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काशी विश्वनाथ दरबार का मुख्य द्वार मूल स्वरूप में होगा बहाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 22 Aug 2018 02:36 PM IST
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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर
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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद ने कुंभाभिषेकम से पूर्व लगवाए गए दो रजत मंडित द्वार और चौखट हटाने का निर्णय लिया है। दोनों द्वार पर अंकित किए गए यजमानों के नाम भी मिटाए जाएंगे।
मंगलवार को हुई न्यास परिषद की बैठक में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) को भविष्य में न्यास परिषद की अनुमति के बगैर किसी भी धार्मिक प्रथा और परंपराओं से जुड़े कार्यों पर खुद फैसला नहीं करने का भी निर्देश दिया गया।
इसके साथ ही गर्भ गृह के बाहर से जलाभिषेक करने की व्यवस्था समेत मंदिर के विकास से जुड़े 14 प्रस्तावों पर विचार-विमर्श के बाद ज्यादातर पर सहमति व्यक्त की गई। न्यास परिषद की 95वीं बैठक में जुलाई में कराए गए कुंभाभिषेकम का मामला न्यास परिषद अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने स्वयं उठाया।
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उन्होंने बताया कि श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर की प्रथा-परंपरा में कुंभाभिषेकम कराना उचित नहीं था। काशी विश्वनाथ मंदिर के अधिनियम में इसका उल्लेख नहीं है। साथ ही यह भी यह भी निर्देशित किया कि भविष्य में इसे नजीर न बनाया जाए।
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मंगलवार को हुई न्यास परिषद की बैठक में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) को भविष्य में न्यास परिषद की अनुमति के बगैर किसी भी धार्मिक प्रथा और परंपराओं से जुड़े कार्यों पर खुद फैसला नहीं करने का भी निर्देश दिया गया।
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इसके साथ ही गर्भ गृह के बाहर से जलाभिषेक करने की व्यवस्था समेत मंदिर के विकास से जुड़े 14 प्रस्तावों पर विचार-विमर्श के बाद ज्यादातर पर सहमति व्यक्त की गई। न्यास परिषद की 95वीं बैठक में जुलाई में कराए गए कुंभाभिषेकम का मामला न्यास परिषद अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने स्वयं उठाया।
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उन्होंने बताया कि श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर की प्रथा-परंपरा में कुंभाभिषेकम कराना उचित नहीं था। काशी विश्वनाथ मंदिर के अधिनियम में इसका उल्लेख नहीं है। साथ ही यह भी यह भी निर्देशित किया कि भविष्य में इसे नजीर न बनाया जाए।
कुंभाभिषेकम का मुद्दा उठा
कुंभाभिषेकम
- फोटो : file photo
अशोक द्विवेदी ने कहा कि इससे पहले फरवरी में मंदिर परिसर में बदले गए द्वारों पर दानदाताओं शिबु सुंदरम और इफको ने अपने नाम लिखवा लिए हैं। यह भी मंदिर की परंपराओं के खिलाफ है। कुंभाभिषेकम करने वाले मुख्य यजमान शिबु सुंदरम ने दक्षिण भारत के समाचार पत्रों में मंदिर और प्रशासन का दुष्प्रचार भी किया है।
इसके मद्देनजर न्यास परिषद ने मंदिर परिसर में लिखवाए गए नाम हटवाने, भविष्य में बिना अनुमति धार्मिक अनुष्ठान नहीं कराने और दक्षिण भारत के समाचार पत्रों में मंदिर प्रशासन का पक्ष देकर शिबु सुंदरम पर कार्रवाई करने का निर्णय लिया। मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई और दक्षिण भारत के समाचार पत्रों में मंदिर प्रशासन का पक्ष रखने पर सहमति जताई।
मंडलायुक्त ने कहा कि दक्षिण भारत के श्रद्धालुओं को विज्ञापन देकर बताया जाएगा कि वे विश्वनाथ मंदिर के नाम पर दान मांगने वालों से सतर्क रहें। बैठक में 2000 में काशी नरेश की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान तैयार किए गए कार्यवृत्त का भी संज्ञान लिया गया। डीएम सुरेंद्र सिंह ने कार्यवृत्त का अध्ययन कर फैसला लेने की बात कही है।
इसके मद्देनजर न्यास परिषद ने मंदिर परिसर में लिखवाए गए नाम हटवाने, भविष्य में बिना अनुमति धार्मिक अनुष्ठान नहीं कराने और दक्षिण भारत के समाचार पत्रों में मंदिर प्रशासन का पक्ष देकर शिबु सुंदरम पर कार्रवाई करने का निर्णय लिया। मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई और दक्षिण भारत के समाचार पत्रों में मंदिर प्रशासन का पक्ष रखने पर सहमति जताई।
मंडलायुक्त ने कहा कि दक्षिण भारत के श्रद्धालुओं को विज्ञापन देकर बताया जाएगा कि वे विश्वनाथ मंदिर के नाम पर दान मांगने वालों से सतर्क रहें। बैठक में 2000 में काशी नरेश की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान तैयार किए गए कार्यवृत्त का भी संज्ञान लिया गया। डीएम सुरेंद्र सिंह ने कार्यवृत्त का अध्ययन कर फैसला लेने की बात कही है।