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काम की रफ्तार देखो...एक खरगोश...एक कछुआ
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 17 Dec 2016 02:00 AM IST
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16 महीने से चौकाघाट फ्लाईओवर का काम अब तक गति ही नहीं पकड़ रहा है।
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एक ओर बाबतपुर मार्ग पर फोरलेन फ्लाईओवर के निर्माण कार्य की तेज रफ्तार बनारस के विकास में चार चांद लगा रही है वहीं कैंट पर चौकाघाट फ्लाईओवर के विस्तारीकरण निर्माण कार्य की कछुआ चाल लोगों की उम्मीदों को चिढ़ा रही है। बाबतपुर में निर्माण कार्य नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) करा रही है, तो कैंट का काम उत्तर प्रदेश सेतु निगम करवा रहा है। दोनों के निर्माण कार्य की रफ्तार में दस गुने का अंतर है। यह तब, जब दोनों का निर्माण कार्य शुरू होने में सात महीन का अंतर रहा है।
बाबतपुर मार्ग पर फोरलेन फ्लाईओवर पर पाइलिंग का काम पूरा हो गया है। बने-बनाए प्लेट फिट किए जा रहे हैं। निर्माण सामग्री एक जगह रखी गई है। दोनों तरफ बैरिकेडिंग ऐसी कि अंदर क्या हो रहा है किसी को पता न चले। ऊपर मोनो रेल के जरिए काम हो रहा है, ताकि नीचे किसी को परेशानी न होने पाए। हालांकि फिलहाल इस मार्ग से गुजरने वालों को धूल से जरूर दो-चार होना पड़ता है।
दूसरी तरफ, कैंट मालगोदाम रोड पर पाइलिंग का काम ही अधूरा पड़ा है। यहां सर्विस रोड के नाम पर गड्ढों में तब्दील रास्ते के सिवा कुछ भी नहीं है। सुरक्षा मानकों से तो जैसे कोई मतलब ही नहीं है। बैरिकेडिंग कराई नहीं गई है। निर्माण सामग्री सड़कों पर ही फैली है। मजदूरों के पास हेलमेट तक नहीं हैं। सर्विस रोड के बड़े-बड़े गड्ढों में वाहनों के गिरने का खतरे के बावजूद कार्यदायी संस्था आंखें मूंदे हुए है।
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इंजीनियरों की मानें तो जापान व्यस्त सड़क का गडढा छह दिन में भरकर चलने लायक बना सकता है। सेतु निगम ने लागत बढ़ाने के लिए जानबूझकर समय पर काम पूरा न करने की आदत बना ली है। जानकारों का कहना है कि बाबतपुर की अपेक्षा कैंट पर वाहनों का अधिक दबाव है। ऐसी स्थिति में रूट डायवर्ट करके काम किया जा सकता है। मोहन सराय से कैंट और मुगलसराय से कैंट आने वाले वाहनों को डायवर्ट कर काम की गति तेज की जा सकती है। इसके लिए बाईपास का इस्तेमाल बेहतर ढंग से कर लोगों की समस्या कम की जा सकती है।
लंका को रामनगर से जोड़ने के लिए गंगा नदी पर 2007 में उत्तर प्रदेश सेतु निगम द्वारा शुरू कराए गए सामने घाट पुल के निर्माण का समय 28 दिसंबर को पूरा हो रहा है। नौ साल में 923.95 मीटर का पुल नहीं बन सका। 25 पिलर में से दो पिलर का काम पूरा किया जाना है। शुरू में इसकी लागत 38 करोड़ रुपये थी जो अब बढ़कर 89.50 करोड़ हो गई है। इस बीच पुल के निर्माण के दौरान बार्ज गंगा में गिर गया, जिसे अब तक निकाला नहीं जा सका है।
इस दौरान क्षेत्रीय लोगों ने पीडब्ल्यूडी राज्यमंत्री सुरेंद्र पटेल पर पुल पर डिजाइन बदलवाने का आरोप लगाया। मंत्री ने कई बार पुल का निर्माण समय से पूरा करने की हिदायत दी लेकिन कुछ नहीं हुआ। कैंट विधायक डॉ. ज्योत्सना श्रीवास्तव ने यहां धरना भी दिया था।
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बाबतपुर मार्ग पर फोरलेन फ्लाईओवर पर पाइलिंग का काम पूरा हो गया है। बने-बनाए प्लेट फिट किए जा रहे हैं। निर्माण सामग्री एक जगह रखी गई है। दोनों तरफ बैरिकेडिंग ऐसी कि अंदर क्या हो रहा है किसी को पता न चले। ऊपर मोनो रेल के जरिए काम हो रहा है, ताकि नीचे किसी को परेशानी न होने पाए। हालांकि फिलहाल इस मार्ग से गुजरने वालों को धूल से जरूर दो-चार होना पड़ता है।
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दूसरी तरफ, कैंट मालगोदाम रोड पर पाइलिंग का काम ही अधूरा पड़ा है। यहां सर्विस रोड के नाम पर गड्ढों में तब्दील रास्ते के सिवा कुछ भी नहीं है। सुरक्षा मानकों से तो जैसे कोई मतलब ही नहीं है। बैरिकेडिंग कराई नहीं गई है। निर्माण सामग्री सड़कों पर ही फैली है। मजदूरों के पास हेलमेट तक नहीं हैं। सर्विस रोड के बड़े-बड़े गड्ढों में वाहनों के गिरने का खतरे के बावजूद कार्यदायी संस्था आंखें मूंदे हुए है।
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इंजीनियरों की मानें तो जापान व्यस्त सड़क का गडढा छह दिन में भरकर चलने लायक बना सकता है। सेतु निगम ने लागत बढ़ाने के लिए जानबूझकर समय पर काम पूरा न करने की आदत बना ली है। जानकारों का कहना है कि बाबतपुर की अपेक्षा कैंट पर वाहनों का अधिक दबाव है। ऐसी स्थिति में रूट डायवर्ट करके काम किया जा सकता है। मोहन सराय से कैंट और मुगलसराय से कैंट आने वाले वाहनों को डायवर्ट कर काम की गति तेज की जा सकती है। इसके लिए बाईपास का इस्तेमाल बेहतर ढंग से कर लोगों की समस्या कम की जा सकती है।
लंका को रामनगर से जोड़ने के लिए गंगा नदी पर 2007 में उत्तर प्रदेश सेतु निगम द्वारा शुरू कराए गए सामने घाट पुल के निर्माण का समय 28 दिसंबर को पूरा हो रहा है। नौ साल में 923.95 मीटर का पुल नहीं बन सका। 25 पिलर में से दो पिलर का काम पूरा किया जाना है। शुरू में इसकी लागत 38 करोड़ रुपये थी जो अब बढ़कर 89.50 करोड़ हो गई है। इस बीच पुल के निर्माण के दौरान बार्ज गंगा में गिर गया, जिसे अब तक निकाला नहीं जा सका है।
इस दौरान क्षेत्रीय लोगों ने पीडब्ल्यूडी राज्यमंत्री सुरेंद्र पटेल पर पुल पर डिजाइन बदलवाने का आरोप लगाया। मंत्री ने कई बार पुल का निर्माण समय से पूरा करने की हिदायत दी लेकिन कुछ नहीं हुआ। कैंट विधायक डॉ. ज्योत्सना श्रीवास्तव ने यहां धरना भी दिया था।