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बीएचयू के प्रोफेसर रेवा प्रसाद द्विवेदी को मिला राष्ट्रीय कबीर सम्मान
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sat, 11 Nov 2017 02:23 PM IST
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2013-14 में लिखी संस्कृत कविता के लिए मिला सम्मान
- फोटो : अमर उजाला
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बीएचयू के इमेरिटस प्रोफेसर और संस्कृत के कवि प्रो. रेवा प्रसाद द्विवेदी को मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग की ओर से शुक्रवार को राष्ट्रीय कबीर सम्मान से सम्मानित किया गया। संत कबीर दास की स्मृति में भोपाल में आयोजित सदगुरु कबीर महोत्सव में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें इस सम्मान से नवाजा।
भारतीय भाषाओं की कविता के क्षेत्र में दिया जाने वाला यह सम्मान उन्हें वर्ष 2013-14 में लिखी गई संस्कृत कविता के लिए दिया गया। पुरस्कार के तहत उन्हें तीन लाख रुपये नगद धनराशि और सम्मान पट्टिका प्रदान की गई।
आचार्य द्विवेदी ने अब तक संस्कृत भाषा में तीन महाकाव्य समसामयिक विषयों पर 20 खंडकाव्य तथा दो नाटकों की रचना की है। भोपाल के लाल परेड मैदान में मध्य प्रदेश के राज्यपाल ओम प्रकाश कोहली, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, संस्कृति मंत्री सुरेंद्र पटवा आदि की मौजूदगी में प्रो. द्विवेदी ने यह सम्मान ग्रहण किया।
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समारोह में तेलुगू तथा उड़िया साहित्य के दो अन्य साहित्यकारों को भी सम्मानित किया गया। इस दौरान प्रदेश के जाने-माने लोक गायकों ने कबीर की साखियों का गान प्रस्तुत किया गया।
साहित्य की हो रही उपेक्षा
सम्मान पाने के बाद बातचीत के दौरान प्रो. रेवा प्रसाद द्विवेदी ने मौजूदा दौर में साहित्य की उपेक्षा किए जाने को लेकर दुख व्यक्त किया। कहा कि संभ्रांत और शिक्षित कुलीन लोग ही साहित्य और साहित्यकारों की उपेक्षा कर रहे हैं।
ऐसे परिदृश्य में अब युवा साहित्यकारों की जिम्मेदारी है कि वे आगे आएं और अपनी रचनाशीलता से समाज से साहित्य के रिश्ते प्रगाढ़ करें। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार की ओर से यह सम्मान पाने के बाद इस बात की खुशी है कि कम से कम सरकार ने साहित्य का सम्मान किया। निरंतर 30 साल की रचनाशीलता के बाद देर से ही सही लेकिन मेरे लेखन और साहित्य को पहचान मिली।
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भारतीय भाषाओं की कविता के क्षेत्र में दिया जाने वाला यह सम्मान उन्हें वर्ष 2013-14 में लिखी गई संस्कृत कविता के लिए दिया गया। पुरस्कार के तहत उन्हें तीन लाख रुपये नगद धनराशि और सम्मान पट्टिका प्रदान की गई।
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आचार्य द्विवेदी ने अब तक संस्कृत भाषा में तीन महाकाव्य समसामयिक विषयों पर 20 खंडकाव्य तथा दो नाटकों की रचना की है। भोपाल के लाल परेड मैदान में मध्य प्रदेश के राज्यपाल ओम प्रकाश कोहली, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, संस्कृति मंत्री सुरेंद्र पटवा आदि की मौजूदगी में प्रो. द्विवेदी ने यह सम्मान ग्रहण किया।
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समारोह में तेलुगू तथा उड़िया साहित्य के दो अन्य साहित्यकारों को भी सम्मानित किया गया। इस दौरान प्रदेश के जाने-माने लोक गायकों ने कबीर की साखियों का गान प्रस्तुत किया गया।
साहित्य की हो रही उपेक्षा
सम्मान पाने के बाद बातचीत के दौरान प्रो. रेवा प्रसाद द्विवेदी ने मौजूदा दौर में साहित्य की उपेक्षा किए जाने को लेकर दुख व्यक्त किया। कहा कि संभ्रांत और शिक्षित कुलीन लोग ही साहित्य और साहित्यकारों की उपेक्षा कर रहे हैं।
ऐसे परिदृश्य में अब युवा साहित्यकारों की जिम्मेदारी है कि वे आगे आएं और अपनी रचनाशीलता से समाज से साहित्य के रिश्ते प्रगाढ़ करें। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार की ओर से यह सम्मान पाने के बाद इस बात की खुशी है कि कम से कम सरकार ने साहित्य का सम्मान किया। निरंतर 30 साल की रचनाशीलता के बाद देर से ही सही लेकिन मेरे लेखन और साहित्य को पहचान मिली।