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गुरुधाम के अष्टकोणीय कुंड को बनाया पार्क
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 08 Jun 2016 01:39 AM IST
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आबादी के विस्तार और विकास की होड़ में काशी के पौराणिक जलतीर्थों को भी नहीं छोड़ा गया। इस कारस्तानी में वीडीए, नगर निगम की भूमिका भी कम नहीं। उत्तर भारत में तंत्र साधना के बड़े केंद्र के रूप में विख्यात रहे गुरुधाम मंदिर के कुंड को पाटकर वीडीए ने कॉलोनी के लिए प्लाटिंग तो की ही, आवासीय परिसर भी बनवा दिया। नगर निगम ने पार्क और दूकानों का निर्माण करा दिया है। अब इस इलाके में भूजल स्तर तेजी से गिरता जा रहा है, जिससे इस क्षेत्र के लोगों की चिंता बढ़ गई है।
गुरुधाम मंदिर परिसर पं. गोपीनाथ कविराज की साधनास्थली रहा है। यहां हिमालय से लेकर कामरूप कामाख्या तक के संत तंत्र साधना के लिए आते थे। अब मंदिर तो खंडहर में तब्दील हुआ ही, 70 के दशक में नगर निगम ने गुरुधाम के अष्टकोणीय कुंड को पाटकर पार्क बनवा दिया था। सड़क किनारे दूकानें भी बनवाई गई थीं लेकिन उनका आवंटन नहीं हो सका। वहीं, पार्क में दिन में बच्चे क्रिकेट खेलते हैं तो रात में नशेड़ियों और अराजक तत्वों का जमावड़ा लगता है। न यहां माली की तैनाती है न पहरेदार की। इतना ही नहीं गुरुधाम परिसर में स्थित एक छोटे कुंड को जिसमें संत डुबकी लगाते थे, उसे कॉलोनाइजरों ने पाटकर सड़क बना दी है।
इसके बाद वीडीए ने गुरुधाम की प्लाटिंग कराकर जमीन नीलाम कर दी। आवासीय परिसर भी बनवा दिया। अब इस कुंड के पाटे जाने के दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि भूजल स्तर तेजी से नीचे खिसक रहा है। गुरुधाम, दुर्गाकुंड इलाके में हैंडपंप पानी छोड़ रहे हैं। लोगों का कहना है कि अष्टकोणीय कुंड में उतरने के लिए पत्थर की सीढ़ियां बनी थीं। यहां आस्थावानों की भीड़ लगती थी। इसका नए सिरे से पुनरुद्धार होना चाहिए।
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गुरुधाम मंदिर परिसर पं. गोपीनाथ कविराज की साधनास्थली रहा है। यहां हिमालय से लेकर कामरूप कामाख्या तक के संत तंत्र साधना के लिए आते थे। अब मंदिर तो खंडहर में तब्दील हुआ ही, 70 के दशक में नगर निगम ने गुरुधाम के अष्टकोणीय कुंड को पाटकर पार्क बनवा दिया था। सड़क किनारे दूकानें भी बनवाई गई थीं लेकिन उनका आवंटन नहीं हो सका। वहीं, पार्क में दिन में बच्चे क्रिकेट खेलते हैं तो रात में नशेड़ियों और अराजक तत्वों का जमावड़ा लगता है। न यहां माली की तैनाती है न पहरेदार की। इतना ही नहीं गुरुधाम परिसर में स्थित एक छोटे कुंड को जिसमें संत डुबकी लगाते थे, उसे कॉलोनाइजरों ने पाटकर सड़क बना दी है।
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इसके बाद वीडीए ने गुरुधाम की प्लाटिंग कराकर जमीन नीलाम कर दी। आवासीय परिसर भी बनवा दिया। अब इस कुंड के पाटे जाने के दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि भूजल स्तर तेजी से नीचे खिसक रहा है। गुरुधाम, दुर्गाकुंड इलाके में हैंडपंप पानी छोड़ रहे हैं। लोगों का कहना है कि अष्टकोणीय कुंड में उतरने के लिए पत्थर की सीढ़ियां बनी थीं। यहां आस्थावानों की भीड़ लगती थी। इसका नए सिरे से पुनरुद्धार होना चाहिए।
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