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बीएचयू के अस्पताल में इंडस्ट्रियल गैस से हुई थीं मरीजों की मौत, जांच में हुई पुष्टि
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Fri, 06 Oct 2017 02:47 PM IST
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बीएचयू अस्पताल
- फोटो : self
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बीएचयू के सर सुंदर लाल अस्पताल में छह-सात जून को मरीजों की मौत मामले में हर दिन नई-नई जानकारियां सामने आ रही हैं। आईसीयू में मरीजों की मौत के इस मामले में तीन महीने पहले बनी विश्वविद्यालय की जांच कमेटी की रिपोर्ट पूरी हो गई है।
सूत्रों की मानें तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोर्ट को मामले में अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इस बीच सोशल मीडिया पर एक खबर चल रही है, जिसमें बताया गया है कि जिस कंपनी से अस्पताल में नाइट्रस आक्साइड की आपूर्ति हो रही थी, वह मेडिकल नहीं औद्योगिक उपयोग के लिए पंजीकृत थी। इससे अस्पताल समेत बीएचयू कैंपस में हड़कंप मचा रहा।
ऑपरेशन थिएटर में छह-सात जून को ऑपरेशन के बाद हुई मौत के बाद से ही अस्पताल प्रशासन सकते में हैं। आठ सदस्यीय फैक्ट फाइडिंग कमेटी ने इसमें नाइट्रस आक्साइड और आइसोफ्लोरेन के ओवरडोज की आशंका जताई थी।
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15 जून को कुलपति के निर्देश पर आईएमएस डायरेक्टर प्रो. वीके शुक्ला के संयोजन में जांच कमेटी की रिपोर्ट भी आ चुकी है। हालांकि गाजियाबाद स्थित सेंट्रल ड्रग्स कंट्रोल आर्गनाइजेशन कार्यालय के केंद्रीय औषधि उप नियंत्रक ने गैस के नमूने की जांच कर केंद्रीय औषधि नियंत्रक को जो रिपोर्ट दी थी, उसमें पाया गया था कि ऑपरेशन के दौरान जिस गैस का उपयोग किया गया था, वह नॉन फार्मकोपियल गेड की नाइट्रस आक्साइड थी।
इसका प्रयोग मेडिकल क्षेत्र में नहीं किया जाता है। उसमें उन्होंने कंपनी के पास गैस आपूर्ति के लाइंसेस न होने का भी जिक्र किया था।
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सूत्रों की मानें तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोर्ट को मामले में अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इस बीच सोशल मीडिया पर एक खबर चल रही है, जिसमें बताया गया है कि जिस कंपनी से अस्पताल में नाइट्रस आक्साइड की आपूर्ति हो रही थी, वह मेडिकल नहीं औद्योगिक उपयोग के लिए पंजीकृत थी। इससे अस्पताल समेत बीएचयू कैंपस में हड़कंप मचा रहा।
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ऑपरेशन थिएटर में छह-सात जून को ऑपरेशन के बाद हुई मौत के बाद से ही अस्पताल प्रशासन सकते में हैं। आठ सदस्यीय फैक्ट फाइडिंग कमेटी ने इसमें नाइट्रस आक्साइड और आइसोफ्लोरेन के ओवरडोज की आशंका जताई थी।
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15 जून को कुलपति के निर्देश पर आईएमएस डायरेक्टर प्रो. वीके शुक्ला के संयोजन में जांच कमेटी की रिपोर्ट भी आ चुकी है। हालांकि गाजियाबाद स्थित सेंट्रल ड्रग्स कंट्रोल आर्गनाइजेशन कार्यालय के केंद्रीय औषधि उप नियंत्रक ने गैस के नमूने की जांच कर केंद्रीय औषधि नियंत्रक को जो रिपोर्ट दी थी, उसमें पाया गया था कि ऑपरेशन के दौरान जिस गैस का उपयोग किया गया था, वह नॉन फार्मकोपियल गेड की नाइट्रस आक्साइड थी।
इसका प्रयोग मेडिकल क्षेत्र में नहीं किया जाता है। उसमें उन्होंने कंपनी के पास गैस आपूर्ति के लाइंसेस न होने का भी जिक्र किया था।
'70 साल में अस्पताल में ऐसे मौत कभी नहीं हुईं'
रणदीप सुरजेवाला
- फोटो : ANI
सर सुंदरलाल अस्पताल में एनेस्थीसिया की जगह इंडस्ट्रियल गैस से सर्जिकल वार्ड में मरीजों की मौत पर कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला का कहना है कि यूपी के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है।
स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ सिंह को तत्काल बर्खास्त किया जाना चाहिए। सुरजेवाला ने कहा कि गैस सप्लाई करने वाली कंपनी के मालिक अशोक वाजपेयी और भाजपा विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी हैं। इनके खिलाफ तत्काल आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।
सुरजेवाला का कहना है कि प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में हुई इस तरह की लापरवाही और घोर अनियमितता के समान मामला 70 साल में किसी अस्पताल में नहीं हुआ था। उन्होंने बताया कि अस्पताल में छह से आठ जून के बीच 14 मरीजों की मौत हुई थी।
इसका कारण भी इंडस्ट्रियल गैस दिया जाना था। मामले में लोग इलाहाबाद हाईकोर्ट गए और जांच हुई। जांच रिपोर्ट 18 जुलाई को आ चुकी है। सुरजेवाला ने कहा कि गैस सप्लाई करने वाली कंपनी इलाहाबाद की है।
आरटीआई के जवाब में बताया है कि उनके पास किसी प्रकार की मेडिकल गैस समेत एनेस्थीसिया बनाने का कोई लाइसेंस नहीं है, जबकि अस्पताल और सरकार के साथ मिलकर कंपनी इंडस्ट्रिीयल गैस की सप्लाई कर लोगों की जान ले रही है।
स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ सिंह को तत्काल बर्खास्त किया जाना चाहिए। सुरजेवाला ने कहा कि गैस सप्लाई करने वाली कंपनी के मालिक अशोक वाजपेयी और भाजपा विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी हैं। इनके खिलाफ तत्काल आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।
सुरजेवाला का कहना है कि प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में हुई इस तरह की लापरवाही और घोर अनियमितता के समान मामला 70 साल में किसी अस्पताल में नहीं हुआ था। उन्होंने बताया कि अस्पताल में छह से आठ जून के बीच 14 मरीजों की मौत हुई थी।
इसका कारण भी इंडस्ट्रियल गैस दिया जाना था। मामले में लोग इलाहाबाद हाईकोर्ट गए और जांच हुई। जांच रिपोर्ट 18 जुलाई को आ चुकी है। सुरजेवाला ने कहा कि गैस सप्लाई करने वाली कंपनी इलाहाबाद की है।
आरटीआई के जवाब में बताया है कि उनके पास किसी प्रकार की मेडिकल गैस समेत एनेस्थीसिया बनाने का कोई लाइसेंस नहीं है, जबकि अस्पताल और सरकार के साथ मिलकर कंपनी इंडस्ट्रिीयल गैस की सप्लाई कर लोगों की जान ले रही है।