फोटो : अमर उजाला

लक्ष्य पर...
खुशनसीब हूं कि लगातार दो ओलंपिक मेडल विजेता टीम का हिस्सा हूं। अब बड़े लक्ष्य के साथ अमेरिका में ओलंपिक में स्वर्ण जीतने का सपना साकार करना है।

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Exclusive interview with Olympian Lalit Upadhyay about Paris Olympic Games
Olympian Lalit Upadhyay - फोटो : अमर उजाला

ओलंपियन का सपना...
इन्सान को संतुष्ट नहीं होना चाहिए। ओलंपियन के सपने भी आम आदमी की तरह ही होते हैं। पूरा ध्यान अच्छे प्रदर्शन पर रहता है। बड़े भाई अमित भी हॉकी खिलाड़ी रहे हैं। सरकारी नौकरी कर रहे हैं। हम भी नौकरी के सपने के साथ हॉकी से जुड़े थे, पर अब खेल जुनून बन गया है।

Exclusive interview with Olympian Lalit Upadhyay about Paris Olympic Games
परिवार के साथ ललित उपाध्याय - फोटो : अमर उजाला

मां के हाथ के खाने पर...
बनारसी से खाने का मत पूछिए। यहीं कचौड़ी गली है। चाट का स्वाद सबको पता है। खिलाड़ियों को तो संभलकर भोजन करना पड़ता है। हम भी करते हैं। स्ट्रीट फूड नहीं खा पाते। मिठाई भी नहीं। हां, मेडल जीतने के बाद घर आए तो मां का दुलार मिल रहा है। उनके हाथ के परांठे भी।

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