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बौद्ध पर्यटन को अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान मिला नया आयाम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 17 Aug 2018 03:02 PM IST
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भाजपा नेताओं के साथ अटल बिहारी वाजपेयी
- फोटो : अमर उजाला
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इंडो-श्रीलंका इंटरनेशनल बुद्धिस्ट एसोसिएशन के संस्थापक और महाबोधि सोसायटी आफ इंडिया के पूर्व संयुक्त महासचिव भिक्षु केसिरी सुमेध थेरो ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को बौद्ध धर्म से काफी लगाव था। बौद्ध परिपथ एवं पर्यटन के विकास के काम उनके ही कार्यकाल के दौरान हुए।
उन्हीं की देन है कि बौद्ध सर्किट जोड़ने के लिए बुद्ध पूर्णिमा और महाबोधि एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन शुरू हुआ। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बाबतपुर के साथ बिहार के बोधगया में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनवाया, जिससे श्रीलंका व थाईलैंड की विमान सेवा शुरू हो सकी।
पांच बार विभिन्न अवसरों पर पूर्व प्रधानमंत्री से मिल चुके थेरो ने बताया कि वर्ष 2000 में अमेरिका में संयुक्त राष्ट्र अधिवेशन में विभिन्न धर्मो के लोग उनके नेतृत्व में गए थे। वर्ष 1998 के नवंबर में भारत सरकार की ओर से उत्तर प्रदेश व बिहार में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध महोत्सव आयोजित किया गया था। बोधगया में महोत्सव के उद्घाटन के दौरान बौद्ध धर्म के विकास पर उनसे करीब पांच मिनट चर्चा हुई थी।
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1998 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में श्रीलंका के राष्ट्रपति भंडारनायके ने अटल बिहारी वाजपेयी से कहा कि बुद्ध पूर्णिमा को अंतरराष्ट्रीय पर्व का दर्जा मिले, जिस पर अटल जी ने सहमति जताई थी। इसी के बाद बुद्ध पूर्णिमा पर कई बड़े आयोजनों की शुरुआत हुई।
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उन्हीं की देन है कि बौद्ध सर्किट जोड़ने के लिए बुद्ध पूर्णिमा और महाबोधि एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन शुरू हुआ। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बाबतपुर के साथ बिहार के बोधगया में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनवाया, जिससे श्रीलंका व थाईलैंड की विमान सेवा शुरू हो सकी।
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पांच बार विभिन्न अवसरों पर पूर्व प्रधानमंत्री से मिल चुके थेरो ने बताया कि वर्ष 2000 में अमेरिका में संयुक्त राष्ट्र अधिवेशन में विभिन्न धर्मो के लोग उनके नेतृत्व में गए थे। वर्ष 1998 के नवंबर में भारत सरकार की ओर से उत्तर प्रदेश व बिहार में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध महोत्सव आयोजित किया गया था। बोधगया में महोत्सव के उद्घाटन के दौरान बौद्ध धर्म के विकास पर उनसे करीब पांच मिनट चर्चा हुई थी।
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1998 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में श्रीलंका के राष्ट्रपति भंडारनायके ने अटल बिहारी वाजपेयी से कहा कि बुद्ध पूर्णिमा को अंतरराष्ट्रीय पर्व का दर्जा मिले, जिस पर अटल जी ने सहमति जताई थी। इसी के बाद बुद्ध पूर्णिमा पर कई बड़े आयोजनों की शुरुआत हुई।
