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प्रो. राजाराम शुक्ल बने संपूर्णानंद संस्कृत विवि के कुलपति
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sun, 20 May 2018 02:04 PM IST
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राम नाईक के साथ राजाराम शुक्ल
- फोटो : self
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बीएचयू के वैदिक दर्शन विभाग, संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के प्रोफेसर प्रो. राजाराम शुक्ल को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी का कुलपति का नियुक्त किया गया है। प्रो. शुक्ल की विश्वविद्यालय में कुलपति के रूप में नियुक्ति कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से तीन वर्ष की अवधि के लिए की गई है।
यह जानकारी राज्यपाल एवं कुलाधिपति राम नाईक की प्रमुख सचिव जूथिका पाटणकर ने दी। शनिवार की देर शाम को कुलपति पद पर नियुक्ति का आदेश मिलते ही उनको बधाई देने वालों का तांता लगा रहा।
प्रो. राजाराम शुक्ल आठ साल तक संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में अनुसंधान संस्थान के निदेशक पद पर कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा यूजीसी के मेजर रिसर्च प्रोजेक्ट्स में प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर के तौर पर भी कार्य कर चुके हैं।
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देश के कई विश्वविद्यालयों में संस्कृत के साहित्य, दर्शन और विविध कार्यों पर निर्देशन कर चुके हैं। स्काटलैंड में 2006 में आयोजित 13वें विश्व संस्कृत सम्मेलन में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया था। 2002 में उन्हें राष्ट्रपति द्वारा बद्रायण सम्मान से सम्मानित किया गया।
प्रो. राजाराम शुक्ल ने कहा कि बेहतर शैक्षणिक माहौल और प्राच्य विद्या संस्थान को शीर्ष पर ले जाना हमारी प्राथमिकता होगी। प्राच्य विद्या संस्थान के गौरव को नई ऊंचाईयों पर ले जाना मेरी प्राथमिकता में शामिल होगा।
संस्कृत विश्वविद्यालय में व्याप्त गड़बड़ियों के सवाल पर नवागत कुलपति ने कहा कि सभी के साथ मिलकर वह विश्वविद्यालय की छवि को बदलने का प्रयास करेंगे। संभावना है कि वह अगले सप्ताह अपना पदभार ग्रहण कर सकते हैं।
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यह जानकारी राज्यपाल एवं कुलाधिपति राम नाईक की प्रमुख सचिव जूथिका पाटणकर ने दी। शनिवार की देर शाम को कुलपति पद पर नियुक्ति का आदेश मिलते ही उनको बधाई देने वालों का तांता लगा रहा।
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प्रो. राजाराम शुक्ल आठ साल तक संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में अनुसंधान संस्थान के निदेशक पद पर कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा यूजीसी के मेजर रिसर्च प्रोजेक्ट्स में प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर के तौर पर भी कार्य कर चुके हैं।
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देश के कई विश्वविद्यालयों में संस्कृत के साहित्य, दर्शन और विविध कार्यों पर निर्देशन कर चुके हैं। स्काटलैंड में 2006 में आयोजित 13वें विश्व संस्कृत सम्मेलन में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया था। 2002 में उन्हें राष्ट्रपति द्वारा बद्रायण सम्मान से सम्मानित किया गया।
प्रो. राजाराम शुक्ल ने कहा कि बेहतर शैक्षणिक माहौल और प्राच्य विद्या संस्थान को शीर्ष पर ले जाना हमारी प्राथमिकता होगी। प्राच्य विद्या संस्थान के गौरव को नई ऊंचाईयों पर ले जाना मेरी प्राथमिकता में शामिल होगा।
संस्कृत विश्वविद्यालय में व्याप्त गड़बड़ियों के सवाल पर नवागत कुलपति ने कहा कि सभी के साथ मिलकर वह विश्वविद्यालय की छवि को बदलने का प्रयास करेंगे। संभावना है कि वह अगले सप्ताह अपना पदभार ग्रहण कर सकते हैं।