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देश की पहली बिना इंजन वाली रेलगाड़ी 'ट्रेन-18' का बदला नाम, दिव्यांगों के लिए की गई स्पेशल व्यवस्था
Tue, 29 Jan 2019 10:25 AM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Published by: Priyesh Mishra
Updated Tue, 29 Jan 2019 10:25 AM IST
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ट्रेन-18
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अगले महीने से दिल्ली-वाराणसी के बीच चलने वाली भारत में बनी पहली सेमी हाई स्पीड ट्रेन-18 का नाम बदल दिया गया है। जिसमें न सिर्फ आम लोगों के लिए बल्कि दिव्यांगों के लिए भी स्पेशल व्यवस्था की गई है।
सेमी हाई स्पीड ट्रेन-18 का नाम अब 'वंदे भारत एक्सप्रेस' रख दिया गया है। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि दिल्ली-वाराणसी के बीच चलने वाली यह ट्रेन कानपुर व इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर भी ठहरेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द इस ट्रेन को हरी झंडी दिखा सकते हैं।
रेल मंत्री ने बताया कि परीक्षण और जांच के बाद स्वदेश निर्मित ट्रेन-18 को चलाने की मंजूरी दे दी गई है। रेलवे ने प्रधानमंत्री मोदी से समय मांगा है। उन्होंने बताया कि यह ट्रेन नई दिल्ली से वाराणसी का सफर आठ घंटे में तय करेगी। वंदे भारत ट्रेन देश की शान बनेगी।
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उन्होंने कहा कि आखिर हम कब तक विदेशी तकनीक के भरोसे रहेंगे और इसी सोच के साथ इस ट्रेन को बनाया गया है। इसमें दिव्यांगों के लिए दो स्पेशल कोच बनाया गया है। विदेशों में भी निर्यात करने की योजना रेलवे ने बनाई है।
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सेमी हाई स्पीड ट्रेन-18 का नाम अब 'वंदे भारत एक्सप्रेस' रख दिया गया है। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि दिल्ली-वाराणसी के बीच चलने वाली यह ट्रेन कानपुर व इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर भी ठहरेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द इस ट्रेन को हरी झंडी दिखा सकते हैं।
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रेल मंत्री ने बताया कि परीक्षण और जांच के बाद स्वदेश निर्मित ट्रेन-18 को चलाने की मंजूरी दे दी गई है। रेलवे ने प्रधानमंत्री मोदी से समय मांगा है। उन्होंने बताया कि यह ट्रेन नई दिल्ली से वाराणसी का सफर आठ घंटे में तय करेगी। वंदे भारत ट्रेन देश की शान बनेगी।
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उन्होंने कहा कि आखिर हम कब तक विदेशी तकनीक के भरोसे रहेंगे और इसी सोच के साथ इस ट्रेन को बनाया गया है। इसमें दिव्यांगों के लिए दो स्पेशल कोच बनाया गया है। विदेशों में भी निर्यात करने की योजना रेलवे ने बनाई है।
भारतीय इंजीनियरों ने 18 महीने के रिकॉर्ड समय में बनाया
देश की पहली बिना इंजन वाली 16 कोच की वंदे भारत एक्सप्रेस को भारतीय इंजीनियरों ने 18 महीने के रिकॉर्ड समय में बनाया है। इस पर 97 करोड़ की लागत आई है और इसे इंटिगरल कोच फैक्टरी चेन्नई ने बनाया है। वंदे भारत 30 वर्ष पुरानी शताब्दी एक्सप्रेस की जगह लेगी।
उम्मीद जताई जा रही है कि प्रधानमंत्री कार्यालय से अगले सप्ताह तक स्वीकृति मिल जाएगी और दस दिनों के भीतर इस ट्रेन को ट्रैक पर उतार दिया जाएगा। टी-18 वाराणसी-इलाहाबाद वाया जंघई होकर चलेगी। इसके परिचालन की जिम्मेदारी उत्तर रेलवे संभालेगा। अधिकारियों के बीच तैयारियों को लेकर पत्राचार शुरू हो गया है।
अधिकारिक सूत्रों के अनुसार इस ट्रेन का यात्रा किराया तेजस ट्रेन की तर्ज पर ही होगा। अन्य सुपरफास्ट ट्रेनों से बेस फेयर 1.4 गुणा अधिक रखा जाएगा। ट्रेन में खान-पान का मेन्यू तैयार करने के लिए आईआरसीटीसी को निर्देश दे दिया गया। हालांकि इस ट्रेन में खाना रखने के लिए अलग से जगह नहीं होने के कारण आईआरसीटीसी पहले ही आपत्ति दर्ज करा चुका है।
उम्मीद जताई जा रही है कि प्रधानमंत्री कार्यालय से अगले सप्ताह तक स्वीकृति मिल जाएगी और दस दिनों के भीतर इस ट्रेन को ट्रैक पर उतार दिया जाएगा। टी-18 वाराणसी-इलाहाबाद वाया जंघई होकर चलेगी। इसके परिचालन की जिम्मेदारी उत्तर रेलवे संभालेगा। अधिकारियों के बीच तैयारियों को लेकर पत्राचार शुरू हो गया है।
अधिकारिक सूत्रों के अनुसार इस ट्रेन का यात्रा किराया तेजस ट्रेन की तर्ज पर ही होगा। अन्य सुपरफास्ट ट्रेनों से बेस फेयर 1.4 गुणा अधिक रखा जाएगा। ट्रेन में खान-पान का मेन्यू तैयार करने के लिए आईआरसीटीसी को निर्देश दे दिया गया। हालांकि इस ट्रेन में खाना रखने के लिए अलग से जगह नहीं होने के कारण आईआरसीटीसी पहले ही आपत्ति दर्ज करा चुका है।