बनारस में शहनाई की दर पर सन्नाटा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सराय हड़हा स्थित उस्ताद के घर पर शुक्रवार की दोपहर सन्नाटा था। उनके पोते बंदे अली बैठका में आराम फरमा रहे थे। आवाज लगाने पर दरवाजा खुला। कुछ देर बार उस्ताद के दूसरे पोते नासिर अब्बास आ गए। जब इस संवाददाता ने उनसे रविवार से नागरी नाटक मंडली के सभागार में उस्ताद की सौंवी जयंती पर होने वाले चार दिनी संगीत महोत्सव की खुशी साझा की तब वह अनजान नजर आए। उनका कहना था कि दादाजान की याद में ऐसे किसी आयोजन की जानकारी उन्हें नहीं है। कार्ड भी संगीत नाटक अकादमी की ओर से नहीं आया है।
काली महाल में रहने वाले उस्ताद के तीसरे पुत्र जामिन हुसैन को भी इस आयोजन के बारे में अखबारों में छपे विज्ञापन के जरिए जानकारी मिली। वह पूछ रहे थे कि वहां तक कैसे पहुंचा जा सकता है। कोई जुगाड़ लगाने की भी वह सोचने लगे। यानी नागरी नाटक मंडली में रविवार से शुरू होने वाले जन्मशती समारोह में उस्ताद की यादें तो होंगी, सरकारी नुमाइंदे होंगे लेकिन उस मौके पर उस्ताद के घर वाले नहीं होंगे। दरअसल इस खास खुशी के मौके पर संगीत नाटक अकादमी ने उत्साद के घर पर न्योता तक नहीं नहीं भिजवाया है। कार्ड भेजना तो दूर किसी ने मुंह से भी नहीं कहा।