लाल बहादुर शास्त्री जयंती: इच्छा शक्ति के दम पर ननकू बन गया देश का लाल, फुफेरे भाई ने यादें की साझा
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प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद राष्ट्र को नेतृत्व प्रदान करने का भार लाल बहादुर शास्त्री के कंधों पर आ गया। 2 जून 1964 को उन्हें कांग्रेस संसदीय दल का नेता चुना गया। 9 जून 1964 को प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली।
बुलंद हौसले वाले ननकू राम देखते-देखते अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति के दम पर देश लाल बन गया। उक्त बातें बताते हुए पूर्व प्रधानमंत्री के फुफेरे भाई शास्त्री चौक निवासी श्याम मोहन श्रीवास्तव ने कहा कि 1952 में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद जब पहली बार आम चुनाव हुए तो कांग्रेस दल की ओर से शास्त्री जी को चुनाव अभियान संगठित करने का कार्यभार सौंपा गया। इन चुनाव में कांग्रेस को मिली सफलता का श्रेय उनकी संगठन शक्ति को ही था।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के तौर पर 18 महीनों में लाल बहादुर शास्त्री एक चरित्रवान व सहज बोध वाले व्यक्ति के रूप में उभरे। न केवल कश्मीर बल्कि अन्य सेक्टरों में भी जब पाकिस्तान ने घुसपैठ की तो कच्छ की खाड़ी में छोटी सी लड़ाई छिड़ी जिसमें पाकिस्तान के सैनिकों को धूल चटाई थी।
लाल बहादुर शास्त्री का जन्म मुगलसराय से बाहर कूढ़ कला गांव में 2 अक्टूबर 1904 को हुआ। बचपन में ननकू नाम से पुकारे जाने वाले बाद में लाल बहादुर शास्त्री बने। उनकी माता का नाम रामदुलारी देवी एवं पिता शारदा प्रसाद थे। शास्त्री जी की प्रारंभिक शिक्षा मुगलसराय तदुपरांत वाराणसी के हरिश्चंद्र हाई स्कूल में संपन्न हुई। लाल बहादुर शास्त्री केवल 17 वर्ष के थे जब महात्मा गांधी की पुकार पर असहयोग आंदोलन में कूद पड़े।
विद्यापीठ से उन्होंने शास्त्री की उपाधि प्राप्त की। 1926 में शास्त्री जी सर्वेंट ऑफ द पीपुल सोसायटी के सदस्य बने तथा इलाहाबाद में रहने लगे। 23 वर्ष की आयु में 16 मई 1928 को लाल बहादुर शास्त्री का विवाह ललिता देवी से मिर्जापुर में संपन्न हुआ। शादी के बाद उनको दो पुत्रियां कुसुम, सुमन एवं चार पुत्र हरीकृष्ण, अनिल, सुनील एवं अशोक हुए।
अपने लाल के निधन से स्तब्ध रह गया राष्ट्र
शास्त्री जी उत्तर प्रदेश सरकार में पुलिस एवं यातायात मंत्री रहे। 1951 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव पद पर शास्त्री जी की नियुक्ति हुई । 11 जनवरी 1966 को भारत मां का ये महान सपूत ताशकंद में अपनों से बिछड़ गया। अपने प्रिय नेता के निधन का समाचार सुनकर समूचा राष्ट्र स्तब्ध रह गया। भारत सरकार ने उन्हें देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न मरणोपरांत दिया।
युवा महोत्सव के दौरान बीएचयू के छात्रों संग शास्त्री जी ने खिंचवाई फोटो
19 नवंबर 1964 में राष्ट्रीय युवा महोत्सव दिल्ली में भाग लेने गए बीएचयू के छात्र-छात्राओं के सांस्कृतिक प्रतिनिधिमंडल ने तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी को हर हर महादेव के नारे से अपनी ओर आकर्षित कर लिया। शास्त्री जी ने काशी के प्रति अपने अनुराग को व्यक्त करने को सबके साथ फोटो खिंचवाई। इनमें बीएचयू छात्र परिषद के तत्कालीन सांस्कृतिक सचिव एवं डी म्युस के छात्र राजेश्वर आचार्य व अन्य छात्र रहे।