{"_id":"576c3eae4f1c1bb576b4853e","slug":"cbi-now-post-office-scandal","type":"story","status":"publish","title_hn":"डाकघर घोटाले की अब सीबीआई जांच","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
डाकघर घोटाले की अब सीबीआई जांच
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 24 Jun 2016 01:34 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डीएलडब्ल्यू स्थित डाक घर में हुए लगभग सात करोड़ रुपये के घोटाले की परतों को अब सीबीआई खोलेगी। विभागीय जांच पूरी होने के बाद चीफ पोस्टमास्टर जनरल लखनऊ ने मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। जून के पहले हफ्ते में लखनऊ में मुकदमा दर्ज करने के बाद सीबीआई अब घोटाले की तह तक पहुंचने की कोशिश में है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक इस बारे में सीबीआई ने वाराणसी से पटना तक कई विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों से पूछताछ की है। घोटाले के आरोपी उप डाकपाल कुमार प्रियदर्शी समेत पांच डाक कर्मी पहले ही निलंबित किए जा चुके हैं। इनमें एक अधीक्षक स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं।
डीएलडब्ल्यू डाकघर में 6.92 करोड़ रुपये का यह घोटाला पिछले जनवरी महीने में उजागर हुआ था। पता चला था कि पटना निवासी उपडाकपाल कुमार प्रियदर्शी ने ग्राहकों की जमा रकम फर्जी तरीके से पटना स्थित डाकघर में खोले गए अपने और परिवारीजनों के अलग-अलग खातों में स्थानांतरित कर दी। निदेशालय के निर्देश पर घोटाले की जांच के लिए अलग-अलग टीमें बनाई गईं। विभागीय जांच में घोटाले की पुष्टि के बाद चीफ पोस्टमास्टर जनरल लखनऊ की सिफारिश पर इस मामले को सीबीआई को सुपुर्द कर दिया गया।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक घोटाले के बाद से ही आरोपी उप डाकपाल का पता नहीं है। विभाग से उसने मेडिकल अवकाश ले रखा है। पटना स्थित उसके घर पर भी कोई नहीं है। सीबीआई की अलग-अलग टीमें बनारस से लेकर पटना तक उपडाकपाल की तलाश के साथ ही खातों की जांच कर रही है। साथ ही, अधिकारियों, कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा रही है।
विज्ञापन
घोटाले की विभागीय स्तर पर जांच पूरी कर ली गई है। अब सीबीआई भी मामले की जांच में जुटी है। जांच में विभाग की ओर से सीबीआई की पूरी मदद की जाएगी। - सुनील कुमार राय, निदेशक, डाक सेवाएं, इलाहाबाद परिक्षेत्र
विज्ञापन
डीएलडब्ल्यू डाकघर में 6.92 करोड़ रुपये का यह घोटाला पिछले जनवरी महीने में उजागर हुआ था। पता चला था कि पटना निवासी उपडाकपाल कुमार प्रियदर्शी ने ग्राहकों की जमा रकम फर्जी तरीके से पटना स्थित डाकघर में खोले गए अपने और परिवारीजनों के अलग-अलग खातों में स्थानांतरित कर दी। निदेशालय के निर्देश पर घोटाले की जांच के लिए अलग-अलग टीमें बनाई गईं। विभागीय जांच में घोटाले की पुष्टि के बाद चीफ पोस्टमास्टर जनरल लखनऊ की सिफारिश पर इस मामले को सीबीआई को सुपुर्द कर दिया गया।
विज्ञापन
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक घोटाले के बाद से ही आरोपी उप डाकपाल का पता नहीं है। विभाग से उसने मेडिकल अवकाश ले रखा है। पटना स्थित उसके घर पर भी कोई नहीं है। सीबीआई की अलग-अलग टीमें बनारस से लेकर पटना तक उपडाकपाल की तलाश के साथ ही खातों की जांच कर रही है। साथ ही, अधिकारियों, कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा रही है।
विज्ञापन
घोटाले की विभागीय स्तर पर जांच पूरी कर ली गई है। अब सीबीआई भी मामले की जांच में जुटी है। जांच में विभाग की ओर से सीबीआई की पूरी मदद की जाएगी। - सुनील कुमार राय, निदेशक, डाक सेवाएं, इलाहाबाद परिक्षेत्र