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रिपोर्ट में हुआ खुलासा, गंगा के पानी में पांच हजार गुना बढ़े बैक्टीरिया

Tue, 08 May 2018 12:28 PM IST
पीयूष तिवारी,अमर उजाला,वाराणसी
पीयूष तिवारी,अमर उजाला,वाराणसी Updated Tue, 08 May 2018 12:28 PM IST
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Five thousands time bacteria increase in ganga water
ललिता घाट पर ऐसा है नजारा - फोटो : अमर उजाला
आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते कि मोक्षदायनी गंगा कितनी प्रदूषित हो गई है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जो आंकड़ा दिया है वह जानकर आप परेशान हो जाएंगे।  100 दो सौ गुना नहीं बल्कि गंगाजल की मूल गुणवत्ता से पांच हजार गुना प्रदूषित हो चुकी हैं।
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गंगा में लगातार गिर रहे सीवर के पानी के अलावा कल कारखानों के केमिकल और हैवी मेटल के चलते गंगा में कार्बनिक लोड बढ़ता जा रहा है। इससे गंगा में हानिकारक बैक्टीरिया पैदा हो रहे हैं। ये बैक्टीरिया अब जलचरों के लिए भी खतरा बन चुके हैं।
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प्रदूषण विभाग के आंकड़े बताते हैं कि पानी में इतने जहरीले रसायन मिल गए है कि इसमें हानिकारक पदार्थों की मात्रा पांच हजार गुना बढ़ गई है। इससे पानी अब जलचरों के लिए भी सही नही रह गया।
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प्रदूषण विभाग की रिपोर्ट के अनुसार प्रति मिली ग्राम पानी में टोटल कॉली फार्म की संख्या 100 से अधिक नहीं होना चाहिए वह इस समय बढ़कर 49 हजार तक पहुंच गया है।

जबकि फीकल कॉलीफार्म भी 100 से कम होना चाहिए, जिसका आंकड़ा 33 हजार से पार हो गया है। इनके बढ़ने के चलते पानी में हानीकारक बैक्टीरिया की मात्रा गंगा में बढ़ गई है। 

ये है मानक

Five thousands time bacteria increase in ganga water
चौबीसों घंटे नालों से गिरते मल-जल से हालात भयावह - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश राज्य गंगा संरक्षण समिति के सदस्य डॉ. बीडी त्रिपाठी ने कहा कि प्रदूषण विभाग की रिपोर्ट के अनुसार तो गंगाजल की बहुत ही गंभीर स्थिति है। अगर इस लेबल में हानिकारक तत्व और वैक्टिरियां पानी में हो गए है तो इससे महामारी फैलने का खतरा हो गया है। इसलिए इसको लेकर कोई ठोस कदम उठाना चाहिए। 

ये है प्रदूषण के आंकड़े
वर्ष------पीएच--- -डीओ--- बीओडी
2018- 8.12--- 7.05--- 5.03 

ये है मानक 
मानक के अनुसार बीओडी की मात्रा तीन मीलीग्राम से नीचे होना चाहिए, जो प्रदूषण विभाग की रिपोर्ट के अनुसार लगभग दो गुना 5.03 हो गया है। वहीं गंगाजल में पीएच आठ होना चाहिए, जो 8.12 हो गया है।

ऐसे में इन मानकों के उपर जाने पर गंगा जल से लोगों को पीलिया, कालरा, हैजा जैसे रोगों का खतरा बढ़ गया है। वहीं ये हानिकारक वैक्टीरिया गंगा के ऑक्सीजन को भी अवशोषित कर लेते हैं। 

 
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