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कैदी की मौत पर बलिया जेल के बाहर परिजनों का हंगामा, लगाया आरोप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,बलिया
Updated Sun, 04 Feb 2018 09:16 PM IST
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कैदी की मौत पर जेल रोड पर दिया धरना
- फोटो : अमर उजाला
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बलिया के जिला कारागार में निरुद्ध कैदी की शनिवार शाम जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। मौत की सूचना मिलने के बाद परिवार के सदस्यों एवं ग्रामीणों ने रविवार को मुआवजा की मांग को लेकर जिला कारागार के सामने जेल रोड पर धरना दे दिया।
परिवार के लोग भरण-पोषण के लिए 10 लाख रुपये तथा प्रकरण की जांच कराने की मांग कर रहे थे। सूचना पर एएसपी विजय पाल सिंह सहित कई बड़े अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों को समझाने का काफी प्रयास किया। करीब एक घंटे बाद सिटी मजिस्ट्रेट के आश्वासन पर जाम समाप्त हुआ।
परिजनों का आरोप था कि जेल प्रशासन ने तबीयत खराब होने की सूचना नहीं दी थी। अगर सूचना दी होती तो हम लोग अपने लाल से मिल लिए होते और उसकी इलाज कराते।
जामकर्ताओं ने मृतक के पत्नी को 10 लाख रुपये मुआवजा तथा प्रकरण की जांच कराने की मांग की। इस दौरान जामकर्ताओं ने जेल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मृतक की 14 वर्षीय पुत्री पिंकी, तीन वर्षीय पुत्री चिंकी तथा तीन माह का एक पुत्र है।
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परिवार के लोग भरण-पोषण के लिए 10 लाख रुपये तथा प्रकरण की जांच कराने की मांग कर रहे थे। सूचना पर एएसपी विजय पाल सिंह सहित कई बड़े अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों को समझाने का काफी प्रयास किया। करीब एक घंटे बाद सिटी मजिस्ट्रेट के आश्वासन पर जाम समाप्त हुआ।
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परिजनों का आरोप था कि जेल प्रशासन ने तबीयत खराब होने की सूचना नहीं दी थी। अगर सूचना दी होती तो हम लोग अपने लाल से मिल लिए होते और उसकी इलाज कराते।
जामकर्ताओं ने मृतक के पत्नी को 10 लाख रुपये मुआवजा तथा प्रकरण की जांच कराने की मांग की। इस दौरान जामकर्ताओं ने जेल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मृतक की 14 वर्षीय पुत्री पिंकी, तीन वर्षीय पुत्री चिंकी तथा तीन माह का एक पुत्र है।
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जेल प्रशासन पर सूचना नहीं देने का लगाया आरोप
- फोटो : अमर उजाला
जेल अधीक्षक प्रशांत मौर्या ने बताया कि सुखपुरा थाना क्षेत्र के हनुमानगंज निवासी रामू चौहान (35) अप्रैल 2017 में जिला कारागार में बंद हुआ था। इसके ऊपर गैंगेस्टर व आबकारी एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत था। जेल में निरूद्ध होने से पूर्व वह ड्रग्स का सेवन करता था।
जिसके कारण इसके पैर में दिक्कत थी। उसका उपचार जिला कारागार अस्पताल और जिला अस्पताल में चलता था। शनिवार की सुबह उसके पैर में दर्द ज्यादा होने लगी। जिला कारागार के डॉक्टर ने उसे जिला अस्पताल रेफर किया। परिवारवालों को सूचना दी गई थी।
अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बताया कि सूचना न देने का आरोप बेबुनियाद है। सिटी मजिस्ट्रेट मनोज कुमार पांडेय ने बताया कि कैदी के शव का पोस्टमार्टम वीडियोकैमरे की निगरानी में होगा। इसके पूरे प्रकरण की मजिस्ट्रेट जांच कराई जाएगी।
जिसके कारण इसके पैर में दिक्कत थी। उसका उपचार जिला कारागार अस्पताल और जिला अस्पताल में चलता था। शनिवार की सुबह उसके पैर में दर्द ज्यादा होने लगी। जिला कारागार के डॉक्टर ने उसे जिला अस्पताल रेफर किया। परिवारवालों को सूचना दी गई थी।
अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बताया कि सूचना न देने का आरोप बेबुनियाद है। सिटी मजिस्ट्रेट मनोज कुमार पांडेय ने बताया कि कैदी के शव का पोस्टमार्टम वीडियोकैमरे की निगरानी में होगा। इसके पूरे प्रकरण की मजिस्ट्रेट जांच कराई जाएगी।