फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Baba Kashi Vishwanath takes food at Annapurna temple and rests at Vishalakshi

काशी में बाबा विश्वनाथ की ये है दिनचर्या: अन्नपूर्णा मंदिर में बाबा करते हैं भोजन, विशालाक्षी में विश्राम

Mon, 19 Aug 2024 10:01 AM IST
वाराणसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Mon, 19 Aug 2024 10:01 AM IST
सार

काशी में बाबा विश्वनाथ मां अन्नपूर्णा मंदिर में भोजन करते हैं तो विशालाक्षी में विश्राम करते हैं। आइए जानते हैं बाबा श्री काशी विश्वनाथ की दिनचर्या...

विज्ञापन
Baba Kashi Vishwanath takes food at Annapurna temple and rests at Vishalakshi
kashi vishwanath dham - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भगवान शिव अपने भक्तों के कल्याण के लिए कण-कण में विराजमान हैं। बाबा विश्वनाथ भी अपने भक्तों के साथ उनके कल्याण के लिए सुबह से रात तक काशी की गलियों में भ्रमण करते हैं। मां अन्नपूर्णा का दरबार बाबा विश्वनाथ की भोजनशाला है और दोपहर में वह मां विशालाक्षी के मंदिर में विश्राम के लिए जाते हैं।
विज्ञापन


काशीखंड के अनुसार बाबा विश्वनाथ ने स्वयं कहा है कि मेरे लिंगपूजन का प्रधान स्थान अविमुक्तेश्वर हैं, वहां पर यदि कोई मनुष्य एक बार भी पूजा कर ले तो कृतकृत्य हो जाता है। काशीखंड और लिंगपुराण के अनुसार बाबा विश्वनाथ सुबह की संध्या ओंकारेश्वर मंदिर में करते हैं। पठानी टोला में टीले पर ओंकारेश्वर महादेव का मंदिर विराजमान है। मंदिर में एक भी संध्या करने से मनुष्यों के समस्त पाप दूर हो जाते हैं।
विज्ञापन


आनंद कानन काशी ढूंढे टीम के सदस्य अजय शर्मा ने बताया कि मणिकर्णिका तीर्थ पर मध्याह्न में बाबा विश्वनाथ मां पार्वती और सभी देवताओं के साथ स्नान करने जाते हैं और यहीं पर अपने भक्तों को मुक्ति प्रदान करते हैं। मणिकर्णिका तीर्थ को ब्रह्मांड की नाभि भी कहा जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रो. माधव जनार्दन रटाटे ने बताया कि संध्या के समय बाबा विश्वनाथ चौक थाने के सामने मिश्रजी के बाड़े में पशुपतीश्वर महादेव में शैवी(शैव परंपरा के अनुसार)-संध्या करते हैं। संध्या की बेला में मंदिर में विभूतिधारण करने मात्र से ही मनुष्य को पशुपाश में बंधना नहीं पड़ता और वह पशुयोनि से मुक्त हो जाता है। वहीं दोपहर में बाबा विश्वनाथ माता विशालाक्षी के मंदिर में विश्राम करने जाते हैं और भक्तों को भी जीवन की अनंत यात्रा से विश्राम प्रदान करते हैं।

अजय शर्मा ने बताया कि भगवान की भोजनशाला माता अन्नपूर्णा का गृह है और रात्रि में काशीवासी बाबा विश्वनाथ को राजराजेश्वर स्वरूप माता पार्वती के संग विश्वनाथ मंदिर में शयन कराते हैं और भोर में मंगला आरती से संन्यासी जगाते हैं। इसीलिए मंगला आरती को संन्यासी आरती भी कहा जाता है।

आलोक शुक्ला ने बताया कि शुक्ल और कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर बाबा विश्वनाथ कृतिवासेश्वर के मंदिर में निवास करते हैं। मंदिर में चतुर्दशी के जागरण करने वालों को 84 लाख योनियों की यात्रा से मुक्ति मिलती है।

मंगला गौरी के महंत नरेंद्र पांडेय, शेखर द्रविड़ और नारायण घनपाठी ने बताया कि बाबा विश्वनाथ त्रिलोकवासी होने के बाद भी भक्तों की मनाेरथ सिद्धि के लिए त्रिलोचन मंदिर में सदैव विराजमान रहते हैं। मीरघाट पर धर्मेश्वर कूप के बगल में धर्मेश्वर शिवलिंग में भी बाबा विश्वनाथ सदैव विराजमान रहते हैं। यह भक्तों के सभी पापों को नष्ट करने वाला महालिंग है।

दारानगर स्थित रत्नेश्वर महादेव में बाबा विश्वनाथ भक्तों को रत्न, संतति और संपत्ति का दान करते हैं। डॉ. दिनेश तिवारी ने बताया कि आदिमहादेव महालिंग में बाबा भक्तों के भयानक पापों को हर लेते हैं। वृषभ ध्वज तीर्थ पीठ कपिलधारा में बाबा विश्वनाथ पितरों का उद्धार करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed