अभिव्यक्ति में पेन एंड इंक के चित्रों से किया कमाल, धर्म, संस्कृति एवं कला को उकेरा
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जल संरक्षण, नारी हिंसा, विलुप्त होती सांस्कृतिक विधाएं और मन के भावों को संजोए हुए चित्रकला प्रदर्शनी में छात्र-छात्राओं की रचनात्मकता की झलक नजर आई। विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार संबद्ध महाविद्यालयों की प्रदर्शनी विश्वविद्यालय परिसर में सोमवार को आयोजित की गई। काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय ज्ञानपरू के स्नातक और स्नातकोत्तर के छात्र-छात्राओं ने ललित कला विभाग में 65 से अधिक चित्रों की प्रदर्शनी लगाई।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के शताब्दी वर्ष के तहत सोमवार को ललित कला विभाग की कला दीर्घा में दो दिवसीय चित्रकला प्रदर्शनी अभिव्यक्ति का शुभारंभ हुआ। चित्रों में पेन एंड इंक, जलरंग, एक्रेलिक आयल और पेंसिल से छाया प्रकाश के माध्यम से धर्म, संस्कृति एवं कला को उकेरा गया है।
कुलपति प्रो. टीएन सिंह ने दीप जलाकर प्रदर्शनी की शुरुआत की। चित्रों को देखने के बाद कुलपति ने कहा कि प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती है। कम सुविधाओं के बावजूद छात्र-छात्राओं ने जिस रचनात्मकता के साथ चित्रों में भावों को उकेरा है, वह काबिलेतारीफ है। उन्होंने छात्र-छात्राओं को शुभकामना देते हुए कहा कि आपकी कला आपके नाम के साथ महाविद्यालय और देश का नाम भी रोशन करें।
चित्रकला प्रदर्शनी में 50 विद्यार्थियों के 65 चित्रों को लगाया गया है। काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के कला शिक्षक डॉ. रविंद्र कुमार ने बताया कि ऐसा पहली बार हुआ है कि महाविद्यालय के छात्र प्रदर्शनी के लिए बाहर आए हैं। विश्वविद्यालय की ओर से जो उन्हें मंच प्रदान किया गया है इससे उनके हौसलों को परवाज मिलेगी।
इस अवसर पर कुलानुशासक प्रो. संतोष कुमार गुप्ता, प्राचार्य डॉ. पीएन डोंगरे, डॉ. कामिनी वर्मा, डॉ. मनीषा, डॉ. मधु तिवारी, डॉ. रोशन प्रसाद, डॉ. पितांबर दास, प्रो. प्रेमचंद्र विश्वकर्मा, डॉ. शत्रुघभन प्रसाद, डॉ. स्नेहलता कुशवाहा, शालिनी कश्यप, आकाश सेठ मौजूद रहे। अतिथियों का स्वागत विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा ने किया।
ये छात्र रहे शामिल
चित्रकला प्रदर्शनी में अशरफ अली, अभिनीत, रंजना यादव, खूशबू, विद्यासागर, काजल मौर्या, तनु मौर्या, आरूषी, प्रीति, प्रिया, ओम, शिव, राहुल, कोमल, तान्या विश्वकर्मा, शिवानी वर्मा, रोमिता के चित्रों को लगाया गया है।