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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चाहत में बेगाने हो गए वाराणसी के दो गांव

Thu, 09 Mar 2017 05:35 PM IST
प्रदीप मिश्र/ आशुतोष द्विवेदी ‘उपमन्यु’, अमर उजाला, वाराणसी
प्रदीप मिश्र/ आशुतोष द्विवेदी ‘उपमन्यु’, अमर उजाला, वाराणसी Updated Thu, 09 Mar 2017 05:35 PM IST
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Prime Minister Narendra Modi's two villages have become extinct
voting in varanasi - फोटो : अमर उजाला

 फागुन क ी बयार में आलस्य था लेकिन जयापुर और नागेपुर के बाशिंदों में पूरी चुस्ती थी। नागेपुर में दोपहर दो बजे तक 74 फीसदी लोग मतदान कर चुके थे। उधर, जयापुर के लोग भी मतदान के प्रति सजग थे। पर इन दोनों गांवों के लोगों के मन में एक मलाल था।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति चाहत ने इन्हें अन्य दलों के नेताओं के लिए बेगाना बना दिया। दोनों गांवों के मतदाता बदलाव तो चाहते हैं, मन बदलने के मूड में नहीं हैं। मतदाता मतदान के जरिए भाजपा और सहयोगी दलों के अलावा अन्य दलों की बेरुखी का जवाब देना चाहते थे।  
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सेवापुरी विधानसभा क्षेत्र और आराजी लाइन ब्लाक के ये दोनों गांवों को पीएम मोदी द्वारा गोद लेने के बाद से भाजपा के अलावा अन्य दलों के लिए ये गांव और यहां के ग्रामीण अस्पृश्य जैसे हो गए हैं। पूरे चुनाव में प्रमुख दलों के नेता यहां वोट मांगने तक नहीं आए।
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उधर, पीएम मोदी के अपने लिए प्यार के प्रति दोनों गांवों के लोग कृतज्ञ दिखे। कहने में गुरेज नहीं की कि मोदी की मेहरबानियों के कारण आज उनका महत्व बढ़ गया है। बुधवार को दोनों गांवों के मतदाता मोदी पर मोहित नजर आए। ज्यादातर ने मोदी के लिए वोट दिया, भाजपा के लिए वोट दिया।

मतदाताओं में पीएम के प्रति अपनापन, जोश और उत्साह इससे जाहिर है कि वे भाजपा-अपना दल (सोनेलाल) गठबंधन के प्रत्याशी को भाजपा का ही प्रत्याशी मान रहे थे। इन्हीं गांव के लोगों ने प्रदेश के लोक निर्माण और सिंचाई राज्यमंत्री सुरेंद्र पटेल को 2012 में विधायक चुना था।  
 

प्रधानमंत्री के आदर्श गांव जयापुर में शाम चार बजे तक थी लंबी लाइन

Prime Minister Narendra Modi's two villages have become extinct
voting in varanasi - फोटो : अमर उजाला
नागेपुर में दोपहर ढाई बजे जब अमर उजाला की टीम गांव पहुंची पता चला कि वहां ज्यादातर वोट पड़ गए हैं। पूछने पर लोगों ने बताया कि गांव के चंद वोट दूसरे दल के प्रत्याशियों को मिलेंगे, क्योंकि गांव में कोई वोट मांगने ही नहीं आया।

गांव के पूर्व प्रधान बैजनाथ मौर्य ने बताया कि प्रधानमंत्री के गांव के लोगों की तो किस्मत ही बदल गई है। गांव के अरविंद ने बताया कि अपने गांव के कायाकल्प से अभिभूत ग्रामवासी सुबह से ही वोट डालने पहुंच गए थे। शाम तक 1535 वोट में 1294 वोट पड़े और आंकड़ा 84 प्रतिशत तक पहुंच गया। 


जयापुर के लोगों की भावना को दूसरे दलों ने इतना समझ लिया कि प्रमुख दल के एक नेता ने गांव के आसपास तो प्रचार किया। रोड शो निकाला लेकिन इस गांव में नहीं आए। 2012 के चुनाव में इन्हीं नेताजी ने मंदिर में कसम खाकर ग्राम समाज की जमीन की बाउंड्री वाल बनाने का वादा किया था।

जयापुर के दो बूथों में से एक पर शाम चार बजे तक लंबी लाइन लगी थी। लाइन में लगे लोग आरोप लगा रहे थे- शासन-प्रशासन की मिलीभगत से हमें मतदान से वंचित करने की कोशिश की जा रही है। मतदान कार्मिक वोटर स्लिप और मतदाता पहचान पत्र के बावजूद कई मतदाताओं से आधार कार्ड लाने-दिखाने का दबाव बना रहे थे।

शिकायत की गई लेकिन उस पर देर से गौर किया गया। हालांकि तमाम अडंगेबाजी को दरकिनार कर मतदाताओं ने धैर्य नहीं खोया। 4200 आबादी वाले इस गांव का जोश कायम रहा और शाम तक 64.35 प्रतिशत वोटिंग हुई। 2432 मतदाताओं में से 1562 ने वोट दिया। वोट एक ही प्रत्याशी को मिले।
 

हम शुक्रगुजार हैं, हमें पीएम मोदी ने मशहूर कर दिया

Prime Minister Narendra Modi's two villages have become extinct
pm modi road show in varanasi - फोटो : अमर उजाला
बुजुर्ग डिंगुर पटेल का कहना था- केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार होने पर ही समुचित विकास हो सकता है। यूनियन बैंक आफ इंडिया के पास चाय की दुकान चलाने वाले हंसराज गिरि की मानें तो गांव में सपा-बसपा के भी मतदाता हैं। इनमें से15 से 20 फीसदी वोट ही इन दलों को बिरादरी के आधार पर मिलेंगे।

जयापुर और नागेपुर एक नजर में 
पीएम मोदी ने जयापुर को सात नवंबर, 2014 में गोद लिया था। पीएम खुद गांव आए थे। इसके बाद ताबड़तोड़ विकास के जरिए गांव को चमका दिया गया। आज यहां वो सुविधाएं हैं, जो तमाम कसबाई और शहरी इलाकों को भी मयस्सर नहीं होतीं।

सौर ऊर्जा से पूरा गांव रौशन होता है। गांव में दो बैंक हैं। 2016 में पीएम द्वारा नागेपुर को गोद लिया गया। गांव के घर सौर ऊर्जा से रौशन होते हैं तो विद्यालय में काम लगातार चल रहे हैं। डॉ. अंबेडकर की चमचमाती प्रतिमा की देख-रेख और साफ-सफाई गांव के लोगों की संजीदगी साबित करती है। 

जयापुर के लोग इस बात से गदगद हैं कि पीएम मोदी ने दो साल पहले तक अनजान से उनके गांव को दुनिया भर में मशहूर कर दिया। जब भी पीएम वाराणसी आते हैं, गांव के लोगों को उनके कार्यक्रम में लाने-ले जाने के लिए बस आती है।

वाराणसी-इलाहाबाद नेशनल हाईवे से सात किमी दूर इस गांव में जाने के लिए कभी कोई साधन नहीं था। पीएम द्वारा गोद लेने के बाद से यहां दिन में दो बार सरकारी बस आती है। इस बस से लोग सीधे कैंट तक पहुंच सकते हैं।
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