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असि का अस्तित्व खत्म करने वालों में डीरेका भी

Wed, 20 Apr 2016 02:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Wed, 20 Apr 2016 02:07 AM IST
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DLW also exist to eliminate inactive ones
डीरेका परिसर का डीजल युक्त गंदा पानी पाइप लाइन के सहारे सीधे सुंदरपुर के पास असि नदी में बहाया जा रहा है।
विकास हो यह तो सभी चाहते हैं, पर प्राकृतिक संसाधनों से खिलवाड़ करके, यह कोई नहीं चाहेगा। खासतौर पर तब जब वह प्राकृतिक संसाधन धार्मिक आस्था और शहर की पहचान से जुड़ा हो। पर काशी में डीरेका ने यही किया। विकास की पटकथा पर विनाश की गाथा लिख डाली। डीरेका के अवजल और रासायनिक कचरे ने असि का अस्तित्व ही खत्म कर दिया।  
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अरबों रुपये की लागत से डीजल रेल इंजन कारखाना की स्थापना तो की गई लेकिन इसके डिस्चार्ज के लिए मामूली बजट नहीं निकाला जा सका। अलग से पाइप लाइन बिछाने और डिस्चार्ज के लिए सिस्टम बनाने की बजाए डीरेका के डीजल, मोबिल के अलावा आवासों के अवजल को मोटी पाइप लाइन के सहारे असि नदी में गिरा दिया गया है। इससे असि नदी सीवर लाइन में तब्दील हो गई। इस संस्थान ने आठ एमएलडी गंदे पानी के शोधन के लिए एक एसटीपी भी बनाई है जो सिर्फ दिखावे के अलावा कुछ भी नहीं है। एसटीपी अरसे से ठप है। लिहाजा डीरेका परिसर का पूरा डिस्चार्ज पाइप लाइन के सहारे सीधे सुंदरपुर के पास असि नदी में धड़ल्ले से बहाया जा रहा है। संकट मोचन फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र कहते हैं कि डीरेका ने ही पहली बार असि नदी में गंदे डीजल के साथ अन्य रासायनिक कचरा बहाना शुरू किया।
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अप स्टीम की तलहटी पर कहीं स्कूल तो कहीं नर्सिंग होम खोले जाने की होड़ के चलते नदी के चैनल कई जगह पट गए और उद्गम स्थल से पानी का बहाव थम गया। इसके बाद तलहटी के दोनों तरफ आवासीय कॉलोनियां बसती गईं और उनकी सीवर लाइन सीधे असि नदी में जोड़ी जाने लगी। इसके बाद जगन्नाथपुरी के पास से असि नदी का रास्ता बदल कर उसे नगवा नाले में मिला दिया गया। नगवा नाले में इस नदी को जोड़े जाने के बाद इसकी पहचान नाले के रूप में बताई जाने लगी और फिर यह नदी नाले के रूप में सिमटती चली गई।
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