वाराणसी: पर्यटन बंद होने से टूरिस्ट गाइडों पर रोजी-रोटी का संकट, विदेशी पर्यटकों के न आने से बढ़ी परेशानी
कोरोना की वजह से टूरिस्ट गाइड के व्यवसाय पर बहुत प्रभाव पड़ा है। महीनों से पर्यटकों के न आने से उनकी रोजी-रोटी पर संकट आ खड़ा है। वाराणसी में सबसे ज्यादा विदेश पर्यटक आते हैं, जो बिल्कुल भी नहीं आ रहे हैं।
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कोरोना की वजह से जहां तमाम व्यवसाय ठप पड़े हैं। वहीं, दूसरी ओर लोगों के सामने रोजगार की विकट समस्या खड़ी हो गई है। ऐसे में सबसे बड़ा झटका पर्यटन और इससे जुड़े लोगों पर पड़ा है। इनमें ट्यूरिस्ट गाइडों को आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। इनके आय का एक मात्र स्रोत विदेशी पर्यटक हैं, जो कोरोना के कारण पिछले साल से ही नहीं आ रहे। जिसकी वजह से इनकी जमा पूंजी भी खत्म होने के कगार पर है। परिवार का भरण पोषण भी नहीं हो पा रहा। इन पर रोजी-रोटी का संकट आ पड़ा है।
वाराणसी विश्व भर में धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी के रूप में विख्यात है। जिसकी पहचान और इतिहास बताने का काम यहां के टूरिस्ट गाइडों के कंधों पर है। शहर की संकरी गलियों, घाटों, काशी विश्वनाथ और अन्य प्रसिद्ध मंदिरों सहित महात्मा बुद्ध स्थल सारनाथ जैसे पर्यटक स्थलों का इतिहास विश्व के कोने-कोने से आने वाले पर्यटकों को समझना और यहां की मूल संस्कृति से रूबरू कराने का काम इन्हीं गाइडों द्वारा किया जाता है।
शहर में 300 टूरिस्ट गाइड मौजूद हैं, जो आज बेरोजगार बैठे हैं। महामारी की वजह से विदेशी पर्यटकों का आवागमन पूरी तरह से बंद है। वहीं देश के अन्य हिस्सों से भी आने वाले पर्यटक भी नहीं आ रहें। जिससे विश्व की तमाम भाषाओं के जानकार टूरिस्ट गाइडों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
बनारस टूरिस्ट गाइड एशोसिएशन के अध्यक्ष अनूप सेठ ने बताया कि पिछले साल पर्यटन राज्य मंत्री नीलकंठ तिवारी के साथ बैठक कर अपनी समस्या भी बताई थी। जिस पर आश्वासन के बाद अब तक कोई सहायता नही मिल पाई है। सरकार की ओर से गरीबों के लिए राहत पैकेज दिए जाने के अलावा जरूरतमंद गाइडों के किए किसी प्रकार की सुविधा या भत्ते की घोषणा नहीं की गई। इनमें कई ऐसे गाइड हैं, जिन्होंने अपनी जमा पूंजी भी गंवा दी है।