बीएचयू में भारी हंगामा: कुलपति कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे छात्र ने किया आत्मदाह का प्रयास
बीएचयू में पीएचडी प्रवेश नियमावली के विरोध में छात्र बीते कई दिनों से धरना दे रहे हैं। आंदोलनकारी छात्रों ने शुक्रवार दोपहर सेंट्रल ऑफिस पहुंचकर कुलपति का घेराव करने का प्रयास किया। कुछ छात्र गैलन में पेट्रोल लेकर आए थे।
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में पीएचडी प्रवेश के लिए जारी त्रुटिपूर्ण नियमावली के खिलाफ धरने पर बैठे एक छात्र ने शुक्रवार को आत्मदाह करने का प्रयास किया। कुलपति कार्यालय के बाहर छात्र ने अपने ऊपर पेट्रोल डालना शुरू किया तो अफरातफरी मच गई। प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सुरक्षाकर्मियों ने बीचबचाव का प्रयास किया। कुछ देर के लिए केंद्रीय कार्यालय पर तनावपूर्ण स्थिति रही। वहीं, हंगामे के बाद कुलपति ने मीटिंग बुलाई।
शुक्रवार दोपहर बाद केंद्रीय कार्यालय पर 12 दिनों से धरनारत एक छात्र पेट्रोल लेकर आत्मदाह करने पहुंच गया। आनन-फानन छात्र ने अपने ऊपर पेट्रोल डाल लिया तभी प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सुरक्षाकर्मियों ने उसे पकड़ लिया। इस बीच छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और कुलपति से मिलने की जिद पर अड़े रहे।
तनावपूर्ण स्थिति को देख पुलिस बुलानी पड़ी, काफी मान मनौव्वल के बाद छात्र वापस धरनास्थल की तरफ लौटे। हंगामे के बाद कुलपति ने विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हाई प्रोफाइल मीटिंग की। आत्मदाह की सूचना मिलते ही पूर्व सांसद डॉ. राजेश मिश्र धरनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने धरनारत छात्रों का हालचाल जाना।
उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्र विरोधी बताया और अनिश्चितकालीन प्रदर्शन को समर्थन दिया। पूर्व सांसद ने कहा कि पहले कुलपति छात्र हितों को ध्यान में रखकर फैसला लेते थे अब के कुलपति छात्र विरोधी फैसला लेते हैं। विश्वविद्यालय में छात्रसंघ का न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। छात्रों से प्रशासनिक अधिकारियों के बातचीत का कोई प्रॉपर चैनल नहीं है।
छात्र विकास ने बताया कि हमारी कुछ मांगों को मौखिक रूप से माना गया था। हम लोग ग्यारह सूत्री मांगपत्र पर नियमावली बनने तक अनिश्चितकालीन प्रदर्शन जारी रखेंगे। इस दौरान पतंजलि पांडेय, सूर्याभ, राजकुमार डायमंड, शुभम शुक्ला, सौरभ राय, अभिषेक उपाध्याय, हर्ष, अविनाश, मृत्युंजय तिवारी मौजूद थे।
कई बार दिया ज्ञापन, नहीं हुआ सुधार
पीएचडी प्रवेश के लिए विश्वविद्यालय में नई नियमावली जारी की थी। इसमें व्याप्त त्रुटियों के खिलाफ छात्रों ने कई बार परीक्षा नियंता से संपर्क कर ज्ञापन दिया और त्रुटियों को सुधारने की बात कही, लेकिन प्रशासन ने छात्रों की मांगों को नजरअंदाज कर दिया। इसके खिलाफ आक्रोशित छात्र परीक्षा नियंता कार्यालय के मुख्यद्वार पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए।
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