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Varanasi News: तीन इंजेक्शन के बाद काबू में आया धनराज, रामलीला में 14वीं बार आया था, हाथी के उपयोग की अनुमति नहीं थी

Tue, 20 Oct 2026 01:01 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 20 Oct 2026 01:01 AM IST
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Dhanraj was brought under control after three injections; this was his 14th appearance in the Ramlila, and the use of an elephant was not permitted.
तीन इंजेक्शन के बाद काबू में आया धनराज, रामलीला में 14वीं बार आया था, हाथी के उपयोग की अनुमति नहीं थी
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- डॉक्टरों के मुताबिक, हाथी ने रविवार को मस्ती में मचाया था उत्पात, हथिनी को देखने के बाद बिदक गया था, महावत का ट्रॉमा सेंटर में चल रहा इलाज
- रासलीला मैदान में बांधकर रखा गया, आजमगढ़ ले जाने की तैयारी में है मालिक
- वन विभाग और मालिक के कर्मचारी कर रहे निगरानी, देखने पहुंच रही भीड़
संवाद न्यूज एजेंसी
रामनगर (वाराणसी)। गोरखपुर से आई प्राणि उद्यान के डॉक्टरों की टीम ने रामनगर की रामलीला में आए हाथी धनराज को तीन इंजेक्शन दिए तब जाकर काबू में आ सका। हाथी को रासलीला मैदान में बांधकर रखा गया है। वन विभाग और हाथी मालिक के कर्मचारी उसकी निगरानी कर रहे हैं। डॉक्टरों की टीम के मुताबिक, हाथी मस्ती में है। एक हथिनी को देखने के बाद बिदक गया था। हाथी के मस्ती में रहने की समय सीमा दो महीने की होती है। हाथी जब मस्ती में रहे तो उसे भीड़भाड़ वाले स्थानों पर नहीं भेजना चाहिए। इस मामले में निर्धारित प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया है। दूसरी तरफ, विश्वप्रसिद्ध रामनगर की रामलीला में हाथी के उपयोग की अनुमति वन विभाग से नहीं ली गई थी। यह 14वां मौका है जब आजमगढ़ से हाथी रामनगर की रामलीला में आया था।
प्रभु नारायण इंटर कॉलेज के सामने रासलीला मैदान में बांधे गए हाथी को देखने के लिए सोमवार को भी लोगों की भीड़ पहुंची। सुरक्षा व्यवस्था में रामनगर थाने के चार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। मालिक अब हाथी को वापस आजमगढ़ ले जाने की तैयारी में है। रविवार को बिदके हाथी को काबू में करने के लिए वन विभाग की टीम को 11:30 घंटे तक मशक्कत करनी पड़ी थी। हाथी ने महावत छापलू को कुचल दिया था। उसका बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर में इलाज चल रहा है। हाथी ने कई खंभे उखाड़ दिए थे। जमकर उत्पात मचाया था।
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हाथी के उपयोग के लिए अनुमति की परंपरा नहीं : सुरक्षाधिकारी
दुर्ग प्रशासन के सुरक्षाधिकारी राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि रामलीला में हाथी के उपयोग के लिए अनुमति लेने की परंपरा नहीं रही है। इसी वजह से इस साल भी अनुमति नहीं ली गई थी। रामनगर की रामलीला में काशीराज परिवार के डॉ. अनंत नारायण सिंह और उनके पूर्वजों के हाथी पर सवार होकर लीला में शामिल होने की परंपरा वर्षों पुरानी है।
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60 साल से काशीराज परिवार के पास नहीं है हाथी
रामलीला में शामिल होने वाले हाथी काशीराज परिवार के नहीं होते हैं। पिछले करीब 60 वर्षों से रामलीला के दौरान किराये पर हाथी मंगाए जाते हैं। आजमगढ़ के तीन लोगों के यहां से हाथी पिछले 15 वर्षों से रामलीला में शामिल होने के लिए मंगाए जा रहे हैं।
कोट :
रामनगर की रामलीला में आए हाथियों का लाइसेंस था या नहीं और वन विभाग से अनुमति मांगी गई थी या नहीं, इसकी जांच कराई जाएगी। इसके बाद ही स्पष्ट जानकारी दी जा सकेगी। निधि चौहान, डीएफओ, वाराणसी


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याद आया 2013 का विवाद, हाथी के उपयोग पर फिर उठे सवाल
- धनराज हाथी के बिदकने के बाद जनसुरक्षा की चिंता, वैधानिक अनुमति लेने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
रामनगर। रामलीला में हाथी के उपयोग का विवाद वर्ष 2013 में हुआ था। उस समय वन विभाग ने बिना अनुमति हाथी के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद कुंवर ने हाथी की सवारी बंद कर दी थी। इससे रामलीला प्रभावित हुई थी। रामलीला प्रेमियों का एक बड़ा समूह रामनगर किले के पक्ष में खड़ा हो गया था। रामलीला प्रभावित होने और लोगों के विरोध के बाद प्रशासन को अपने कदम पीछे खींचने पड़े थे।

