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काशी विश्वनाथ मंदिर विस्तार के विरोध में उतरे स्थानीय नागरिक,जानिए क्या है कारण
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Wed, 17 May 2017 10:38 AM IST
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काशी विश्वनाथ मंदिर
- फोटो : file photo
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काशी विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र का दायरा बढ़ाने और खुला वातावरण मुहैया कराने के लिए गंगा तट से मंदिर तक के भवनों को सूचीबद्ध करने के विरोध में हस्ताक्षर अभियान शुरू हो गया है। मंदिर से लगे मुहल्लों के लोग भवनों के अधिग्रहण की चर्चा से परेशान हैं।
मंगलवार को कई इलाकों में नागरिकों ने हस्ताक्षर अभियान चलाया। उनका कहना है कि इस मामले में मनमानी नहीं होने दी जाएगी। हस्ताक्षरित ज्ञापन प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय में दिया जाएगा।
बाबा विश्वनाथ को गंगा से मिलाने की योजना का विरोध शुरू हो गया है। तीर्थपुरोहित सभा के महामंत्री पं. कन्हैया त्रिपाठी ने मंगलवार को कहा कि विश्वनाथ मंदिर विस्तार की आड़ में प्रशासन गंगा से लगे इलाके के निवासियों को उजाड़ने पर तुला हुआ है।
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इसके विरोध में मीर घाट, लाहौरी टोला, त्रिपुरा भैरवी, मणिकर्णिका के लोग खडे़ हो गए हैं। इस मामले को पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ के समक्ष रखा जाएगा।
सामाजिक कार्यकर्ता विकास यादव, सुनील मेहरोत्रा, कृष्ण कुमार शर्मा, पुनीत धवन, जितेंद्र सेठ, शशिधर इस्सर ने बताया कि विश्वनाथ मंदिर न्यास को अधिग्रहण के बीते 35 वर्षों में मंदिर की आय और व्यय का ब्यौरा सार्वजनिक करना चाहिए।
उनका कहना था कि अब तक मंदिर प्रशासन की ओर से नागरिकों की सुविधा के लिए स्कूल, अस्पताल या अन्य लोकोपयोगी एक भी योजनाएं नहीं चलाई जा सकी हैं। अलबत्ता मंदिर परिसर के विस्तार के नाम पर सिर्फ नागरिकों को परेशान किया जा रहा है।
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मंगलवार को कई इलाकों में नागरिकों ने हस्ताक्षर अभियान चलाया। उनका कहना है कि इस मामले में मनमानी नहीं होने दी जाएगी। हस्ताक्षरित ज्ञापन प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय में दिया जाएगा।
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बाबा विश्वनाथ को गंगा से मिलाने की योजना का विरोध शुरू हो गया है। तीर्थपुरोहित सभा के महामंत्री पं. कन्हैया त्रिपाठी ने मंगलवार को कहा कि विश्वनाथ मंदिर विस्तार की आड़ में प्रशासन गंगा से लगे इलाके के निवासियों को उजाड़ने पर तुला हुआ है।
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इसके विरोध में मीर घाट, लाहौरी टोला, त्रिपुरा भैरवी, मणिकर्णिका के लोग खडे़ हो गए हैं। इस मामले को पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ के समक्ष रखा जाएगा।
सामाजिक कार्यकर्ता विकास यादव, सुनील मेहरोत्रा, कृष्ण कुमार शर्मा, पुनीत धवन, जितेंद्र सेठ, शशिधर इस्सर ने बताया कि विश्वनाथ मंदिर न्यास को अधिग्रहण के बीते 35 वर्षों में मंदिर की आय और व्यय का ब्यौरा सार्वजनिक करना चाहिए।
उनका कहना था कि अब तक मंदिर प्रशासन की ओर से नागरिकों की सुविधा के लिए स्कूल, अस्पताल या अन्य लोकोपयोगी एक भी योजनाएं नहीं चलाई जा सकी हैं। अलबत्ता मंदिर परिसर के विस्तार के नाम पर सिर्फ नागरिकों को परेशान किया जा रहा है।
भवनों के अधिग्रहण की योजना से न्यास परिषद के अध्यक्ष का इनकार
विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष पं. अशोक द्विवेदी
- फोटो : अमर उजाला
काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य पं. अशोक द्विवेदी ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि विस्तार और जीर्णोद्धार के नाम पर बनारस के हेरिटेज से छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। पुराने मंदिरों, भवनों और कलाशिल्पों को सहेजने और सुरक्षित रखने का न्यास परिषद सुझाव देगा।
उन्होंने कहा कि एक भी भवन के अधिग्रहण की योजना नहीं है। इस तरह की चर्चाओं को लेकर नागरिकों को परेशान नहीं होना चाहिए। न्यास अध्यक्ष ने बताया कि फिलहाल मंदिर से लगे भवनों के अधिग्रहण की न तो कोई योजना है न ही ऐसा प्रस्ताव ही लाया गया है।
उन्होंने कहा कि एक भी भवन के अधिग्रहण की योजना नहीं है। इस तरह की चर्चाओं को लेकर नागरिकों को परेशान नहीं होना चाहिए। न्यास अध्यक्ष ने बताया कि फिलहाल मंदिर से लगे भवनों के अधिग्रहण की न तो कोई योजना है न ही ऐसा प्रस्ताव ही लाया गया है।