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Varanasi : महाकुंभ से काशी लौटे जगद्गुरु को मुस्लिम महिलाओं ने लगाया तिलक, हुआ पुष्पवर्षा से भव्य स्वागत
Tue, 04 Feb 2025 09:12 PM IST
नितीश कुमार पांडेय
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: नितीश कुमार पांडेय
Updated Tue, 04 Feb 2025 09:12 PM IST
सार
महाकुंभ से काशी पहुंचे जगद्गुरू बालक देवाचार्य का मुस्लिम महिलाओं ने तिलक लगाकर स्वागत किया इसके साथ ही फूलों की वर्षा कर स्वागत किया गया। इन्होंने बताया कि 5 हजार साल के इतिहास के आधार पर भारत को पूर्वजों और परम्पराओं से जोड़ने का अभियान चलेगा। कहा कि सभी धर्मों, महिलाओं, दलितों, आदिवासियों को कैबिनेट में स्थान मिलेगा।
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जगद्गुरू को तिलक लगाती मुस्लिम महिलाएं
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
जगद्गुरु बालक देवाचार्य के महाकुम्भ से काशी आने पर राजा तालाब, हरहुआ, बनियापुर, लमही में पुष्पवर्षा कर बैंड बाजे के साथ स्वागत किया गया। जगद्गुरु जब लमही पहुंचे तो सुभाष भवन में रहने वाले वनवासी समाज के बच्चों ने तीर धनुष के साथ जगद्गुरु को प्रणाम किया, दलित समाज की महिलाओं ने हाथों में राम ध्वजा लेकर जगद्गुरु की अगवानी की। मुस्लिम महिलाओं ने आरती कर स्वागत किया। विशाल भारत संस्थान के जिला चेयरमैन नौशाद अहमद दूबे ने महाराज जी की अगवानी की।
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लमही के सुभाष भवन में पहुँचने पर जगद्गुरु ने सुभाष मन्दिर में पुष्पों का हार पहनाकर परम पावन नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की आरती की और जय हिन्द का उद्घोष कर एक रहने का संदेश दिया। बाल आजाद हिन्द बटालियन की सेनापति दक्षिता भारतवंशी के नेतृत्व में जगद्गुरु को सलामी दी गयी। बता दें कि भारत की महान सांस्कृतिक विरासत महाकुम्भ ने करोड़ों भारतीयों के हृदय में सनातन संस्कृति और परम्परा के प्रति गौरव का बोध कराया है। देश को एक करने के लिए तीनों अमृत स्नान के बाद कई संत प्रेम, दया, करुणा के साथ एकता का पाठ पढ़ाने महाकुम्भ से निकल गए हैं।
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जगद्गुरु बालक देवाचार्य के चरण वंदन कार्यक्रम में भाग लेने आए दलित और मुस्लिम समाज के लोगों में अपार उत्साह था क्योंकि जगद्गुरु ने बिना किसी भेदभाव के सबको गले से लगाया और आशीर्वाद दिया। इस अवसर पर समावेशी भारत अभियान का शुभारंभ किया। रामपंथ के रामाचार्य ज्ञान प्रकाश ने जगद्गुरु के सम्मान में प्रशस्ति पत्र पढ़कर बताया कि जगद्गुरु जब पातालपुरी मठ के पीठाधीश्वर थे तब उन्होंने मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से मुक्ति के लिए लड़ रही मुस्लिम महिलाओं का समर्थन किया। दलित समाज के लोगों को पूजारी बनाने की वकालत की।
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आदिवासी समाज के बीच जाकर कुछ दिन तक रहे, राम परिवार भक्ति का आन्दोलन रामपंथ के माध्यम से चलाया। महिलाओं को पुजारी बनाने की वकालत की। मुसहर समाज को दीक्षित किया। मुस्लिम समाज को भारतीय संस्कृति से जोड़ा। किन्नरों को यज्ञ करने का अधिकार दिया। सबको रामभक्ति से जोड़ा। धर्म, मजहब, लिंग और जाति के भेद से समाज को मुक्त कराने का आदर्श प्रस्तुत किया। विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ० राजीव गुरुजी ने समावेशी भारत अभियान के शुभारम्भ के अवसर पर कहा कि भारतीय संस्कृति समावेशी है। किसी को किसी भी तरह से संस्कृति से न अलग किया जा सकता है और न उनको अस्वीकार किया जा सकता है। जिन वजहों से हम एक हो सकते हैं, उनको इतिहास की किताबों से निकालकर लाना होगा और सबको एक सूत्र में बांधना ही सनातन संस्कृति का मूल उद्देश्य है।