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स्वदेशी शिक्षा के प्रवर्तक रहे महामना : जस्टिस गिरधर मालवीय
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वाराणसी। महामना मालवीय मिशन की ओर से आयोजित तीन दिवसीय वेबिनार के समापन समारोह में वक्ताओं ने महामना के जीवन मूल्यों की चर्चा करते हुए वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता पर बल दिया। बतौर मुख्य अतिथि महामना मदन मोहन मालवीय के पौत्र और बीएचयू के कुलाधिपति जस्टिस गिरधर मालवीय ने कहा कि महामना ने हमेशा जीवन में नैतिकता, जीवन मूल्यों और उच्च आर्दशों का पालन किया। वह स्वदेशी शिक्षा के प्रवर्तक रहे हैं।
समापन समारोह में जस्टिस मालवीय ने कहा कि महामना मैकाले की शिक्षा पद्धति के साथ सहमत नहीं थे, वे मानते थे कि इस शिक्षा प्रणाली से भारत के नागरिकों का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है। मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख स्वान्त रंजन ने कहा कि मालवीय जी ने समाज एवं राष्ट्र के उत्थान के लिए हिंदू चिंतन के आधार पर अपनी समाजोपयोगी कार्ययोजना को लोकजागरण का विषय बनाया। वे सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के पुरोधा थे। वे पुरातन विद्या के साथ तकनीकी शिक्षा को भी आवश्यक मानते थे। समापन समारोह की अध्यक्षता बीएचयू के रेक्टर प्रो. वीके शुक्ला ने की। अंतिम दिन अलग अलग सत्र में सुप्रीम कोर्ट के से अवकाश प्राप्त जस्टिस बीएन श्रीकृष्णा, महामना मालवीय मिशन के राष्ट्रीय सचिव हरिशंकर सिंह, प्रो. एसके गुप्ता, डॉ.पी नाग, डॉ. उपेंद्र त्रिपाठी आदि ने अपने विचार रखे।
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समापन समारोह में जस्टिस मालवीय ने कहा कि महामना मैकाले की शिक्षा पद्धति के साथ सहमत नहीं थे, वे मानते थे कि इस शिक्षा प्रणाली से भारत के नागरिकों का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है। मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख स्वान्त रंजन ने कहा कि मालवीय जी ने समाज एवं राष्ट्र के उत्थान के लिए हिंदू चिंतन के आधार पर अपनी समाजोपयोगी कार्ययोजना को लोकजागरण का विषय बनाया। वे सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के पुरोधा थे। वे पुरातन विद्या के साथ तकनीकी शिक्षा को भी आवश्यक मानते थे। समापन समारोह की अध्यक्षता बीएचयू के रेक्टर प्रो. वीके शुक्ला ने की। अंतिम दिन अलग अलग सत्र में सुप्रीम कोर्ट के से अवकाश प्राप्त जस्टिस बीएन श्रीकृष्णा, महामना मालवीय मिशन के राष्ट्रीय सचिव हरिशंकर सिंह, प्रो. एसके गुप्ता, डॉ.पी नाग, डॉ. उपेंद्र त्रिपाठी आदि ने अपने विचार रखे।
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