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जीका वायरस के संक्रमण से मस्तिष्क पर ज्यादा प्रभाव
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जीका वायरस जो कि एडीज मच्छर से फैलता है। इसका असर मस्तिष्क पर सबसे अधिक पड़ता है। अगर समय से इलाज नहीं कराया जाए तो यह खतरनाक भी हो सकता है। अगर कोई गर्भवती महिला जीका वायरस से संक्रमित होती है तो उसके साथ ही उसका असर होने वाले बच्चे पर भी पड़ता है। आईएमएस बीएचयू के मॉलिक्यलूर बायोलॉजी विभाग के प्रो. सुनीत सिंह ने शोध में एक ऐसा तरीका बताया है, जिसके माध्यम से जीका वायरस मस्तिष्क में पहुंचकर सबसे अधिक प्रभावी करता है।
आईएमएस में हुए शोध का प्रकाशन इसी माह अंतरराष्ट्रीय जर्नल मॉलिक्यूलर न्यूरोबायोलॉजी में भी प्रकाशित हुआ है। प्रो. सुनीत सिंह ने बताया कि जीका वायरस का एक प्रोटीन मस्तिष्क की रक्तवाहिकाओं में एक विशेष प्रकार के माइक्रोआरएनए 101-3पी के संश्लेषण को बढ़ाता है। इससे मस्तिष्क की रक्तवाहिकाओं के टाइट जंक्शन कमजोर हो जाते हैं। इस वजह से ये वायरस रक्तवाहिकाओं को कमजोर बनाकर मस्तिष्क में प्रवेश करता है। शोध के माध्यम से यह पता चला कि जीका वायरस किस तरीके से मस्तिष्क में प्रवेश कर सकता है। इस शोध का उपयोग आने वाले समय में जीका वायरस से बचाव के लिए बनने वाली दवाइयों में किया जा सकता है। बताया कि जीका वायरस वर्ष 2015 में ब्राजील, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण-पूर्वी एशिया सहित दुनिया के करीब 86 देशों को चपेट में लेने वाले जीका वायरस ने बड़े-बुजुर्ग संग गर्भ में पल रहे शिशुओं को सर्वाधिक प्रभावित किया था। भारत में जीका संक्रमण से वर्ष 2018 में 157 मामले व वर्ष 2021 में 65 मामले सामने आए हैं।
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आईएमएस में हुए शोध का प्रकाशन इसी माह अंतरराष्ट्रीय जर्नल मॉलिक्यूलर न्यूरोबायोलॉजी में भी प्रकाशित हुआ है। प्रो. सुनीत सिंह ने बताया कि जीका वायरस का एक प्रोटीन मस्तिष्क की रक्तवाहिकाओं में एक विशेष प्रकार के माइक्रोआरएनए 101-3पी के संश्लेषण को बढ़ाता है। इससे मस्तिष्क की रक्तवाहिकाओं के टाइट जंक्शन कमजोर हो जाते हैं। इस वजह से ये वायरस रक्तवाहिकाओं को कमजोर बनाकर मस्तिष्क में प्रवेश करता है। शोध के माध्यम से यह पता चला कि जीका वायरस किस तरीके से मस्तिष्क में प्रवेश कर सकता है। इस शोध का उपयोग आने वाले समय में जीका वायरस से बचाव के लिए बनने वाली दवाइयों में किया जा सकता है। बताया कि जीका वायरस वर्ष 2015 में ब्राजील, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण-पूर्वी एशिया सहित दुनिया के करीब 86 देशों को चपेट में लेने वाले जीका वायरस ने बड़े-बुजुर्ग संग गर्भ में पल रहे शिशुओं को सर्वाधिक प्रभावित किया था। भारत में जीका संक्रमण से वर्ष 2018 में 157 मामले व वर्ष 2021 में 65 मामले सामने आए हैं।
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