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भारतीय ज्ञान परंपरा से ही स्थापित होगी विश्व में शांतिः दलाई लामा

Tue, 20 Mar 2018 10:32 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Tue, 20 Mar 2018 10:32 AM IST
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Dalai lama reached sarnath and inaugurate indian universities association
भारतीय विश्वविद्यालय संघ के अधिवेशन में बोलते दलाई लामा - फोटो : अमर उजाला
तिब्बती धर्मगुरु व शांति दूत दलाईलामा ने कहा कि युद्ध करने वाले हीरो नहीं बल्कि हत्यारे हैं। युद्ध के चलते व्यक्ति के अंदर डर और क्रोध पनप रहा है और इसी के चलते दुनिया भर में हिंसा जन्म ले रही है।
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मौजूदा वक्त में सात हजार न्यूक्लियर हथियार इस्तेमाल होने के लिए हैं। कहा कि अब वो वक्त आ गया है कि हम दुनिया को ‘न्यूक्लियर फ्री’ बनाएं। इसके लिए हमें समय सीमा निर्धारित करनी होगी। विश्व स्तर पर अभियान चलाना होगा। इसमें भारत अपनी अहम भूमिका निभा सकता है। 
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केंद्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान सारनाथ में आयोजित भारतीय विश्वविद्यालय संघ के तीन दिवसीय 92वें अधिवेशन का उद्घाटन करते हुए परम पावन दलाईलामा ने कहा कि ‘मैं’ और ‘तुम’ की भावना ही आज तमाम समस्याओं की जड़ है।
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उन्होंने कहा कि भारतीय पारंपरिक ज्ञान भावनाओं पर आधारित है। इसलिए भारत में वो शक्ति है जिससे कि वो पूरी दुनिया को शांति का संदेश दे सकता है। इसलिए शिक्षा के मामले में भारत को यूरोप और अमेरिका की कॉपी करने ही जरूरत नहीं। 

विज्ञान का इस्तेमाल हिंसा के लिए हो रहा

Dalai lama reached sarnath and inaugurate indian universities association
भारतीय विश्वविद्यालय संघ के अधिवेशन में बोलते दलाई लामा - फोटो : अमर उजाला
तकनीकी और विज्ञान का इस्तेमाल आज हिंसा के लिए हो रहा है जो गलत है। आज की 21वीं सदी को शांति व संवाद की सदी प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा से ही बनाया जा सकता है। इस निधि का समावेश हमें आज की आधुनिक शिक्षा में करना होगा।

इससे ही डर और क्रोध की जगह अहिंसा और करुणा स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सिंधु घाटी सभ्यता विश्व की अभूतपूर्व सभ्यता रही है। इसी सभ्यता के कारण भारत में बुद्ध और महावीर जैसे विचारक और अहिंसा के समर्थक हुए।

हमें इसके मूलभूत सिद्धांतों को पाठ्यक्रम में शामिल करना होगा। अधिवेशन की अध्यक्षता भारतीय विश्वविद्यालय संघ के अध्यक्ष प्रो. पीबी शर्मा ने की।

संघ के महासचिव प्रो. फुरकान कमर ने संघ व अधिवेशन के उद्देश्य के बारे में बताया। अधिवेशन में देश भर के 150 कुलपति व शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया। स्वागत कुलपति प्रो. गेशे नवांग समतेन ने किया। 
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