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वरुणा कॉरिडोर: बारिश से पहले पैसा बहाने की कर ली गई तैयारी

Wed, 07 Jun 2017 04:42 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Wed, 07 Jun 2017 04:42 PM IST
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Irrigation Department raises money for varuna corridor
वरुणा कॉरिडोर
वरुणा कॉरिडोर की योजना पर वरुणा की रक्षा से जुड़े संगठनों और नदी विशेषज्ञों के सवालों के बीच कार्यदायी संस्था सिंचाई विभाग के अधिकारी सरकारी पैसे को और बर्बाद करने पर उतर आए हैं।
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शासन इस पूरे मामले की जांच-पड़ताल करे और कोई कदम उठाए, इससे पहले ही उन्होंने 75 करोड़ रुपये और जारी करने की मांग भेज दी है। यह तब, जब कॉरिडोर में पक्का काम नहीं कराया जा रहा है। फिलहाल, नदी और तटों पर ड्रेजिंग और मिट्टी समतल करने का काम हो रहा है।
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कहा जा रहा है कि मानसून से पहले कच्चे कामों पर रकम खपाने की मंशा से यह राशि मांगी गई है। अधिकारी चाहते हैं कि पैसा मिलने के बाद कुछ काम कराया जाएगा, कुछ नहीं। इस दौरान मिले धन को कच्चे काम पर कहीं भी खर्च दिखा दिया जाएगा।
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गंगा में बाढ़ आने पर वरुणा में बाढ़ आ जाती है और तटवासियों के लिए भी यहां रहना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में वहां कोई काम कैसे हो सकता है। पिछली बार बाढ़ के चलते 15 जुलाई से करीब ढाई महीने तक वरुणा कॉरिडोर का काम ठप था। कॉरिडोर का निर्माणाधीन ‘मॉडल’ और मशीनें पानी में डूब गई थीं।

कई महीने बाद इन मशीनों को निकाला जा सका था। तब पक्का काम अधिक होने से सिंचाई विभाग को अधिक नुकसान नहीं हुआ था लेकिन इस बार हालात अलग हैं। निर्माण सामग्री की किल्लत के चलते यहां हर तरह का पक्का काम रुका हुआ है।

डीएम बंगले से नक्खी घाट के बीच जेसीबी से नदी में ड्रेजिंग और तटों पर खुदाई का काम कराया जा रहा है। बारिश से पहले कॉरिडोर निर्माण के नाम पर ड्रेजिंग और खुदाई जैसे कार्यों में तेजी ला दी गई है। हालांकि सिंचाई विभाग के अभियंताओं का कहना है कि वह निर्धारित कार्ययोजना के तहत काम करा रहे हैं।

पिछली बार 200 करोड़ रुपये आए थे। उसमें 75 करोड़ रुपये खर्च नहीं होने के बाद शासन को वापस लौटाए गए थे। अब फिर से 75 करोड़ रुपये की डिमांड शासन को भेजी गई है।

वरुणा पर कब्जाः तीन-चार दिन में रिपोर्ट सौंपेगे अपर आयुक्त

Irrigation Department raises money for varuna corridor
50 से 70 मीटर तक चौड़ाई वाली वरुणा को 35 मीटर की चौड़ाई में सीमित किया गया - फोटो : अमर उजाला
भीम नगर में होटल बनाने के लिए नगर निगम की जमीन को कारोबारी द्वारा अपने नाम विनिमय कराने के मामले की जांच तीन-चार दिनों में पूरी हो जाएगी। जांच अपर आयुक्त प्रशासन ओम प्रकाश चौबे कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। तीन-चार दिन में वह जांच रिपोर्ट कमिश्नर को सौंप देंगे। छानबीन के लिए तहसील समेत अन्य संबंधित विभागों से भी ब्योरा मंगाया जा रहा है।
 इस मामले में डीएम ने कमिश्नर को जो रिपोर्ट सौंपी थी, अपर आयुक्त प्रशासन उसी की जांच कर रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि मामले में संलिप्त आधा दर्जन विभागों के अधिकारी कार्रवाई के घेरे में आ सकते हैं।
 
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