फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Mahatma Gandhi Jayanti: Kashi Vidyapeeth established to increase asahyog andolan

गांधी जयंती: देशप्रेम की अलख जगाने के लिए ही बापू ने रखी थी काशी विद्यापीठ की नींव

Fri, 02 Oct 2020 01:45 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Fri, 02 Oct 2020 01:45 AM IST
विज्ञापन
Mahatma Gandhi Jayanti: Kashi Vidyapeeth established to increase asahyog andolan
महात्मा गांधी - फोटो : फाइल फोटो

असहयोग आंदोलन को बढ़ाने और देशप्रेम की अलख जगाने के लिए बापू ने काशी में विद्यापीठ की नींव रखी थी। राष्ट्रपिता की पांचवीं यात्रा के दौरान 10 फरवरी 1921 को काशी विद्यापीठ का शिलान्यास हुआ था। बापू ने ही काशी विद्यापीठ की आधारशिला रखी थी। भाषण के दौरान कहा था कि मेरी प्रार्थना है कि प्रतिदिन विद्यापीठ की वृद्धि हो और राक्षसी सल्तनत को मिटाने या इसे दुरुस्त करने में हिस्सा ले।

विज्ञापन


काशी विद्यापीठ के प्रो. सतीश राय ने बताया कि महात्मा गांधी पांचवीं काशी यात्रा पर 9 फरवरी 1921 को आए। पहले दिन उन्होंने टाउनहाल में जनसभा की। विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार का इस सभा में आह्वान किया। दस फरवरी को काशी विद्यापीठ का शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि असहयोग को बढ़ाने के लिए ही विद्यापीठ की स्थापना हुई है।
विज्ञापन



यही हमारा एकमात्र शस्त्र है। जितने विद्यालय अंग्रेजी हुकूमत के नियंत्रण में हैं वहां विद्या नहीं लेनी चाहिए। अंग्रेजी झंडा जहां फहराता है वहां पर विद्या का दान लेना पाप है। हमारा दूसरा कर्तव्य है मातृभाषा को विकसित करना।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रो. नलिन श्याम कामिल ने बताया कि छठवीं यात्रा में बापू 17 अक्तूबर 1925 में विद्यापीठ आए। बापू ने कहा था कि रचनात्मक कार्यों में चरखे का स्थान प्रथम है। यह चरखा ही भारत के स्वावलंबन का प्रतीक है। देश को दरिद्रता से मुक्ति दिलाने के लिए चरखे को छोड़कर दूसरा कोई उपाय नहीं है। सातवीं यात्रा के दौरान जनवरी 1927 में बीएचयू के छात्रों को खादी खरीदने और पहनने का मंत्र दिया।

काशी विद्यापीठ के प्रो रविशंकर पांडेय ने बताया कि सितंबर 1927 में बापू आठवीं बार काशी आए थे। इस दौरान उन्होंने काशी विद्यापीठ के दीक्षांत समारोह में छात्रों को चरखा चलाने और खादी पहनने की सीख दी। 1934 में नौवीं यात्रा के दौरान बापू ने अस्पृश्यता के खिलाफ अलख जगाई। 27 जुलाई से दो अगस्त तक काशी में रहे और दलित बस्तियों में जाकर उनकी स्थिति जनता के सामने रखी। इस यात्रा में बापू ने काशी विद्यापीठ के कक्ष में सात दिन प्रवास किया था।

बापू की प्रतिमा स्थल को स्मारक का दिया जा रहा स्वरूप
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ परिसर में स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व राष्ट्ररत्न शिव प्रसाद गुप्त के प्रतिमा स्थल को भव्य स्मारक के रूप में विकसित किया जा रहा है। स्मारक को मूर्त रूप देने के लिए चुनार के पत्थरों को तराशने का काम भी जारी है। प्रतिमा कैंपस को छोटे पार्क के रूप में विकसित किया जाएगा। करीब 15 लाख रुपये की लागत से इस स्थल को छोटे पार्क के रूप में विकसित किया जाएगा। बनारस आने के दौरान बापू मानविकी संकाय के जिस कमरे में सात दिन रुके थे उसको बापू स्मृति दीर्घा के रूप में विकसित किया गया है।

लाल बहादुर वर्मा को विद्यापीठ ने बनाया लाल बहादुर शास्त्री
देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री काशी विद्यापीठ के पुरातन छात्र रह चुके हैं। काशी विद्यापीठ ने ही लाल बहादुर वर्मा को लाल बहादुर शास्त्री बना दिया। अपने यशस्वी छात्र को काशी विद्यापीठ आज भी गौरव के साथ नमन करता है। हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. श्रद्धानंद ने बताया कि शास्त्री जी ने काशी विद्यापीठ से ही 1925 में स्नातक की डिग्री हासिल की। इस डिग्री को उस समय शास्त्री कहा जाता था। लाल बहादुर शास्त्री ने विद्यापीठ से ही अपने नाम के आगे शास्त्री लगाना शुरू किया। पहले उनका नाम लाल बहादुर वर्मा था। दर्शन उनका पसंदीदा विषय था। काशी विद्यापीठ में उनकी स्मृति में एक छात्रावास भी है।

सुना हर हर महादेव का घोष, तोड दिया प्रोटोकॉल
पद्मश्री राजेश्वर आचार्य अपने छात्र जीवन को याद करते हुए कहते हैं कि बात 1962 63 की है। प्रधानमंत्री बनने के बाद पं लाल बहादुर शास्त्री दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय युवा महोत्सव में शामिल होकर लौट रहे थे, बीएचयू के छात्रों ने जब अपने पीएम को देखा तो उन्होंने हर हर महादेव का जयघोष कर उनका अभिनंदन किया। दिल्ली में हर हर महादेव का जयघोष सुनकर पीएम के कदम थम गए। प्रोटोकॉल तोड़कर शास्त्री जी छात्रों के पास पहुंचे। उनसे मुलाकात की और उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाई। विद्यार्थियों की टीम में पद्मश्री डॉ. राजेश्वर आचार्य बतौर सांस्कृतिक सचिव शामिल हुए थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed