{"_id":"586be5b74f1c1b4d5615963e","slug":"kailas-satyarthi-will-come-varanasi-intract-with-bhu-students","type":"story","status":"publish","title_hn":" वाराणसी आएंगे नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी, बीएचयू छात्रों से करेंगे सवांद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वाराणसी आएंगे नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी, बीएचयू छात्रों से करेंगे सवांद
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 03 Jan 2017 11:26 PM IST
विज्ञापन
शताब्दी वर्ष के तहत बीएचयू में कैलाश सत्यार्थी का व्याख्यान
- फोटो : twitter
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष के भागीदार नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी भी बनने जा रहे हैं। शताब्दी वर्ष के तहत कैलाश सत्यार्थी का व्याख्यान आयोजित किया जा रहा है।
संभावना है कि 18 जनवरी को उनका व्याख्यान हो। बीएचयू के शताब्दी वर्ष के तहत दुनिया भर के विशिष्ट विद्वानों के व्याख्यान आयोजित कराए जा रहे हैं। इसी क्रम में कैलाश सत्यार्थी का भी व्याख्यान होने जा रहा है।
बचपन बचाओ आंदोलन के प्रणेता कैलाश सत्यार्थी का व्याख्यान 16 जनवरी को दीक्षांत समारोह के बाद 18 जनवरी को आयोजित होने की संभावना है। कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने बताया कि शताब्दी वर्ष के तहत कैलाश सत्यार्थी को आमंत्रित किया गया है।
विज्ञापन
उनका कार्यक्रम लगभग तय है। तिथि को लेकर कुछ बदलाव हो सकता है। विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं उनसे रूबरू होंगे, उनके अनुभवों से कुछ सीखने का उन्हें मौका मिलेगा।
बता दें कि नोबेल पुरस्कार मिलने के बाद ये उनका दूसरा आगमन होगा। गांधीवादी विचारक कैलाश सत्यार्थी ने अब तक 83000 से अधिक बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया है। 26 साल की उम्र में इंजीनियरिंग छोड़ उन्होंने बच्चों के अधिकार के लिए काम करना शुरू कर दिया था।
विज्ञापन
संभावना है कि 18 जनवरी को उनका व्याख्यान हो। बीएचयू के शताब्दी वर्ष के तहत दुनिया भर के विशिष्ट विद्वानों के व्याख्यान आयोजित कराए जा रहे हैं। इसी क्रम में कैलाश सत्यार्थी का भी व्याख्यान होने जा रहा है।
विज्ञापन
बचपन बचाओ आंदोलन के प्रणेता कैलाश सत्यार्थी का व्याख्यान 16 जनवरी को दीक्षांत समारोह के बाद 18 जनवरी को आयोजित होने की संभावना है। कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने बताया कि शताब्दी वर्ष के तहत कैलाश सत्यार्थी को आमंत्रित किया गया है।
विज्ञापन
उनका कार्यक्रम लगभग तय है। तिथि को लेकर कुछ बदलाव हो सकता है। विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं उनसे रूबरू होंगे, उनके अनुभवों से कुछ सीखने का उन्हें मौका मिलेगा।
बता दें कि नोबेल पुरस्कार मिलने के बाद ये उनका दूसरा आगमन होगा। गांधीवादी विचारक कैलाश सत्यार्थी ने अब तक 83000 से अधिक बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया है। 26 साल की उम्र में इंजीनियरिंग छोड़ उन्होंने बच्चों के अधिकार के लिए काम करना शुरू कर दिया था।