BHU: यूजी-पीजी...पीएचडी सहित पांच कोर्स में मेडिकल, मनोचिकित्सा और सामाजिक कार्यों की पढ़ाई एक साथ
Varanasi News: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में अगले सत्र 2026-27 से सीयूईटी के तहत एमएसडब्ल्यू व बाकी कोर्स में दाखिले शुरू होंगे। इलाज, पुनर्वास, शरणार्थियों से लेकर फॉरेंसिक सेवाओं में डिग्रीधारकों को नाैकरियां मिलेंगी।
विस्तार
BHU: बीएचयू सहित देशभर के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में मेडिकल, मनोचिकित्सा और सामाजिक कार्यों की पढ़ाई एक ही कोर्स में होगी। कुल पांच कोर्स शुरू होंगे। इसमें स्नातक के दो, परास्नातक के दो और पीएचडी भी कराई जाएगी।
इसमें इलाज, पुनर्वास, शरणार्थियों से लेकर फॉरेंसिक सेवाओं तक में काम करने की तकनीक सिखाई जाएगी। चिकित्सा और मनो चिकित्सा सामाजिक कार्य में स्नातक, चिकित्सा सामाजिक कार्य में परा स्नातक और मनोविज्ञान में स्नातक, मनोचिकित्सा सामाजिक कार्य में परा स्नातक (एमएमएसडब्ल्यू) और चिकित्सा सामाजिक कार्य में परा स्नातक (एमपीएचडब्ल्यू) कराया जाएगा।
इन कोर्स की अनुमति राष्ट्रीय सहबद्ध और स्वास्थ्य देखरेख वृत्ति आयोग (एनसीएएचपी) की ओर से दी गई है। बीएचयू के दो वर्षीय कोर्स मास्टर ऑफ सोशल वर्क में इस तरह की पढ़ाई होती रही है। हालांकि अब इसे काफी विशिष्ट बना दिया गया है।
बीएचयू के सामाजिक विज्ञान के छात्रों और प्रोफेसरों ने बताया इन कोर्स के लिए बीएचयू सबसे बेहतर जगह होगा क्योंकि यहां पर मनोचिकित्सा विभाग, मेडिसिन, आयुर्वेद अस्पताल होने के साथ सामाजिक विज्ञान संकाय भी है। इन सभी कोर्स में आवेदन सीयूईटी के तहत लिए जाएंगे। परीक्षा में आए अंकों की मेरिट बनाकर दाखिला मिलेगा। ये अगले सत्र 2026-27 से लागू होगा।
अस्पतालों में क्लीनिकल ट्रेनिंग भी होगी
क्लास और प्रैक्टिकल के साथ ही क्लीनिकल ट्रेनिंग और अस्पताल आधारित फील्ड वर्क भी कराया जाएगा। सैद्धांतिक और व्यावहारिक शिक्षा को एक साथ लेकर चला जाएगा। शैक्षणिक के साथ ही क्लीनिकल और व्यावसायिक क्षेत्रों में भी जोड़ा जाएगा। स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य सेवा के लिए प्रोफेशनल लोगों को तैयार किया जाएगा। ये सामान्य इलाज, विशेषज्ञता, गहन चिकित्सा, पुनर्वास आदि पर पेशेवर तरीके से काम करेंगे।
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान और सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतर कर्मचारी और विशेषज्ञ तैनात किए जाएंगे। आश्रय गृह, विकलांग और वृद्धावस्था देखभाल के साथ ही स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, अनुसंधान संस्थानों में इन्हें नौकरी मिल सकती है। इसके अलावा सुधार और फोरेंसिक संस्थान के साथ ही जेल, न्यायालय, किशोर न्याय, फोरेंसिक अस्पताल में भी बेहतर विकल्प होगा। सरकारी और गैर-सरकारी संगठन, एनजीओ, सिविल सोसाइटी आदि से जुड़कर भी काम किया जा सकता है।