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आजमगढ़ में बना हिजबुल मुजाहिद्दीन सहित कई अन्य आतंकियों का फर्जी पासपोर्ट
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़
Updated Tue, 28 Nov 2017 10:29 AM IST
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पासपोर्ट
- फोटो : demo
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यूपी के आजमगढ़ में फर्जी पासपोर्ट बनाने का गोरखधंधा जोरों पर चल रहा है। हिजबुल मुजाहिद्दीन के कई आतंकियों सहित अन्य के फर्जी पासपोर्ट यहीं से बने मिले। कई मामले उजागर होने के बाद भी न तो फर्जीवाड़े पर रोक लगाने की कोई ठोस पहल हुई न ही उन कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई ही की गई जिनकी मिलीभगत से यह खेल खेला जा रहा है।
फर्जी पासपोर्ट बनवाने के मामलों पर गौर करें तो हत्या के मामले में कटौली गांव निवासी पांच हजार के इनामी बदमाश माजिद ने वर्ष 2015 में जौनपुर जिले के केराकत कोतवाली क्षेत्र निवासी अपनी बहन को मां और जीजा को पिता बनाकर अपना पासपोर्ट बनवा लिया और विदेश भाग गया। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने विदेश मंत्रालय तक से गुहार लगाई, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।
वर्ष 2007 में वाराणसी, गोरखपुर कोर्ट में हुए सिलसिलेवार बम धमाके के मामले में वर्ष 2011 में लखनऊ में गिरफ्तार हूजी के कथित एरिया कमांडर तारिक हकीम का पासपोर्ट भी यहीं से बनाया गया था। जबकि वर्ष 2001 में अयोध्या में हुए बम धमाके के मामले में वर्ष 2010 में लखनऊ के कानपुर रोड पर हुई मुठभेड़ में मारा गया हिजबुल मुजाहिद्दीन का आतंकी इमरान के पास से मिला पासपोर्ट भी आजमगढ़ से ही बना मिला था।
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वर्ष 2002 में शहर के दलालघाट मुहल्ले में स्थित एक लॉज से गिरफ्तार कश्मीरी युवक मुहम्मद युनूस के पास से मिला पासपोर्ट भी यहीं से बनवाया गया था। अंडरवर्ल्ड डान अबू सलेम का भी पासपोर्ट जिले से अलग-अलग नामों से बनाया गया है।
इसी प्रकार देवगांव कोतवाली क्षेत्र के दौना गांव निवासी एक महिला ने भी अलग अलग नामों से दो पासपोर्ट हासिल कर लिया था। मुबारकपुर थाना क्षेत्र के फकरूद्दीनपुर गांव निवासी अकरूज्जमां ने भी फर्जी ढंग से अलग अलग नामों से दो पासपोर्ट बनवाए थे।
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फर्जी पासपोर्ट बनवाने के मामलों पर गौर करें तो हत्या के मामले में कटौली गांव निवासी पांच हजार के इनामी बदमाश माजिद ने वर्ष 2015 में जौनपुर जिले के केराकत कोतवाली क्षेत्र निवासी अपनी बहन को मां और जीजा को पिता बनाकर अपना पासपोर्ट बनवा लिया और विदेश भाग गया। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने विदेश मंत्रालय तक से गुहार लगाई, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।
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वर्ष 2007 में वाराणसी, गोरखपुर कोर्ट में हुए सिलसिलेवार बम धमाके के मामले में वर्ष 2011 में लखनऊ में गिरफ्तार हूजी के कथित एरिया कमांडर तारिक हकीम का पासपोर्ट भी यहीं से बनाया गया था। जबकि वर्ष 2001 में अयोध्या में हुए बम धमाके के मामले में वर्ष 2010 में लखनऊ के कानपुर रोड पर हुई मुठभेड़ में मारा गया हिजबुल मुजाहिद्दीन का आतंकी इमरान के पास से मिला पासपोर्ट भी आजमगढ़ से ही बना मिला था।
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वर्ष 2002 में शहर के दलालघाट मुहल्ले में स्थित एक लॉज से गिरफ्तार कश्मीरी युवक मुहम्मद युनूस के पास से मिला पासपोर्ट भी यहीं से बनवाया गया था। अंडरवर्ल्ड डान अबू सलेम का भी पासपोर्ट जिले से अलग-अलग नामों से बनाया गया है।
इसी प्रकार देवगांव कोतवाली क्षेत्र के दौना गांव निवासी एक महिला ने भी अलग अलग नामों से दो पासपोर्ट हासिल कर लिया था। मुबारकपुर थाना क्षेत्र के फकरूद्दीनपुर गांव निवासी अकरूज्जमां ने भी फर्जी ढंग से अलग अलग नामों से दो पासपोर्ट बनवाए थे।
ऐसे बनता है पासपोर्ट
indian passport
मामले में आजमगढ़ एसपी अजय कुमार साहनी ने कहा कि तथ्य छिपाकर गलत तरीके से पासपोर्ट बनवाने के अब तक कई मामले उजागर हो चुके हैं। ऐसे में जल्द ही अभियान चलाकर जनपद के बने हुए पासपोर्टों का सत्यापन कराया जाएगा। जिनके पासपोर्ट में खामियां होंगी उसे निरस्त कराया जाएगा। जिस अधिकारी और कर्मचारी की संलिप्तता पाई जाएगी। उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
पासपोर्ट बनाने के लिए ऑनलाइन या पासपोर्ट दफ्तर में आवेदन किया जाता है। फार्म पर आवेदक का फोटो, नाम, पता का संपूर्ण विवरण और दो गवाहों का विवरण रहता है। पासपोर्ट कार्यालय में जमा फार्म पर पुलिस और एलआईयू से रिपोर्ट मांगी जाती है।
सिपाही घर पर जाकर पूरी जानकारी लेकर अपनी रिपोर्ट लगाता है। जबकि एलआईयू के लोग भी अपने स्तर से आवेदन के विषय में संपूर्ण जानकारी लेने के बाद रिपोर्ट लगाते हैं। थाना और एलआईयू की रिपोर्ट के बाद अधिकारियों का हस्ताक्षर होता है।
इसके बाद रिपोर्ट पासपोर्ट कार्यालय भेज दी जाती है। इतनी सारी प्रक्रिया पूरी कराने के बाद भी पासपोर्ट बनाने में फर्जीवाड़ा उजागर होना कर्मचारियों के कर्तव्यनिष्ठा पर सवाल खड़ा करती है।