विश्वप्रसिद्ध रामलीला में हाथी के उपयोग को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। जनसुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण की चिंता सता रही है। रामलीला प्रेमी और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. अवधेश दीक्षित ने सोमवार को सक्षम अधिकारियों को पत्र भेजकर हाथी के उपयोग से पहले सभी जरूरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि हाथी वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-एक में शामिल है। ऐसे में उसके स्वामित्व, परिवहन और सार्वजनिक आयोजनों में उपयोग के लिए लागू प्रावधानों का पालन जरूरी है। उन्होंने स्वामित्व प्रमाण-पत्र, वन विभाग की आवश्यक अनुमति, पशु चिकित्सक का स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र और जिला प्रशासन की अनुमति कराने पर जोर दिया।

परंपरा के साथ सुरक्षा भी जरूरी
डॉ. अवधेश ने कहा कि रामनगर की ऐतिहासिक रामलीला की परंपरा के निर्वहन के साथ जनसुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए। हाथी के उपयोग की सभी जरूरी अनुमतियां और सुरक्षा संबंधी शर्तें पूरी होने के बाद ही किया जाए। अनुमति में हाथी के स्वास्थ्य, देखभाल, नियंत्रण और आम लोगों की सुरक्षा से जुड़े प्रावधान भी स्पष्ट होने चाहिए। उन्होंने प्रशासन से मामले में जल्द संज्ञान लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की अपील की है।
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धनराज को 2012 में खरीदा था, रामलीला में 14वीं बार आया था- आजमगढ़ से तीन हाथी काशी गए हैं, मालिक ने कहा- उसके पास हाथी पालने का है लाइसेंस
संवाद न्यूज एजेंसी
बरदह (आजमगढ़)। रामनगर की रामलीला में आजमगढ़ के बरदह क्षेत्र के असवनिया गांव का हाथी धनराज 14वीं बार गया है। हाथी के मालिक जसवंत सिंह उर्फ शिवली ने बताया कि धनराज को 2012 में खरीदा था। रामनगर की रामलीला में पहले भी जा चुका है लेकिन ऐसी दिक्कत नहीं आर्द थी। इस बार आजमगढ़ से तीन हाथी रामलीला में गए हैं।
जसवंत सिंह के अनुसार, एक हथिनी को देखकर धनराज ने अपना संतुलन खो दिया और भागने लगा। वन विभाग और पुलिस की टीम के पहुंचने से पहले ही हाथी शांत हो गया था। इसके बाद टीम ने हाथी को अपने नियंत्रण में ले लिया। डॉक्टरों ने हाथी को स्वस्थ बताया है। जसवंत सिंह ने बताया कि उनके पास हाथी को पालने का लाइसेंस है। रामनगर तक का ट्रांसपोर्ट परमिट भी है। हाथी स्वस्थ है। तीनों हाथियों की वापसी
रामलीला समाप्त होने के बाद होगी। धनराज भी इन्हीं हाथियों में से एक है। संवाद
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2013 में पहले दिन शाही बग्घी से लीला स्थल पहुंचे थे कुंवर, अगले दिन फिर हाथी की सवारी
संवाद न्यूज एजेंसी
पीडीडीयू नगर। वन विभाग ने 2013 में दुर्ग प्रबंधन से आख्या मांगी और वन्यजीव प्रभाग लखनऊ से अनुमति लेने को कहा था। उस साल लीला के पहले दिन (18 सितंबर 2013) कुंवर अनंत नारायण सिंह हाथी की जगह शाही बग्घी से लीला स्थल पहुंचे थे, लेकिन अगले दिन फिर हाथियों का इस्तेमाल शुरू हो गया। इसके बाद भी हाथियों के इस्तेमाल पर रोक प्रभावी नहीं रही।

दो की जगह चार हाथी मंगाने का दावा
स्थानीय निवासियों के अनुसार, पहले रामलीला में कुंवर अनंत नारायण सिंह और उनके पुत्र यानी युवराज के लिए दो हाथी ही मंगाए जाते थे। अब हाथियों की संख्या बढ़ाकर चार कर दी गई। दो हाथियों पर कुंवर और युवराज, जबकि अन्य दो पर उनके रिश्तेदार सवार होते हैं। रविवार की घटना के बाद सुरक्षा अधिकारी राजेश कुमार शर्मा से हाथियों की संख्या पूछी गई तो उन्होंने पहले तीन हाथी होने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तीनों आजमगढ़ से आए थे। हालांकि, चार हाथियों के इस्तेमाल की बात सामने रखने पर उन्होंने स्वीकार किया और कहा कि एक हाथी बिहार के कैमूर जिले से भी मंगाया गया था। उनके अनुसार, उसे घटना से एक दिन पहले यानी 16 अक्तूबर को ही लौटा दिया गया था।

ये हैं नियम?
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: हाथी अनुसूची-1 में शामिल है और उसे उच्च स्तर का कानूनी संरक्षण प्राप्त है। हाथियों के स्वामित्व, अधिग्रहण और स्थानांतरण से संबंधित लागू कानूनी प्रावधानों का पालन जरूरी है।
स्थानांतरण के नियम : हाथी को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए लागू नियमों के अनुसार आवश्यक दस्तावेज, पशुचिकित्सकीय फिटनेस और संबंधित वन अधिकारियों की स्वीकृति की जरूरत हो सकती है।
सार्वजनिक आयोजन : हाथियों के इस्तेमाल, परिवहन और भीड़भाड़ वाले आयोजन में सुरक्षा के लिए संबंधित वन विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस से लागू अनुमतियों एवं शर्तों की पुष्टि जरूरी है।
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