शिक्षक एमएलसी: सपा के लाल बिहारी आगे, जीत लगभग तय, माला पहन घूमे; भाजपा के प्रमोद को 6060 मत मिले
शिक्षक एमएलसी चुनाव की मतगणना में पहले चक्र में सपा के लाल बिहारी यादव को 10,958 मत मिले, जबकि भाजपा के प्रमोद कुमार को 6,060 मत प्राप्त हुए। लाल बिहारी यादव ने 4,898 मतों की बढ़त बना ली। बढ़त के बाद उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है। समर्थकों में उत्साह है और लाल बिहारी माला पहनकर घूमते नजर आए।
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वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना में समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव ने बढ़त बना ली है। प्रथम चक्र के मतों की गणना में उन्हें 10958 मत मिले हैं, जबकि भाजपा के डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा को 6060 मत मिले। दोनों के बीच 4898 मतों का अंतर है। सपा प्रत्याशी की जीत लगभग तय है। वहीं, लाल बिहारी माला पहनकर घूमते नजर आए।
प्रशासन की ओर से अभी परिणाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। वहीं, स्नातक एमएलसी सीट की मतगणना जारी है। शिक्षक एमएलसी सीट पर प्रथम अधिमान के मतों की गणना पूरी होने के बाद सपा प्रत्याशी लाल बिहारी यादव बढ़त में हैं।
विवरण पत्र के अनुसार, शिक्षक सीट पर 22943 वैध मत मिले, जबकि 1441 मत निरस्त किए गए। प्रथम अधिमान के मतों में लाल बिहारी यादव को 10958 और भाजपा के डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा को 6060 मत मिले हैं।
प्रत्याशियों में डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह को 3111, धर्मेंद्र कुमार यादव को 1088, सुधांशु शेखर त्रिपाठी को 533, चेतनारायण दुबे को 450, संजय राय निष्पक्ष को 301, डॉ. कपिल अस्थाना को 152, अक्षय सिंह को 108 और देव नारायण सिंह को 108 मत मिले हैं। पहले चक्र में लाल बिहारी यादव को 6941, प्रमोद कुमार मिश्रा को 3005, डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह को 1696, धर्मेंद्र कुमार यादव को 626, सुधांशु शेखर त्रिपाठी को 303, चेतनारायण दुबे को 271, डॉ. कपिल अस्थाना को 129, संजय राय निष्पक्ष को 93, अक्षय सिंह को 25 और देव नारायण सिंह को 55 मत मिले।
दूसरे चक्र में लाल बिहारी को 4017 और प्रमोद मिश्रा को 3055 मत मिले। दोनों चक्रों को जोड़ने पर आंकड़े सामने आए। वहीं, स्नातक सीट पर मतपत्रों की बंडलिंग और गणना का काम देर रात तक जारी रहा।
कब गिने जाते हैं दूसरी वरीयता के वोट
विधान परिषद चुनाव में मतदान के समय मतदाता उम्मीदवारों के नाम के सामने अपनी पसंद के अनुसार 1, 2, 3 अंक लिखते हैं। '1' उनकी पहली पसंद (फर्स्ट प्रेफरेंस) होती है, '2' दूसरी पसंद, और '3' तीसरी पसंद होती है।
सबसे पहले केवल पहली वरीयता (फर्स्ट प्रेफरेंस यानी '1') के वैध वोटों की गिनती होती है। चुनाव जीतने के लिए एक निश्चित कोटा (कुल वैध मतों का आधा हिस्सा + 1) हासिल करना जरूरी होता है। अगर पहली गिनती में ही किसी उम्मीदवार को जीत का निर्धारित कोटा मिल जाता है, तो वह तुरंत जीत जाता है।
अगर कोई भी उम्मीदवार पहली पसंद के वोटों से आवश्यक कोटा पूरा नहीं कर पाता है, तब दूसरी और अगली वरीयता के वोटों की गिनती शुरू होती है। ऐसी स्थिति में पहली वरीयता के सबसे कम वोट माने वाले उम्मीदवार को रेस से बाहर कर दिया जाता है।
इसके बाद बाहर किए गए उम्मीदवार के मतपत्रों को निकाला जाता है और यह देखा जाता है कि उन बैलेट पेपरों पर दूसरी वरीयता (2 नंबर) किस अन्य उम्मीदवार को दी गई है। उन मतपत्रों को उनकी दूसरी पसंद के आधार पर संबंधित उम्मीदवारों के खातों में ट्रांसफर (स्थानांतरित) कर दिया जाता है।
यह प्रक्रिया तब तक चलती रहती है, जब तक कि कोई उम्मीदवार जरूरी कोटा पार करके जीत हासिल नहीं कर लेता। यही कारण है कि एमएलसी चुनाव में कई बार पहली पसंद में आगे रहने वाला उम्मीदवार भी हार सकता है, अगर उसके पक्ष में दूसरी या अगली वरीयता के पर्याप्त वोट ट्रांसफर न हों।