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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Gyanvapi Order will come on 6 September in old case lawyer arguments completed Question on appointing

ज्ञानवापी: पुराने केस में छह सितंबर को आएगा आदेश, अधिवक्ता की बहस पूरी; वाद मित्र नियुक्त करने पर सवाल

Sat, 30 Aug 2025 08:27 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sat, 30 Aug 2025 08:27 AM IST
सार

न्यायालय के किसी त्रुटि के कारण कोई पक्षकार के हित प्रवाहित नहीं होनी चाहिए ये नैसर्गिक न्याय की मंशा है। उच्चतम न्यायालय के नजीर में ये भी कहा गया कि न्याय के विलंबता यदि न्याय के विफलता है। तो न्याय देने में जल्दबाजी न्याय के दफन करने जैसा है। 

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Gyanvapi Order will come on 6 September  in old case lawyer arguments completed Question on appointing
वाराणसी कोर्ट। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

Varanasi News: सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्टट्रैक) भावना भारती की अदालत में शुक्रवार को ज्ञानवापी के वर्ष 1991 के पुराने  मुकदमे में सुनवाई हुई। मामले में पैरोकार रहे हरिहर पांडेय की बेटियों की ओर अधिवक्ता आशीष श्रीवास्तव ने बहस पूरी कर ली। इस मामले में आदेश के लिए कोर्ट ने छह सितंबर की तिथि नियत की है।

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शुक्रवार को बेटियों की ओर से अधिवक्ता ने कोर्ट के आदेश में संशोधित करने संबंधित अर्जी के समर्थन किया और वाद मित्र नियुक्त पर भी कई सवाल खड़ा किया। अधिवक्ता ने कहा कि उच्चतम न्यायालय नजीर हैं। वह बताता है कि कोर्ट के आदेश में कोई त्रुटि हो गई है तो उसे स्वयं ही सुधार कर सकती है या अगर पक्षकार उसपर ध्यान दिलाया है उसे संज्ञान में लेना चाहिए। 

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काफी देर तक चली बहस

उन्होंने कहा, पक्षकार गण ने इसपर बहस ही नहीं की थी और आदेश हो गया। 11 अक्तूबर 2019 को कोर्ट ने सिर्फ वादमित्र नियुक्त किया न कि वादी बनाया है। ये जनहित संबंधित वाद है। जो हिंदू जनमानस से जुड़ा हुआ। जिस प्राइवेट ट्रस्ट के माध्यम से इस मुकदमे को पैरवी करने की हकदार के दावा किया जा रही वो कपोल कल्पित है। उनके इस अर्जी पर विरोध करने के विधिक अधिकार भी नहीं है। इस लिए बेटियों के ओर वे दाखिल आदेश में संशोधित करने की अर्जी को स्वीकार करने की गुहार लगाई।

वहीं, पिछली तिथि पर वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी और अंजुमन इंतजामिया मसाजिद की ओर से रईस अहमद अंसारी ने बहस की थी। वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी ने कोर्ट में कहा था कि इस मामले में अवर न्यायालय से आदेश हो चुका है। हालांकि बेटियों की ओर से बार-बार अपनी बहस में ये कहा जा रहा कि वाद मित्र ने हरिहर पांडेय के धोखे में रख कर अपने को इस मामले में वाद मित्र नियुक्त करवाए है। जबकि कोर्ट ने सारे प्रक्रिया पूरी करने के बाद 2019 में उसे न्यायालय ने वाद मित्र नियुक्त किया गया था।

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