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UP Crime: प्रतियोगी परीक्षा में नकल कराने वाले गिरोह का सरगना गिरफ्तार, 13 लोगों के खिलाफ एफआईआर

Thu, 20 Aug 2026 04:11 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Thu, 20 Aug 2026 04:11 PM IST
सार

Varanasi News: प्रयागराज, प्रतापगढ़, जौनपुर, वाराणसी समेत आसपास जिलों के प्रतियोगी छात्र-छात्राओं को गिरोह में शामिल कर नकल कराने वाले सरगना को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। वहीं 13 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। 

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Kingpin of gang facilitating cheating in competitive exams arrested FIR against 13 people in varanasi
आरोपी शिवजीत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सहायक बोरिंग टेक्नीशियन की मुख्य परीक्षा में नकल कराने के आरोपी सॉल्वर गिरोह के सरगना शिवजीत पटेल को सिगरा पुलिस ने बुधवार सुबह मलदहिया चौराहे से गिरफ्तार किया। सिगरा के एओ मुस्लिम इंटर कॉलेज लल्लापुरा और मैदागिन के हरिश्चंद्र इंटर कालेज में 12 जुलाई को परीक्षा में एसटीएफ ने सॉल्वर गिरोह का पर्दाफाश किया था। 13 आरोपियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में गिरोह का सरगना शिवजीत पटेल वांछित था। 

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आरोपी प्रयागराज के बहरिया थाना क्षेत्र के रामगढ़ कोठारी का रहने वाला है। पुलिस की पूछताछ में मालूम चला कि इलेक्ट्रानिक माइक्रो डिवाइस से शिवजीत पटेल अपने घर से ही सॉल्वरों को बैठाकर पेपर हल करवाता था। वह अपने भाई कप्तान सिंह पटेल के साथ मिलकर गिरोह चला रहा था। 
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प्रयागराज, प्रतापगढ़, जौनपुर, वाराणसी समेत आसपास जिलों के प्रतियोगी छात्र-छात्राओं को गिरोह में शामिल कर रखा है। परीक्षाओं में अभ्यर्थियों से पैसे लेकर प्रश्नपत्र लीक कराकर इलेक्ट्रानिक डिवाइस से नकल कराता है। यह इलेक्ट्रानिक डिवाइस शिवजीत पटेल व कप्तान सिंह पटेल अभ्यर्थियों और सॉल्वरों को देते थे। सिगरा इंस्पेक्टर शिवाकांत मिश्रा ने बताया कि पूछताछ में पता चला कि यह गिरोह प्रतियोगी परीक्षाओं में पास कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से लाखों रुपये वसूलता था।
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गिरोह ने अभ्यर्थी धर्मेंद्र कुमार से कप्तान सिंह के खाते में 3.75 लाख रुपये ट्रांसफर कराए थे और 1.25 लाख रुपये नकद लिए थे। दूसरे अभ्यर्थी विपिन कुमार वर्मा से परीक्षा पास कराने के लिए पांच लाख रुपये और 25 हजार रुपये इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के नाम पर लिए गए थे। कप्तान सिंह पटेल, दीपक पटेल और राजेंद्र यादव उर्फ धीरेंद्र यादव प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल कराने वाले एक संगठित चलाते हैं, मुख्य सरगना शिवजीत पटेल है।

गिरोह के सदस्य रिश्तेदारों और परिचितों के माध्यम से परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों से संपर्क करते थे। उन्हें सॉल्वर के माध्यम से परीक्षा पास कराने और सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देकर जाल में फंसाते थे। 

अभ्यर्थियों के कान में माइक्रो डिवाइस और बाहर से निगरानी
प्रयागराज में शिवजीत पटेल के ठिकाने पर बैठे सॉल्वरों को पेपर हल करने के लिए 20 से 25 हजार रुपये दिए जाते थे। सॉल्वर प्रश्नपत्र हल कर मोबाइल से परीक्षा केंद्र में बैठे अभ्यर्थियों के कान में लगे माइक्रो डिवाइस पर सही उत्तर बताते थे। परीक्षा के दौरान माइक्रो डिवाइस की व्यवस्था दीपक पटेल और राजेंद्र करते थे। सॉल्वरों को पहले से बताया जाता था कि किस अभ्यर्थी के डिवाइस पर उत्तर भेजना है। प्रश्नपत्र मिलते ही उसे तुरंत सॉल्वरों तक पहुंचा दिया जाता था। इसके बाद सॉल्वर प्रश्न संख्या के अनुसार सही उत्तर फोन के माध्यम से बताते थे। गिरोह का एक सदस्य परीक्षा केंद्र के बाहर रहकर गतिविधियों पर भी नजर रखता था।

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