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कार्तिक मास : बिंदु माधव को पहनाते हैं माखन-मलाई के वस्त्र, धारण कराते हैं मराठी पगड़ी
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बिंदु माधव का मलाई से हुआ श्रृंगार। अमर उजाला
वाराणसी। कार्तिक मास में गंगा स्नान, दीपदान के साथ खासकर विष्णु मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए भीड़ हो रही हैं। काशी में देश का पहला विष्णु मंदिर बिंदु माधव है, जहां माधव को विशेष माखन, मलाई, श्रीखंड आदि नैवेद्यों से शृंगार कर आरती होती हैं। यहां रोज सात बार आरतियां होती हैं तो मराठी परंपरा के बालगंगाधर तिलक की पगड़ी के स्वरूप को धारण करवाया जाता है। सप्ताह के सात दिनों के सात दिन तरह के वस्त्र पहनते हैं। दर्शन के लिए देशभर से सुबह से रात तक भक्त पहुंचते हैं।
पंचगंगा तीर्थ पर स्थित प्राचीन बिंदु माधव मंदिर में हमेशा दर्शन के लिए काशीवासियों के अलावा देशभर के श्रद्धालु पहुंचते हैं। बृहस्पतिवार को विशेषकर भीड़ होती है मंदिर के महंत मुरलीधर पटवर्धन ने बताया कि भगवान शिव प्रिय और भगवान विष्णु शृंगार प्रिय हैं। इसलिए उनके शृंगार में विविधता रहती है। पंचामृत स्नान के साथ माखन, मलाई के वस्त्र पहनाया जाता है। श्रीखंड शृंगार में प्रभु के चांदी के मुकुट में दही में विविध नैवेद्य मिलाकर केसरिया रूप में लेपन किया जाता है। बालगंगाधर तिलक जो हमेशा पगड़ी पहनते थे। उसी मॉडल की पगड़ी प्रभु को भी पहनाया जाता है। उन्होंने बताया कि एक माह तक भगवान विष्णु के 1008 नाम से तुलसी अर्चन होता है। भक्त प्रभु को विविध नैवेद्य चढ़ाकर प्रभु का दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
सोम को सफेद और शुक्र को गुलाबी वस्त्र में शृंगार
भगवान बिंदु माधव मंदिर में रोज अलग-अलग शृंगार होगा। सोमवार को सफेद, मंगल को लाल, बुध को हरा, बृहस्पतिवार को पीला, शुक्रवार को गुलाबी, शनि को नीला और रविवार को हल्का पिंक रंग के वस्त्र धारण करवाया जाता है। इसके साथ ही उनके भोग में फल, मिष्ठान, माखन, मलाई, पकवान, मालपुआ आदि नैवेद्य का भाग लगता है। 5 दिन पालकी, घोड़े, हाथी व शेषनाग पर होंगे विराजमान कार्तिक मास शुक्लपक्ष की भगवान देवउठनी एकादशी को जागृत होंगे। मुरलीधर पटवर्धन ने बताया कि एकादशी से पूर्णिमा तक विशेष शृंगार व भोग लगता है। एकादशी पर शेषनाग पर विराजेंगे। द्वादशी को प्रभु का तुलसी विवाह होगा। घोड़े पर सवाकर बरात निकाली जाती है। फिर झूले और हाथी पर विराजेंगे। पूर्णिमा को पंचामृत अभिषेक व अन्नकूट शृंगार होगा। इसी बीच एक दिन हर और हरि के रूप में शृंगार होता है। मान्यता है कि हरि भेंट का शृंगार पर भगवान शिव जी को तुलसी और विष्णु जी को बेलपत्र चढ़ाया जाता है। श्रीमठ के पीठाधीश्वर स्वामी रामनरेशाचार्य एक लाख तुलसी दल अभिषेक करते हैं।
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मंगला से शुरू होती है आरतियां
प्रभु को चार बजे भोर में मंगला आरती से शृंगार व आरतियों का सिलसिला शुरू हो जाता है। 4:30 बजे माखन आरती, सुबह 5:30 बजे श्रीखंड शृंगार आरती, सुबह 8 बजे से शृंगार आरती होती है। दिन में एक बजे भोग आरती, शाम सात बजे धूप-दीप आरती तथा रात नौ बजे से शयन आरती होती है।
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पंचगंगा तीर्थ पर स्थित प्राचीन बिंदु माधव मंदिर में हमेशा दर्शन के लिए काशीवासियों के अलावा देशभर के श्रद्धालु पहुंचते हैं। बृहस्पतिवार को विशेषकर भीड़ होती है मंदिर के महंत मुरलीधर पटवर्धन ने बताया कि भगवान शिव प्रिय और भगवान विष्णु शृंगार प्रिय हैं। इसलिए उनके शृंगार में विविधता रहती है। पंचामृत स्नान के साथ माखन, मलाई के वस्त्र पहनाया जाता है। श्रीखंड शृंगार में प्रभु के चांदी के मुकुट में दही में विविध नैवेद्य मिलाकर केसरिया रूप में लेपन किया जाता है। बालगंगाधर तिलक जो हमेशा पगड़ी पहनते थे। उसी मॉडल की पगड़ी प्रभु को भी पहनाया जाता है। उन्होंने बताया कि एक माह तक भगवान विष्णु के 1008 नाम से तुलसी अर्चन होता है। भक्त प्रभु को विविध नैवेद्य चढ़ाकर प्रभु का दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
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सोम को सफेद और शुक्र को गुलाबी वस्त्र में शृंगार
भगवान बिंदु माधव मंदिर में रोज अलग-अलग शृंगार होगा। सोमवार को सफेद, मंगल को लाल, बुध को हरा, बृहस्पतिवार को पीला, शुक्रवार को गुलाबी, शनि को नीला और रविवार को हल्का पिंक रंग के वस्त्र धारण करवाया जाता है। इसके साथ ही उनके भोग में फल, मिष्ठान, माखन, मलाई, पकवान, मालपुआ आदि नैवेद्य का भाग लगता है। 5 दिन पालकी, घोड़े, हाथी व शेषनाग पर होंगे विराजमान कार्तिक मास शुक्लपक्ष की भगवान देवउठनी एकादशी को जागृत होंगे। मुरलीधर पटवर्धन ने बताया कि एकादशी से पूर्णिमा तक विशेष शृंगार व भोग लगता है। एकादशी पर शेषनाग पर विराजेंगे। द्वादशी को प्रभु का तुलसी विवाह होगा। घोड़े पर सवाकर बरात निकाली जाती है। फिर झूले और हाथी पर विराजेंगे। पूर्णिमा को पंचामृत अभिषेक व अन्नकूट शृंगार होगा। इसी बीच एक दिन हर और हरि के रूप में शृंगार होता है। मान्यता है कि हरि भेंट का शृंगार पर भगवान शिव जी को तुलसी और विष्णु जी को बेलपत्र चढ़ाया जाता है। श्रीमठ के पीठाधीश्वर स्वामी रामनरेशाचार्य एक लाख तुलसी दल अभिषेक करते हैं।
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मंगला से शुरू होती है आरतियां
प्रभु को चार बजे भोर में मंगला आरती से शृंगार व आरतियों का सिलसिला शुरू हो जाता है। 4:30 बजे माखन आरती, सुबह 5:30 बजे श्रीखंड शृंगार आरती, सुबह 8 बजे से शृंगार आरती होती है। दिन में एक बजे भोग आरती, शाम सात बजे धूप-दीप आरती तथा रात नौ बजे से शयन आरती होती है।