BHU Student Suicide: बीएचयू आईआईटी के शोध छात्र ने की खुदकुशी, पिछले साल हुई थी शादी, बंद होने वाली थी फेलोशिप
वाराणसी में बीएचयू आईआईटी के शोध छात्र ने खुदकुशी कर ली। आत्महत्या की वजह स्पष्ट नहीं है। पुलिस की पूछताछ में हॉस्टल के छात्रों ने बताया कि कुलदीप की शादी बीते साल नवंबर महीने में हुई थी। उसकी फेलोशिप अगले माह बंद होने वाली थी और उसका शोध कार्य भी अंतिम चरण में था।
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वाराणसी के बीएचयू आईआईटी के एसएन बोस हॉस्टल में रहने वाले एक शोध छात्र ने रविवार की रात फंदा लगाकर जान दे दी। हॉस्टल के छात्रों की सूचना पर लंका थाने की पुलिस पहुंची। पुलिस के सामने छात्र दरवाजा तोड़ कर अंदर घुसे और शव को फंदे से नीचे उतारा गया। फिलहाल, शोध छात्र के आत्महत्या की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस के अनुसार छात्र के आत्महत्या की वजह अवसाद हो सकता है।
मुजफ्फरनगर जिले के खखेड़ी गांव का मूल निवासी और दिल्ली के सागरपुर, दुर्गा पार्क का रहने वाला कुलदीप सिंह (32) बीएचयू आईआईटी के एसएन बोस हॉस्टल के कमरा नंबर-88 में रहता था।वह आईआईटी के गणित विज्ञान विभाग का शोध छात्र था। कुलदीप के हॉस्टल के छात्रों ने उसके कमरे का दरवाजा शाम छह बजे के बाद खुलते हुए नहीं देखा।
परिजनों के आने पर होगा पोस्टमार्टम
कुलदीप के कमरे की लाइट की भी नहीं जल रही थी। रात 10 बजे के लगभग कुलदीप का रूम पार्टनर यशवीर अपने विभाग से आया और दरवाजा खटखटाया तो नहीं खुला। इस पर यशवीर और अन्य छात्रों को शंका हुई। छात्रों ने अपने वार्डेन के साथ ही पुलिस को भी सूचना दी। लंका थाने की पुलिस के आने पर छात्र कुलदीप के कमरे का दरवाजा तोड़ कर अंदर घुसे तो वह गमछे और रस्सी से बने फंदे के सहारे पंखे से लटका हुआ था।
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पिछले साल हुई थी शादी, बंद होने वाली थी फेलोशिप
ऐसे में कहीं वह भविष्य की चिंता में तो आत्महत्या नहीं किया है। वहीं, लंका थाने की पुलिस का कहना है कि छात्र के परिजनों के आने पर उनसे बातचीत कर आत्महत्या की वजह को समझने का प्रयास किया जाएगा। छात्र के मोबाइल का कॉल डिटेल रिकॉर्ड भी खंगाला जाएगा।
पिछले साल 25 जून को ही एमटेक के छात्र ने दी थी जान
बीएचयू आईआईटी के एमटेक के एक छात्र ने पिछले साल 25 जून की रात फंदा लगाकर जान दी थी। हाथरस के हसायन थाना क्षेत्र के पिछौती गांव का रहने वाला एमटेक का छात्र भगवान सिंह (28) विश्वेश्वरैया हॉस्टल के कमरा नंबर-228 में रहता था। उस दौरान लंका थाने की पुलिस की पूछताछ में सामने आया था कि प्लेसमेंट नहीं होने की वजह से छात्र अवसाद में था।
खुशहाली गुरु बोले- अपनों से संवाद बनाए रखना जरूरी
खुशहाली गुरु के नाम से विख्यात बीएचयू के मनोचिकित्सा विभाग के प्रो. संजय गुप्ता ने कहा कि मशीनों पर निर्भरता के अनावश्यक तनाव वाले इस दौर में अपनों से संवाद बनाए रखना बहुत जरूरी है। हमें अपने परिवार के सदस्यों, दोस्तों और करीबियों से अपनी अच्छी-बुरी बात साझा करते रहना चाहिए। किसी मुकाम पर मनोवांछित परिणाम ना मिले तो कतई घबराना नहीं चाहिए।
आगे और बेहतर करने के लिए सोचना चाहिए। हमें सदैव ध्यान रखना चाहिए कि यह बेशकीमती जीवन आत्मघाती कदम उठाने के लिए नहीं मिला है, बल्कि कुछ अच्छा करने के लिए मिला है। इसलिए तनाव और उसके दबाव से मुक्त रह कर सकारात्मक सोच वाला जीवन जियें। सुख के साथ ही दुख और दर्द को भी अपनों के साथ जरूर साझा करें।