गंगा की स्वच्छता पर बात करने सीधे पहुंच गए तुलसी घाट
अटल बिहारी वाजपेयी
- फोटो : file photo
बीएचयू के प्रो. कौशल किशोर मिश्र बताते हैं कि अटल और प्रो. वीरभद्र मिश्र का नजदीकी संबंध ऐसा था कि गंगा स्वच्छता के मुद्दे पर वार्ता के लिए बनारस आए तो सीधे तुलसी घाट पहुंच गए। महंत आवास से सटे भवन में चार घंटे रुके। विस्तार से बातचीत हुई।
इससे पहले प्रो. मिश्र प्रधानमंत्री आवास पहुंच कर गंगा स्वच्छता प्रोजेक्ट पर अटल से वार्ता कर चुके थे। इस मामले में जब नगर विकास मंत्री लालजी टंडन से प्रो. मिश्र की तकरार हुई तो अटल ने हस्तक्षेप किया।
प्रो. मिश्र ने बताया मशहूर पखावज वादक पंडित अमर नाथ मिश्र, तबला वादक किशन महाराज, गंगा आंदोलन के जनक प्रो. वीरभद्र मिश्र, पद्मविभूषण पट्टाभि रमण शास्त्री, प्रो. विद्या निवास मिश्र, प्रो. कृष्ण नाथ शर्मा, नजीर बनारसी भी अटल के नजदीक थे।
इससे पहले प्रो. मिश्र प्रधानमंत्री आवास पहुंच कर गंगा स्वच्छता प्रोजेक्ट पर अटल से वार्ता कर चुके थे। इस मामले में जब नगर विकास मंत्री लालजी टंडन से प्रो. मिश्र की तकरार हुई तो अटल ने हस्तक्षेप किया।
प्रो. मिश्र ने बताया मशहूर पखावज वादक पंडित अमर नाथ मिश्र, तबला वादक किशन महाराज, गंगा आंदोलन के जनक प्रो. वीरभद्र मिश्र, पद्मविभूषण पट्टाभि रमण शास्त्री, प्रो. विद्या निवास मिश्र, प्रो. कृष्ण नाथ शर्मा, नजीर बनारसी भी अटल के नजदीक थे।
अटल ने दी थी यश-अपयश से दूर रहने की शिक्षा
नाश्ता करते अटल बिहारी वाजपेयी
- फोटो : file photo
यश-अपयश से दूर रहने की शिक्षा पूर्व प्रधानमंत्री ने बनारस में भाजपा नेताओं को दी थी। भाजपा राष्ट्रीय परिषद के सदस्य एवं लोकतंत्र सेनानी सुभाष गुप्ता ने कहा कि जब मैं महानगर का महामंत्री था तो उस दौरान एक बार वाजपेयी बनारस आए थे।
किसी बात को लेकर मैं थोड़ा गुस्सा हो गया था। यहां गुलाबबाग में बैठक के बाद वे मेरे लूना से हर्षपाल कपूर के घर गए। इसके बाद वाजपेयी वहां खाने के लिए बर्फी उठाई और मुझसे कहा कि नाराज क्यों होते हो नेताजी यश अपयश से दूर रहो। राजनीतिक जीवन में यह सब लगा रहता है। इसके बाद अपने खाने के लिए उठाई बर्फी मेरे मुंह में डाल दी।
यही नहीं जब कभी बनारस आते थे तो उस दौरान वे कार्यकर्ताओं के घर पर ही रुकते थे। जैतपुरा में नंदलाल के घर एक बार रुके तो वाजपेयी ने कहा कि सादा भोजन बनवाइएगा। हो सके तो पतली खिचड़ी बनवाएं।
खिचड़ी में नमक नहीं था। वाजपेयी पूरी खिचड़ी खा गए और खाने के बाद बोले कि अरे मैंने इतना सादा भोजन बनाने के लिए नहीं कहा था। हम लोगों ने खिचड़ी को चखा तो पता चला कि उसमें नमक नहीं है।
किसी बात को लेकर मैं थोड़ा गुस्सा हो गया था। यहां गुलाबबाग में बैठक के बाद वे मेरे लूना से हर्षपाल कपूर के घर गए। इसके बाद वाजपेयी वहां खाने के लिए बर्फी उठाई और मुझसे कहा कि नाराज क्यों होते हो नेताजी यश अपयश से दूर रहो। राजनीतिक जीवन में यह सब लगा रहता है। इसके बाद अपने खाने के लिए उठाई बर्फी मेरे मुंह में डाल दी।
यही नहीं जब कभी बनारस आते थे तो उस दौरान वे कार्यकर्ताओं के घर पर ही रुकते थे। जैतपुरा में नंदलाल के घर एक बार रुके तो वाजपेयी ने कहा कि सादा भोजन बनवाइएगा। हो सके तो पतली खिचड़ी बनवाएं।
खिचड़ी में नमक नहीं था। वाजपेयी पूरी खिचड़ी खा गए और खाने के बाद बोले कि अरे मैंने इतना सादा भोजन बनाने के लिए नहीं कहा था। हम लोगों ने खिचड़ी को चखा तो पता चला कि उसमें नमक नहीं है।