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संत मोरारी बापू के साथ हुआ कुछ ऐसा कि याद आ गए थे हनुमान जी

Mon, 23 Oct 2017 02:06 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Mon, 23 Oct 2017 02:06 PM IST
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morari bapu remember lord hanuman ji when he is in trouble
रामकथा मर्मज्ञ संत मोरारी बापू - फोटो : अमर उजाला
संत मोरारी बापू की ‘मानस मसान’ राम कथा शनिवार से वाराणसी में शुरू हो गई। बापू ने  व्यासपीठ से मसान को लेकर दिलचस्प संस्मरण सुनाकर कथा प्रेमियों को चकित कर दिया। बापू ने उस प्रसंग का जिक्र किया जब उन्हें एक बार किसी परिचित ने मुंबई में श्मशान के उद्घाटन के लिए बुला लिया था।
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तब संकट दूर करने के लिए उन्हें अनेक युक्तियां सोचनी पड़ी थीं। हनुमान जी का स्मरण करना पड़ा था। इसलिए कि उनमें अभी जीवन जीने की इच्छा थी। अंतत: ईश्वर ने सुन ली और एक ऐसी वृद्ध महिला के पार्थिव शरीर को लेकर अग्नि संस्कार के लिए लोग वहां पहुंचे और उनको संकट से छुटकारा मिल सका।
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सतुआ बाबा के गोशाला परिसर के 15 बीघा क्षेत्रफल में एसी कॉटेज और मणिकर्णिका महाश्मशान की अनुकृति वाले विशाल पंडाल में मोरारी बापू की रामकथा सुनने अपार जन सैलाब उमड़ पड़ा। दोपहर बाद अस्सी घाट पर पास गंगा के आगे शीश नवाकर बापू नाव से कथास्थल पर पहुंचे।
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वहां पोथी शोभायात्रा निकाली गई। इसके बाद हर-हर महादेव के गगनभेदी जयकारे के साथ बापू व्यासपीठ पर आसीन हुए। मानस की स्वरमयी पंक्तियों के साथ लय-ताल के समन्वय पर कथा प्रेमी झूमने लगे।

बापू ने बाबा विश्वनाथ की नगरी में मानस मसान की व्याख्या को गति दी। बताया कि गोस्वामी तुलसी दास ने रामचरित मानस में सिर्फ तीन बार मसान शब्द का उल्लेख किया है। बाल कांड से लंका कांड तक मृत्यु के प्रसंग कहीं न कहीं आए हैं लेकिन उत्तर कांड में मृत्यु के भय का संदेश नहीं मिलता। इसे अमरत्व का कांड कहा जा सकता है। 

‘मसान के मानस’ से परिचित कराया

morari bapu remember lord hanuman ji when he is in trouble
सतुआ बाबा की गोशाला में नौ दिवसीय ‘मानस मसान’ आरंभ - फोटो : अमर उजाला
रामकथा मर्मज्ञ संत मोरारी बापू ने शनिवार को गंगा पार व्यास काशी में ज्ञान-भक्ति-वैराग्य की अविरल धारा प्रवाहित की। ‘मसान के मानस’ से परिचित कराया। इसके पीछे के गूढ़ तत्वों की विशद व्याख्या की। उनका कहना था कि मानस स्वयं में एक मसान है।

उन्होंने मसान के सार को निरूपित करते हुए कहा कि जीवन से प्रलोभन और मृत्यु का भय निकल जाए तो मुक्ति मुट्ठी में आ जाती है। प्रसन्नता का खजाना यूं ही हाथ लग जाता है। मसान ज्ञान की भूमि है। या तो वहां विश्राम मिलेगा या फिर हमेशा के लिए जागृति मिल जाएगी। इसी के साथ पतित पावनी के तट पर नौ दिवसीय रामकथा की गंगा बह निकली।

बापू ने बताया कि बुद्धों की दृष्टि में किसी भी महत्वपूर्ण विषय की तीन प्रकार से ही व्याख्या पाई गई है। इसी तरह तुलसीदास ने मानस में मसान की व्याख्या तीन बार में भौतिक, दैविक और आध्यात्मिक स्वरूप में की है। मसान पर मनुष्य सदा के लिए सो जाता है या फिर सदा के लिए जागने की उसे शक्ति मिल जाती है। मसान का सही अर्थ मिल जाने पर सदा के लिए इंसान जाग सकता है
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