काशी में तीन साल में तीन हजार से अधिक ने कैंसर से गंवाई जान, सर्वे की रिपोर्ट जारी
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कैंसर से बचाव के प्रति लोगों को जागरूक किया जाता है, लेकिन अभी भी जिस तरह की जागरूकता चाहिए वैसे ही बहुत कम ही दिखती है। यही कारण है कि कैंसर के मरीज लगातार बढ़ते जा रहे हैं और मौत भी हो रही है।
महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र और होमी भाभा कैंसर अस्पताल की ओर से कराई गई जनसंख्या आधारित कैंसर रजिस्ट्री की रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2017 से सितंबर 2020 तक वाराणसी जिले में कुल 8500 कैंसर के मामले दर्ज किए गए हैं जबकि 3000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। पुरुषों में मुख और जीभ के कैंसर तो महिलाओं में स्तन और गर्भाशय के कैंसर के मामले ज्यादा मिल रहे हैं।
शुक्रवार को होमी भाभा कैंसर अस्पताल लहरतारा में निदेशक डॉ. सत्यजीत प्रधान ने जनसंख्या आधारित कैंसर रजिस्ट्री की रिपोर्ट-2017 को जारी किया और लोगों को जागरूक रहने की सलाह दी। पत्रकार वार्ता में डॉक्टर दिव्या खन्ना ने बताया कि टाटा मेमोरियल सेंटर, सर सुंदरलाल अस्पताल और स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से ही जनसंख्या आधारित कैंसर रजिस्ट्री की शुरुआत की गई है।
यूपी में पहली बार हो रही इस रजिस्ट्री में वाराणसी के सभी आठों ब्लॉक आराजी लाइन, बड़ागांव, चिरईगांव, चोलापुर, हरहुआ, काशी विद्यापीठ, पिंडरा और सेवापुरी के 1295 गांव, नगर निगम के 90 वार्ड के साथ ही गंगापुर नगर पंचायत और राम नगर पालिका में भी रहने वाले 40 लाख लोगों को शामिल किया गया।
निदेशक डॉक्टर सत्यजीत प्रधान ने बताया कि समय रहते कैंसर का रोकथाम किया जा सकता है। कहा कि इस तरह के अभियान का उद्देश्य यही है कि अधिक से अधिक लोगों को जागरूक कर समय से उनके कैंसर की पहचान कर उन्हें बेहतर इलाज दिया जा सके।
बताया कि 1 मई 2018 से शुरू हुए होमी भाभा कैंसर अस्पताल में अब तक 28852 मरीज पंजीकृत हुए हैं जबकि 12724 लोगों को भर्ती किया गया है। इसके अलावा 3079 लोगों का ऑपरेशन भी किया गया।
2017 में कैंसर के 1907 मामले पंजीकृत
डॉ दिव्या ने बताया कि 2017 में कैंसर के कुल 1907 मामले पंजीकृत हुए जिसमें 1058 पुरुष जबकि 849 महिला थी। 2017 में कुल 762 लोगों की मौत भी हो चुकी है। कैंसर से जान गंवाने वालों में 429 पुरूष जबकि 333 महिलाएं थी। बताया कि सर्वे के दौरान यह भी पता चला कि पुरुषों में हर 3 मामलों में से एक कैंसर मुंह से संबंधित है और ग्रामीण क्षेत्र की तुलना में शहरी क्षेत्र में मुख के कैंसर के अधिक मामले सामने आए जबकि महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर शहरी क्षेत्र की तुलना में ग्रामीण इलाकों में ज्यादा देखने को मिला है।