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नीलाद्री के सितार ने बादलों को रिझाया, झमाझम बरसात और सुरों में हुई संगत

Sun, 08 Apr 2018 11:11 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Sun, 08 Apr 2018 11:11 PM IST
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Neeladri kumar play sitar in sankatmochan music festival
सितार वादन करते नीलाद्री कुमार - फोटो : अमर उजाला
संकट मोचन संगीत समारोह की चौथी निशा के दूसरे चरण में नीलाद्री कुमार की मल्हार धुन ने बादलों को भी रिझा दिया और वह मंदिर प्रांगण में झमाझम बरस उठे।
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नीलाद्री के सितार और बरसात की बूंदों की लयकारी देखकर दर्शक भी अभिभूत हो गए। नीलाद्री कुमार ने कार्यक्रम का आरंभ अपने पिता पं. कार्तिक कुमार द्वारा ढाई दशक पूर्व तुलसी घाट पर बनाए गए नए राग तुलसी कौंस से किया।

इस राग में मालकौंस और चंद्रकौंस दोनों का ही समावेश देखने को मिला। उनके साथ तबले पर पर विजय घाटे ने बेहतरीन संगत की। नीलाद्री जब सितार वादन कर रहे थे इसी दौरान तेज आंधी और बारिश ने भी हलचल मचा दी।
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अचानक हुई बरसात के कारण अफरातफरी मची लेकिन नीलाद्री कुमार पूरी तन्मयता से सितार की तारों को छेड़ते रहे। सभी दर्शक पानी से बचने के लिए छत के नीचे आ गए और मंच के सामने परिसर पूरी तरह खाली हो गया मगर कार्यक्रम बाधित नहीं हुआ। 
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श्रोता हुए आनंदित

Neeladri kumar play sitar in sankatmochan music festival
पियु मुखर्जी ने घनघोर वर्षा के बीच अपने गायन की प्रस्तुति की - फोटो : अमर उजाला
कोलकाता की पियु मुखर्जी ने घनघोर वर्षा के बीच अपने गायन की प्रस्तुति की। उन्होंने राग जोगकौंस में गायन आरंभ करने के बाद टप्पा और बहुप्रचलित दादरा सुनाकर श्रोताओं को आनंदित किया।

एक तरफ आकाश से वर्षा की बूंदें बरस रही थीं दूसरी तरफ मंच से सुर की वर्षा हो रही थी। इसके बाद संतूर वादन की यादगार प्रस्तुति पंडित तरुण भट्टाचार्य के संतूरवादन की रही।

संतूर के साथ देशी विदेशी श्रोताओं ने भी तालियों के साथ से ताल मिलाई। डॉ.अश्विनी डालवी के सुरबहार वादन से चौथी निशा को विराम दिया गया। जयपुर के कलाकार अश्विनी डालवी ने पहले राग चंद्रकौंस और उसके उपरांत भैरवी में वादन किया।

इटावा घराने के कलाकार डॉ. अश्विनी ने सुरबहार वादन में ध्रुपद और ख्याल दोनों ही अंग की वादन विधा को प्रस्तुत किया। उनके साथ पखावज पर अंकित पारिख और तानपुरा पर खुशबू गुप्ता ने संगत की। 
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