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पूर्वांचल के इन जिलों की नारायण दत्त तिवारी ने रखी थी आधारशिला
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,मऊ/सोनभद्र
Updated Sat, 20 Oct 2018 11:03 AM IST
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नारायण दत्त तिवारी
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तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने अपने कार्यकाल में पूर्वांचल के दो जिलों की आधारशिला रखी थी। एनडी तिवारी ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल के दौरान चार मार्च 1989 को सोनभद्र जिला बनाने की घोषणा की थी। उसके अलावा 19 नवंबर 1988 को मऊ जिला बनाया था।
नारायण दत्त तिवारी ने मऊ को जनपद बनाने की घोषणा स्वयं यहां आकर की थी। कांग्रेस के कद्दावर नेता कल्पनाथ राय के प्रयास से इंदिरा गांधी की जयंती पर लोगों को नए जनपद की सौगात मिली थी। नारायण दत्त तिवारी लखनऊ से कल्पनाथ के साथ हेलीकॉप्टर से मऊ पहुंचे थे। जीवनराम हॉस्टल के मैदान पर बने मंच से नारायण दत्त तिवारी ने मऊ को नया जिला बनाने की घोषणा की थी।
उन्होनें कहा था कि आजमगढ़ जिले से अलग किए गए आठ ब्लॉकों और बलिया जिले से एक ब्लॉक रतनपुरा को मिलाकर नौ ब्लॉकों का यह मऊ जिला होगा। पहले डीएम जेएन चैंबर को भी मंच पर बुलाया और जिले के पहले डीएम के रूप में उनका परिचय कराया था। समारोह को संबोधित करते हुए कहा था कि मऊ को विकास और योजनाओं के लिए अलग बजट मिलेगा। जनता को अधिकारियों से मिलने दूर नहीं जाना होगा। अधिकारियों के यहां पर बैठने से प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी।
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बता दें कि कांग्रेस के कद्दावर नेता चंद्रजीत यादव मऊ को आजमगढ़ जिले से अलग किए जाने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन कल्पनाथ राय ने मऊ को नया जिला बनाने के लिए पूरी ताकत लगा दी थी। उनके इस प्रयास को नारायण दत्त तिवारी का वरद हस्त मिला और जिला अस्तित्व में आ गया। जनपद सृजन के बाद जीवनराम हॉस्टल के ही कई कमरों को कलेक्ट्रेट का रूप दिया गया।
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नारायण दत्त तिवारी ने मऊ को जनपद बनाने की घोषणा स्वयं यहां आकर की थी। कांग्रेस के कद्दावर नेता कल्पनाथ राय के प्रयास से इंदिरा गांधी की जयंती पर लोगों को नए जनपद की सौगात मिली थी। नारायण दत्त तिवारी लखनऊ से कल्पनाथ के साथ हेलीकॉप्टर से मऊ पहुंचे थे। जीवनराम हॉस्टल के मैदान पर बने मंच से नारायण दत्त तिवारी ने मऊ को नया जिला बनाने की घोषणा की थी।
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उन्होनें कहा था कि आजमगढ़ जिले से अलग किए गए आठ ब्लॉकों और बलिया जिले से एक ब्लॉक रतनपुरा को मिलाकर नौ ब्लॉकों का यह मऊ जिला होगा। पहले डीएम जेएन चैंबर को भी मंच पर बुलाया और जिले के पहले डीएम के रूप में उनका परिचय कराया था। समारोह को संबोधित करते हुए कहा था कि मऊ को विकास और योजनाओं के लिए अलग बजट मिलेगा। जनता को अधिकारियों से मिलने दूर नहीं जाना होगा। अधिकारियों के यहां पर बैठने से प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी।
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बता दें कि कांग्रेस के कद्दावर नेता चंद्रजीत यादव मऊ को आजमगढ़ जिले से अलग किए जाने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन कल्पनाथ राय ने मऊ को नया जिला बनाने के लिए पूरी ताकत लगा दी थी। उनके इस प्रयास को नारायण दत्त तिवारी का वरद हस्त मिला और जिला अस्तित्व में आ गया। जनपद सृजन के बाद जीवनराम हॉस्टल के ही कई कमरों को कलेक्ट्रेट का रूप दिया गया।
सोनभद्र को भारतभद्र बनाने का देखा था सपना
नारायण दत्त तिवारी
नारायण दत्त तिवारी का ताउम्र जिले से गहरा नाता रहा। सोनभद्र को भारतभद्र बनाने का सपना देखने वाले एनडी तिवारी ने मुख्यमंत्री के रूप में जिले की आधारशिला रखी थी और उस दौरान उन्होंने जिले में उद्योगों को आधुनिक तीर्थ के रूप में विकसित करने का भरोसा दिया था।
लोगों ने कहा कि उस समय की स्लेटी रंग की शेरवानी, सफेद चूड़ीदार पैजामा, सिर पर गांधी टोपी पहले एनडी तिवारी की छवि भुलाए नहीं भूलती। शिक्षक भोलानाथ मिश्रा ने कहा कि चार मार्च 1989 को राबट्रसगंज की मंडी समिति में उन्होंने फावड़े से मिट्टी की खुदाई कर मिर्जापुर से अलग सोनभद्र जिले की नींव रखी तो वहां मौजूद हर किसी के जेहन में उनकी अमिट छवि कैद हो गई।
सोनभद्र को भारतभद्र बनाने का सपना संजाने और कल-कारखानों के जरिए आधुनिक तीर्थ बनाने का भरोसा दिया था। मंच से ही जिले के पहले एसपी के रूप में रिजवान अहमद और पहले डीएम के रूप में सुरेशचंद्र दीक्षित का परिचय कराया था।
उन्होंने जिले का सृजन कर सोनभद्र जनक की भूमिका तो निभाई ही, तिवारी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में 1995 में भी यहां आकर सोनभद्र के लिए कुछ करने की इच्छा जताई।
लोगों ने कहा कि उस समय की स्लेटी रंग की शेरवानी, सफेद चूड़ीदार पैजामा, सिर पर गांधी टोपी पहले एनडी तिवारी की छवि भुलाए नहीं भूलती। शिक्षक भोलानाथ मिश्रा ने कहा कि चार मार्च 1989 को राबट्रसगंज की मंडी समिति में उन्होंने फावड़े से मिट्टी की खुदाई कर मिर्जापुर से अलग सोनभद्र जिले की नींव रखी तो वहां मौजूद हर किसी के जेहन में उनकी अमिट छवि कैद हो गई।
सोनभद्र को भारतभद्र बनाने का सपना संजाने और कल-कारखानों के जरिए आधुनिक तीर्थ बनाने का भरोसा दिया था। मंच से ही जिले के पहले एसपी के रूप में रिजवान अहमद और पहले डीएम के रूप में सुरेशचंद्र दीक्षित का परिचय कराया था।
उन्होंने जिले का सृजन कर सोनभद्र जनक की भूमिका तो निभाई ही, तिवारी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में 1995 में भी यहां आकर सोनभद्र के लिए कुछ करने की इच्छा जताई।